नई दिल्ली: बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री और अवामी लीग की प्रमुख शेख हसीना ने करीब 22 महीने बाद पहली बार सार्वजनिक रूप से इसी साल बांग्लादेश लौटने की इच्छा जताई है. उनके इस बयान के बाद ढाका और नई दिल्ली दोनों जगह राजनीतिक हलचल तेज हो गई है. हसीना के खिलाफ बांग्लादेश में सैकड़ों मामले दर्ज हैं और एक मामले में उन्हें मौत की सजा भी सुनाई जा चुकी है. ऐसे में उनकी संभावित वापसी को लेकर कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं.
हसीना की वापसी क्यों मानी जा रही है अहम?
78 वर्षीय शेख हसीना के भारत आने के बाद बांग्लादेश में अवामी लीग की राजनीतिक गतिविधियां लगभग ठप पड़ गईं. पार्टी पर प्रतिबंध लगा हुआ है और नेतृत्व को लेकर भी लगातार सवाल उठ रहे हैं. पार्टी के भीतर नए नेतृत्व की मांग बढ़ रही थी. माना जा रहा है कि यदि हसीना पार्टी की कमान किसी अन्य नेता को सौंप देतीं, तो भविष्य में उनके परिवार का प्रभाव संगठन पर कमजोर पड़ सकता था.
ऐसे में उन्होंने स्वयं बांग्लादेश लौटकर पार्टी का नेतृत्व संभालने का संकेत दिया है. इससे पहले भी विपक्ष में रहते हुए हसीना सक्रिय राजनीति करती रही हैं.
क्या वापसी के लिए राजनीतिक माहौल तैयार हो रहा है?
हाल के घटनाक्रमों ने बांग्लादेश की राजनीति में नई चर्चाओं को जन्म दिया है.
स्थानीय चुनाव में राहत: चुनाव आयोग ने हाल ही में आगामी पंचायत चुनाव में अवामी लीग से जुड़े कार्यकर्ताओं को निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ने की अनुमति देने का फैसला किया. इसके लिए हलफनामा देने की शर्त रखी गई है. माना जा रहा है कि सत्तारूढ़ दल के अपेक्षाकृत नरम रुख के बाद यह फैसला लिया गया. देश में वर्ष के अंत तक पंचायत चुनाव प्रस्तावित हैं.
जमात-ए-इस्लामी पर प्रतिबंध की मांग: संसद में जमात-ए-इस्लामी पर प्रतिबंध लगाने की मांग उठी. सत्तारूढ़ दल के सांसद रफीकुल इस्लाम ने इस मुद्दे को उठाया, जबकि सरकार में मंत्री और वरिष्ठ नेता फखरुल इस्लाम आलमगीर ने कहा कि 1971 की घटनाओं को लेकर जमात ने अब तक माफी नहीं मांगी है.
जमात का आरोप: जमात-ए-इस्लामी के सांसद एटीएम अजहर ने आरोप लगाया कि सरकार अवामी लीग को फिर से राजनीतिक मुख्यधारा में लाने की तैयारी कर रही है. उनका दावा है कि जमात को कमजोर कर शेख हसीना को विपक्ष की भूमिका में स्थापित करने की कोशिश की जा रही है.
शेख हसीना पर दर्ज हैं 663 मामले
ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल बांग्लादेश के अनुसार, शेख हसीना के खिलाफ कुल 663 मुकदमे दर्ज हैं. इनमें 453 मामले हत्या से जुड़े बताए गए हैं. इसके अलावा उन पर भ्रष्टाचार और पद के दुरुपयोग सहित अन्य आरोप भी लगाए गए हैं. उनके परिवार के कम से कम सात सदस्य भी विभिन्न मामलों का सामना कर रहे हैं.
अब तक पांच मामलों में अदालत फैसला सुना चुकी है. इनमें मानवता के खिलाफ अपराध से जुड़े एक मामले में हसीना को मौत की सजा सुनाई गई है. यह मामला 2024 के विद्रोह के दौरान कथित रूप से प्रदर्शनकारियों की हत्या के आदेश देने के आरोप से जुड़ा है.
2024 के घटनाक्रम के बाद भारत में हैं हसीना
जुलाई 2024 में बांग्लादेश में हुए व्यापक विरोध प्रदर्शनों के बाद 5 अगस्त 2024 को शेख हसीना की सरकार का तख्तापलट हो गया था. इसके बाद वह अपने रिश्तेदारों के साथ भारत आ गईं. तब से वह नई दिल्ली में रह रही हैं. अब उनके बांग्लादेश लौटने के ऐलान ने देश की राजनीति में नए समीकरणों और संभावित बदलावों को लेकर अटकलों का दौर तेज कर दिया है.
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