ट्रंप नाराज, लेकिन पुतिन से मेलानिया की होती है बात... अमेरिका की फर्स्ट लेडी ने खुद किया खुलासा, जानें क्या कहा

Melania Trump On Putin: अमेरिका की फर्स्ट लेडी मेलानिया ट्रंप ने रूस-यूक्रेन युद्ध के मानवीय पक्ष को सामने लाते हुए एक नई पहल की शुरुआत की है. मेलानिया ने यह जानकारी दी है कि उन्होंने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ एक सीधा संवाद चैनल (open channel of communication) स्थापित किया है.

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Melania Trump On Putin: अमेरिका की फर्स्ट लेडी मेलानिया ट्रंप ने रूस-यूक्रेन युद्ध के मानवीय पक्ष को सामने लाते हुए एक नई पहल की शुरुआत की है. मेलानिया ने यह जानकारी दी है कि उन्होंने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ एक सीधा संवाद चैनल (open channel of communication) स्थापित किया है, जिसका उद्देश्य युद्ध की विभीषिका में बिछड़ चुके यूक्रेनी बच्चों को उनके परिवारों से पुनः मिलाना है.

इस प्रयास की शुरुआत एक पत्र से हुई, जो मेलानिया ट्रंप ने रूसी राष्ट्रपति को लिखा था. यह पत्र अगस्त में अलास्का में हुई ट्रंप-पुतिन बैठक के दौरान अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा पुतिन को सौंपा गया था. बैठक में मेलानिया स्वयं उपस्थित नहीं थीं, लेकिन उनके पत्र ने इस संवेदनशील मुद्दे पर बातचीत की राह खोल दी.

पुतिन का जवाब और बच्चों की वापसी की पुष्टि

मेलानिया ट्रंप ने हाल ही में मीडिया को जानकारी दी कि पुतिन ने उनके पत्र का औपचारिक उत्तर भेजा है, जिसमें रूस द्वारा कुछ यूक्रेनी बच्चों को उनके परिवारों के पास वापस भेजने की जानकारी दी गई है. मेलानिया के अनुसार, “पिछले 24 घंटों में 8 बच्चों को उनके परिवारों से फिर से मिलाया गया है. इन बच्चों में कुछ ऐसे थे जो युद्ध के मोर्चे पर अपने माता-पिता से अलग हो गए थे. अब वे अपने घर लौट चुके हैं.”

मेलानिया ने इस प्रयास को पूरी तरह मानवीय और गैर-राजनीतिक बताते हुए कहा कि हर बच्चे को वह प्यार और सुरक्षा मिलनी चाहिए जो उसका अधिकार है. उन्होंने कहा, “हर बच्चे के दिल में एक शांतिपूर्ण जीवन का सपना होता है, प्यार, उम्मीद और डर से मुक्त जीवन का सपना. लेकिन युद्ध ने उनके बचपन को छीन लिया है.”

19,000 से अधिक बच्चे अब भी लापता

यूक्रेनी अधिकारियों के अनुसार, फरवरी 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद से अब तक लगभग 19,500 से अधिक बच्चे रूस या उसके कब्जे वाले इलाकों में जबरन ले जाए गए हैं. इनमें से कई बच्चे अपने माता-पिता और परिवारों से अलग हो चुके हैं और अब तक उनकी कोई जानकारी नहीं है.

इन बच्चों में कुछ को कथित रूप से रूसी नागरिकता दी जा चुकी है या उन्हें गोद लेने की प्रक्रिया में डाला गया है, जिसे यूक्रेन ने अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकारों का उल्लंघन बताया है. मेलानिया ने यह भी कहा कि हाल ही में जो आठ बच्चे अपने परिवारों से मिलाए गए हैं, उनमें से तीन युद्ध क्षेत्र में लड़ाई के बीच अपने माता-पिता से बिछड़ गए थे.

रूस की रिपोर्ट और अमेरिका की पुष्टि

रूस की तरफ से राष्ट्रपति पुतिन ने मेलानिया को जो उत्तर भेजा, उसमें उन बच्चों की पहचान, वर्तमान स्थिति और पुनर्मिलन की विस्तृत जानकारी शामिल थी. व्हाइट हाउस के एक सूत्र के मुताबिक, इस रिपोर्ट को अमेरिकी अधिकारियों ने सत्यापित किया है.

मेलानिया ट्रंप ने इस पहल को पूरी तरह 'soft diplomacy' का हिस्सा बताया, और कहा कि यह किसी सरकार के निर्देश पर नहीं, बल्कि मानवीय आधार पर किया गया कदम है.

‘मेलानिया चैनल’: एक अनोखा संवाद पुल

अमेरिका और रूस के बीच बढ़ते राजनीतिक और सैन्य तनावों के बीच मेलानिया ट्रंप द्वारा स्थापित यह संवाद एक नवीन और असामान्य पहल के रूप में देखा जा रहा है. राजनीतिक विश्लेषक इसे “सॉफ्ट डिप्लोमेसी का एक अहम उदाहरण” मान रहे हैं, जहाँ व्यक्तिगत स्तर पर हुई पहल ने अंतरराष्ट्रीय मानवीय संकट पर असर डाला है.

व्हाइट हाउस के एक पूर्व अधिकारी के अनुसार, “यह पहल एक ऐसा पुल बन सकती है जो युद्ध के माहौल में भी संवाद और सहयोग की संभावनाएं पैदा करता है. हालांकि यह पूरी तरह गैर-राजनीतिक माना गया है, लेकिन इसके असर कूटनीतिक स्तर पर भी देखे जा सकते हैं.”

मेलानिया की मानवीय अपील

अपने पत्र में मेलानिया ट्रंप ने लिखा, “हर बच्चा अपने दिल में एक शांत सपना रखता है, प्यार, उम्मीद और डर से आज़ादी का सपना. एक मां के रूप में, मैं जानती हूं कि युद्ध के शिकार इन मासूम बच्चों को उनका परिवार और उनका बचपन लौटाना कितना जरूरी है.” उन्होंने पुतिन से आग्रह किया था कि जिन बच्चों को युद्ध के दौरान रूस ले जाया गया है, उन्हें जल्द से जल्द उनके परिवारों के पास भेजा जाए.

क्या यह पहल बड़ा बदलाव ला सकती है?

हालांकि यह पहल अब तक सीमित पैमाने पर रही है, लेकिन यह सवाल उठ रहा है कि क्या मेलानिया ट्रंप की यह मानवीय कोशिश भविष्य में अमेरिका और रूस के बीच एक बातचीत का आधार बन सकती है? विशेषज्ञ मानते हैं कि जब कूटनीतिक रास्ते बंद हो जाते हैं, तब मानवीय पहल और भावनात्मक संवाद समाधान की नई राह दिखा सकते हैं.

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