ट्रंप को पाकिस्तान में मिल गया सोने का भंडार! अरबों डॉलर उड़ाने को तैयार, क्या है प्रोजेक्ट वॉल्ट?

वैश्विक स्तर पर जरूरी खनिजों और दुर्लभ धातुओं को लेकर देशों के बीच प्रतिस्पर्धा लगातार तेज होती जा रही है.

Trump will invest billions of dollars in Pakistan Project Vault
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Project Vault: वैश्विक स्तर पर जरूरी खनिजों और दुर्लभ धातुओं को लेकर देशों के बीच प्रतिस्पर्धा लगातार तेज होती जा रही है. इसी रणनीतिक दौड़ में अमेरिका ने पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में स्थित रेको दीक खनन परियोजना में 1.3 अरब डॉलर के निवेश का ऐलान किया है. यह निवेश अमेरिका की नई वैश्विक पहल ‘प्रोजेक्ट वॉल्ट’ के तहत किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य दुनियाभर में क्रिटिकल मिनरल्स की सप्लाई चेन को मजबूत करना और इन संसाधनों के बाजार में अमेरिका की भूमिका को बढ़ाना है.

अमेरिकी विदेश विभाग ने बुधवार को इस फैसले की जानकारी सार्वजनिक की. बयान के मुताबिक, रेको दीक इस योजना के तहत अमेरिका द्वारा देश के बाहर चुनी गई एकमात्र परियोजना है. इससे साफ है कि अमेरिका की नजर इस क्षेत्र में मौजूद विशाल खनिज भंडारों पर लंबे समय से टिकी हुई थी.

‘प्रोजेक्ट वॉल्ट’ क्या है और क्यों अहम है?

‘प्रोजेक्ट वॉल्ट’ की घोषणा 2 फरवरी 2026 को डोनाल्ड ट्रंप ने की थी. इस पहल का संचालन अमेरिकी एक्सपोर्ट-इम्पोर्ट बैंक (EXIM) के चेयरमैन के नेतृत्व में किया जा रहा है. इस योजना का मुख्य उद्देश्य अमेरिका और उसके सहयोगी देशों के लिए जरूरी खनिजों की सुरक्षित और भरोसेमंद आपूर्ति सुनिश्चित करना है, ताकि भविष्य में तकनीकी, रक्षा और ऊर्जा क्षेत्रों में किसी तरह की कच्चे माल की कमी न हो.

इस प्रोजेक्ट के तहत EXIM ने कुल 10 अरब डॉलर के ऋण को मंजूरी दी है, जिसे एजेंसी के इतिहास में सबसे बड़े वित्तीय समर्थन पैकेजों में से एक माना जा रहा है. पिछले एक वर्ष के दौरान EXIM ने महत्वपूर्ण खनिज परियोजनाओं के लिए लगभग 14.8 अरब डॉलर के लेटर्स ऑफ इंटरेस्ट जारी किए हैं. इन्हीं सौदों में पाकिस्तान के रेको दीक प्रोजेक्ट में किया गया 1.3 अरब डॉलर का निवेश भी शामिल है.

अमेरिका के भीतर निवेश, विदेश में केवल पाकिस्तान

‘प्रोजेक्ट वॉल्ट’ के तहत अमेरिका ने अपने देश के भीतर कई अहम परियोजनाओं में पूंजी लगाई है. इनमें एक 10 अरब डॉलर की योजना शामिल है, जिसे अमेरिकी रणनीतिक क्रिटिकल मिनरल रिजर्व के रूप में विकसित किया जाना है. इसके अलावा अलग-अलग राज्यों में धातु और खनिज प्रोसेसिंग से जुड़ी परियोजनाओं में भी निवेश किया गया है:

  • पेंसिल्वेनिया में टाइटेनियम, निकल और उन्नत धातु पाउडर उत्पादन के लिए 27.4 मिलियन डॉलर
  • टेनेसी में एडवांस्ड मटेरियल और जरूरी धातुओं की प्रोसेसिंग के लिए 23.5 मिलियन डॉलर
  • न्यूयॉर्क में जिंक खनन और उत्पादन परियोजना के लिए 15.9 मिलियन डॉलर
  • वर्जीनिया में टाइटेनियम प्रोसेसिंग और मैन्युफैक्चरिंग यूनिट के लिए 11.1 मिलियन डॉलर

इन सभी निवेशों के बीच यह तथ्य खास है कि अमेरिका ने अपने देश के बाहर केवल पाकिस्तान में ही सीधे तौर पर निवेश करने का फैसला किया है. इससे रेको दीक परियोजना की रणनीतिक अहमियत का अंदाजा लगाया जा सकता है.

रेको दीक: क्यों है यह इलाका इतना महत्वपूर्ण?

रेको दीक खान पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में स्थित है और इसे दुनिया के सबसे बड़े तांबा और सोना भंडारों में से एक माना जाता है. उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, इस क्षेत्र में लगभग 5.9 अरब टन अयस्क मौजूद है. इसमें औसतन 0.41 प्रतिशत तांबा और करीब 41.5 मिलियन औंस सोने का भंडार बताया जाता है.

भौगोलिक रूप से यह इलाका बलूचिस्तान की चागाई पर्वत श्रृंखला का हिस्सा है, जो क्वेटा-तफ्तान रेलवे लाइन और अफगानिस्तान की सीमा के बीच फैली हुई है. यह क्षेत्र प्राचीन ज्वालामुखीय गतिविधियों से बना माना जाता है, जिसकी वजह से यहां खनिज संसाधनों की भरमार पाई जाती है. विशेषज्ञों के मुताबिक, आने वाले दशकों में रेको दीक जैसे भंडार वैश्विक धातु बाजार में बड़ी भूमिका निभा सकते हैं.

पुराने कानूनी विवादों का इतिहास

रेको दीक परियोजना का इतिहास विवादों से भी जुड़ा रहा है. साल 2011 में यह खान पाकिस्तान सरकार और थेथ्यान कॉपर कंपनी (TCC) के बीच बड़े कानूनी टकराव का विषय बनी थी. TCC, चिली की कंपनी Antofagasta और कनाडा की Barrick Gold की साझेदारी वाली इकाई थी. उस समय आरोप लगे थे कि ऑस्ट्रेलिया-पाकिस्तान निवेश समझौते के प्रावधानों का उल्लंघन किया गया और खनन अधिकारों को लेकर गलत फैसले लिए गए.

इस विवाद ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काफी सुर्खियां बटोरी थीं और लंबे समय तक कानूनी प्रक्रिया चलती रही. अब अमेरिका का इस परियोजना में निवेश करना यह संकेत देता है कि रेको दीक को लेकर रणनीतिक और आर्थिक रुचि एक बार फिर वैश्विक स्तर पर बढ़ गई है.

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