अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा चीन के खिलाफ किए गए नए टैरिफ ऐलान के बाद वैश्विक बाजारों में बड़ी हलचल देखी गई है. इस ऐलान का सबसे बड़ा असर क्रिप्टोकरेंसी और अमेरिकी शेयर बाजार पर पड़ा, जहां बड़ी गिरावट दर्ज की गई. ट्रंप ने चीन से आने वाले सभी ‘महत्वपूर्ण सॉफ्टवेयर’ पर 100% अतिरिक्त टैरिफ लगाने की घोषणा की, जिससे वैश्विक निवेशकों में ट्रेड वॉर की आशंका फिर से गहराने लगी है.
डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर यह घोषणा की कि 1 नवंबर 2025 से, या उससे पहले यदि चीन कोई बड़ा व्यापारिक कदम उठाता है, तो अमेरिका चीन से आने वाले सभी क्रिटिकल सॉफ्टवेयर पर 100% नया टैरिफ लगाएगा. ट्रंप ने कहा कि यह टैक्स मौजूदा 30% टैरिफ से अलग होगा, जिससे कुल टैरिफ दर 130% तक पहुंच सकती है.
सॉफ्टवेयर पर एक्सपोर्ट कंट्रोल
इसके साथ ही अमेरिका सभी जरूरी सॉफ्टवेयर पर एक्सपोर्ट कंट्रोल (निर्यात नियंत्रण) भी लागू करेगा. ट्रंप का कहना है कि चीन कई तकनीकी और औद्योगिक उत्पादों पर एक्सपोर्ट कंट्रोल लगाने की योजना बना रहा है, जो अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए एक गंभीर खतरा हो सकता है.
चीन का पलटवार
ट्रंप के बयान के कुछ ही घंटों के भीतर चीन ने भी जवाबी कार्रवाई का ऐलान किया. चीन ने घोषणा की कि वह अमेरिका से आने वाले जहाजों पर अतिरिक्त पोर्ट शुल्क लगाएगा. यह शुल्क चीन पहुंचने वाले अमेरिकी झंडे वाले जहाजों पर $56.13 प्रति टन और अमेरिका लौटने वाले चीनी जहाजों पर $80 प्रति टन होगा. इस कदम को अमेरिका के खिलाफ आर्थिक दबाव के रूप में देखा जा रहा है.
साथ ही, यह तनाव ऐसे समय पर सामने आया है जब दोनों देशों के राष्ट्राध्यक्षों की दक्षिण कोरिया में एक संभावित मुलाकात की चर्चा थी. हालांकि, ट्रंप ने अब इस बैठक को "गैर-जरूरी" बताया है.
क्रिप्टो मार्केट में बड़ी गिरावट
डोनाल्ड ट्रंप की घोषणा के बाद सबसे तेज़ प्रतिक्रिया क्रिप्टोकरेंसी बाजार में देखने को मिली.
बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, अमेरिका-चीन के बीच बढ़ते तनाव ने निवेशकों को जोखिम भरे एसेट्स से बाहर निकलने के लिए मजबूर किया. क्रिप्टोकरेंसी को हाई-रिस्क इन्वेस्टमेंट माना जाता है, और ऐसे में निवेशकों ने अपना पैसा सुरक्षित साधनों में लगाने का रुख अपनाया है.
अमेरिकी शेयर बाजार में भी गिरावट
इस गिरावट की लहर केवल अमेरिका तक सीमित नहीं रही; लंदन के FTSE 100 में भी 0.9% की गिरावट देखी गई, जिससे वैश्विक मंदी की चिंता और बढ़ गई.
क्या फिर से शुरू होगा ट्रेड वॉर?
विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप के इस कदम से अमेरिका और चीन के बीच एक नई व्यापारिक जंग की शुरुआत हो सकती है. ट्रंप पहले भी अपने कार्यकाल में चीन के खिलाफ सख्त टैरिफ नीति अपना चुके हैं. अब अगर चीन और अमेरिका दोनों ही एक-दूसरे के खिलाफ टैरिफ और एक्सपोर्ट कंट्रोल बढ़ाते हैं, तो इसका असर वैश्विक सप्लाई चेन, टेक्नोलॉजी सेक्टर और आर्थिक विकास पर गंभीर रूप से पड़ सकता है.
टेक उद्योग पर असर
ट्रंप के ऐलान में "क्रिटिकल सॉफ्टवेयर" पर जोर दिया गया है. यह सॉफ्टवेयर कई हाई-टेक इंडस्ट्रीज के लिए जरूरी हैं, जैसे:
चीन इन क्षेत्रों में प्रमुख निर्यातक है, और इनपर एक्सपोर्ट कंट्रोल या टैरिफ से अमेरिकी कंपनियों को भारी लागत बढ़ोत्तरी का सामना करना पड़ सकता है. टेस्ला, एप्पल, अमेजन जैसी कंपनियों के स्टॉक्स में गिरावट इसका संकेत हैं कि निवेशकों को भविष्य में इनके मुनाफे पर असर की आशंका है.
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