अब और ताकतवर होंगे ट्रंप; सुप्रीम कोर्ट ने अमेरिकी राष्ट्रपति के पक्ष में सुनाया फैसला, 91 साल पुरानी व्यवस्था बदली

Donald Trump: सुप्रीम कोर्ट ने 91 साल पुराने कानूनी संरक्षण को पलटते हुए राष्ट्रपति की कार्यकारी शक्तियों का दायरा बढ़ा दिया, हालांकि फेडरल रिजर्व को इस फैसले से बाहर रखा गया है.

Trump set to become even more powerful Supreme Court rules in favor of the US President
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Donald Trump: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को देश की सर्वोच्च अदालत से महत्वपूर्ण कानूनी जीत मिली है. अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने अपने ताजा फैसले में कहा है कि राष्ट्रपति को अब फेडरल ट्रेड कमीशन (FTC) जैसे स्वतंत्र संघीय आयोगों के सदस्यों को पद से हटाने का व्यापक अधिकार प्राप्त होगा. इस निर्णय को राष्ट्रपति पद की कार्यकारी शक्तियों को मजबूत करने वाला बड़ा कदम माना जा रहा है.

6-3 के बहुमत से सुनाया गया फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने यह फैसला छह बनाम तीन के बहुमत से सुनाया. अदालत के छह रूढ़िवादी (कंजर्वेटिव) न्यायाधीशों ने राष्ट्रपति के अधिकारों के पक्ष में राय दी, जबकि तीन उदारवादी (लिबरल) जजों ने इसका विरोध किया. विवाद की शुरुआत उस समय हुई थी जब राष्ट्रपति ट्रंप ने 2025 में रेबेका स्लॉटर को एफटीसी कमिश्नर के पद से हटा दिया था. स्लॉटर की नियुक्ति पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडेन के कार्यकाल में हुई थी. उस समय लागू कानून के अनुसार, किसी एफटीसी आयुक्त को केवल अक्षमता या गंभीर कदाचार जैसे सीमित आधारों पर ही हटाया जा सकता था.

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

मुख्य न्यायाधीश जॉन रॉबर्ट्स की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि ऐसा कानून, जो राष्ट्रपति की संवैधानिक कार्यकारी शक्तियों को सीमित करता है, संविधान की भावना के अनुरूप नहीं माना जा सकता. अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि एफटीसी देश के आर्थिक और व्यापारिक ढांचे से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण कानूनों को लागू करता है. चूंकि यह कार्य कार्यपालिका के अधिकार क्षेत्र में आता है, इसलिए राष्ट्रपति को इन अधिकारियों की नियुक्ति और पद से हटाने का अधिकार होना चाहिए.

91 साल पुरानी कानूनी व्यवस्था बदली

इस फैसले के साथ सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 1935 के चर्चित 'हम्फ्रीज एग्जीक्यूटर बनाम यूनाइटेड स्टेट्स' मामले में दिए गए ऐतिहासिक निर्णय को भी पलट दिया. लगभग नौ दशकों से यही फैसला स्वतंत्र सरकारी एजेंसियों के प्रमुखों को राजनीतिक कारणों से हटाए जाने से सुरक्षा प्रदान करता था. फैसले के बाद राष्ट्रपति ट्रंप ने इसे संविधान के अनुच्छेद-2 के तहत राष्ट्रपति की शक्तियों की बड़ी पुष्टि बताया. उन्होंने कहा कि कई दशकों से अमेरिकी राष्ट्रपति इस अधिकार को स्पष्ट रूप से स्थापित करने की मांग करते रहे हैं.

लिबरल जजों ने जताई चिंता

हालांकि, अदालत के तीनों लिबरल जज इस फैसले से सहमत नहीं थे. जस्टिस सोनिया सोटोमेयर ने कहा कि इस निर्णय से कई स्वतंत्र सरकारी आयोग सीधे राष्ट्रपति के प्रभाव में आ सकते हैं, जिससे सरकार के भीतर शक्ति संतुलन प्रभावित होने की आशंका है. पूर्व एफटीसी आयुक्त रेबेका स्लॉटर ने भी फैसले पर निराशा व्यक्त करते हुए कहा कि इतने लंबे समय से चली आ रही न्यायिक व्यवस्था को बदलना गंभीर प्रभाव डाल सकता है. उनके अनुसार इससे कांग्रेस की भूमिका कमजोर होगी और आर्थिक नियामक संस्थाओं पर राष्ट्रपति का प्रभाव बढ़ जाएगा.

फेडरल रिजर्व को रखा गया फैसले से अलग

सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया कि यह निर्णय अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व पर लागू नहीं होगा. अदालत ने फेडरल रिजर्व की गवर्नर लीसा कुक को हटाने की राष्ट्रपति ट्रंप की कोशिश को मंजूरी नहीं दी. कोर्ट ने कहा कि फेडरल रिजर्व की संस्थागत स्वतंत्रता पहले की तरह बरकरार रहेगी और उस पर यह नया फैसला प्रभावी नहीं होगा.

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