China On Trump Tariff: तेल और ताकत की जंग में अब चीन खुलकर मैदान में उतर आया है. अमेरिका की ओर से रूस से तेल खरीदने को लेकर चीन पर बढ़ते दबाव के बीच बीजिंग ने सख्त प्रतिक्रिया दी है. चीन ने स्पष्ट किया है कि उसका रूस के साथ तेल व्यापार पूरी तरह वैध है और यदि उसके हितों को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की गई, तो वह "कड़े जवाबी कदम" उठाने से पीछे नहीं हटेगा.
चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने एक मीडिया ब्रीफिंग में अमेरिका की आलोचना करते हुए कहा कि वॉशिंगटन की यह नीति "एकतरफा दबाव और धमकी" पर आधारित है. उन्होंने कहा कि इस तरह के कदम न केवल अंतरराष्ट्रीय व्यापार कानूनों का उल्लंघन करते हैं, बल्कि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं को भी अस्थिर करते हैं. लिन जियान ने कहा, “चीन का रूस समेत किसी भी देश के साथ सामान्य ऊर्जा सहयोग पूरी तरह वैध और अंतरराष्ट्रीय नियमों के अनुरूप है.”
तेल व्यापार पर चीन का रुख साफ
बीजिंग का कहना है कि वह तेल जैसे रणनीतिक संसाधनों पर किसी बाहरी दबाव को स्वीकार नहीं करेगा. चीन ने अमेरिका को यह भी संकेत दिया कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को राजनीति के चश्मे से देखना गैर-जरूरी तनाव को जन्म दे सकता है. लिन जियान ने यह भी स्पष्ट किया कि चीन अपने व्यापारिक हितों की रक्षा के लिए जरूरी हर कदम उठाएगा, चाहे वह कूटनीतिक हो या व्यापारिक.
ट्रंप का भारत पर निशाना, लेकिन चीन ने खींची अपनी लाइन
गौरतलब है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में एक बयान में भारत द्वारा रूस से कच्चा तेल खरीदने पर भी असहमति जताई थी. ट्रंप ने कहा था कि इस तरह के व्यापार से रूस को यूक्रेन युद्ध में आर्थिक सहयोग मिल रहा है.
हालांकि चीन ने इस मुद्दे को भारत से अलग रखते हुए साफ किया कि उसका रुख स्वतंत्र और स्पष्ट है. बीजिंग यह मानता है कि व्यापारिक निर्णय किसी देश की आर्थिक सुरक्षा और ऊर्जा जरूरतों के आधार पर लिए जाते हैं, न कि किसी बाहरी शक्ति के दबाव में.
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