Russia Reacts On Oil Sanction: अमेरिका ने रूस की दो प्रमुख तेल कंपनियों, रोसनेफ्ट और लुकोइल पर आर्थिक प्रतिबंध लगाने का बड़ा कदम उठाया है. इस फैसले का मकसद रूस को आर्थिक तौर पर कमजोर करना और यूक्रेन के साथ जारी संघर्ष की फंडिंग पर चोट करना बताया जा रहा है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साफ कर दिया है कि जब तक रूस शांति वार्ता के लिए गंभीर नहीं होगा, तब तक ये प्रतिबंध जारी रहेंगे. इस कदम के बाद रूस ने कड़े विरोध में प्रतिक्रिया देना शुरू कर दिया है, जिसमें इन प्रतिबंधों को ‘युद्ध के समान’ बताया गया है.
रूस की विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मारिया जाखारोवा ने कहा कि अमेरिका के ये प्रतिबंध रूस को झुकने पर मजबूर नहीं कर पाएंगे बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाएंगे. उनका कहना था कि शांति वार्ता पर बातचीत जारी रखने में कोई बड़ी बाधा नहीं है, लेकिन यह प्रक्रिया मीडिया में लीक होकर नहीं, बल्कि राजनयिक माध्यमों से होनी चाहिए. रूस की इस प्रतिक्रिया से साफ है कि वे अमेरिका के इस कदम को राजनीतिक दबाव से ज्यादा गंभीर चुनौती मानते हैं.
‘युद्ध के समान’ कार्रवाई पर पूर्व राष्ट्रपति मेदवेदेव का कड़ा बयान
रूस के पूर्व राष्ट्रपति दिमित्री मेदवेदेव ने इस मुद्दे पर और भी तीखी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने अमेरिका को रूस का ‘धुर विरोधी’ घोषित करते हुए कहा कि ट्रंप का यह कदम रूस के खिलाफ युद्ध के समान है. मेदवेदेव ने अमेरिका पर आरोप लगाया कि वह यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने के बजाय ‘प्रॉक्सी वॉर’ यानी तुगलकी जंग लड़ने में लगा हुआ है. उन्होंने यह भी कहा कि रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बारे में उनकी उम्मीदें भी अब खत्म हो रही हैं.
ट्रंप का ‘प्रॉक्सी वॉर’ और भारत-चीन पर दबाव
जब से ट्रंप सत्ता में आए हैं, उन्होंने कई वैश्विक संघर्षों को खत्म करने में भूमिका निभाई है, लेकिन यूक्रेन-रूस की जंग उनके नियंत्रण से बाहर रही. पुतिन की जिद और शर्तें साफ हैं, जिससे कोई समझौता संभव नहीं दिख रहा. अमेरिका ने पहले भारत और चीन जैसे देशों पर रूस से कच्चा तेल खरीदने पर टैरिफ लगाने की कोशिश की, लेकिन इसका कोई खास असर नहीं हुआ. अंततः ट्रंप ने ‘प्रॉक्सी वॉर’ की रणनीति अपनाई है, जिससे रूस और अमेरिका के बीच तनाव और बढ़ने की संभावना है.
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