Trump on India Election: अमेरिका में चुनावी व्यवस्था को लेकर बहस एक बार फिर तेज हो गई है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत की चुनाव प्रक्रिया का उदाहरण देते हुए अमेरिका में मतदान के दौरान फोटो पहचान पत्र को अनिवार्य किए जाने की मांग दोहराई है. ट्रंप का कहना है कि चुनाव में पारदर्शिता और कथित धोखाधड़ी को रोकने के लिए प्रत्येक मतदाता की पहचान सुनिश्चित करना जरूरी है.
US President Donald Trump posts on his Truth Social, "Earlier this month, India’s Chief Election Commissioner, Gyanesh Kumar, asked our Administration — How can you have Elections in the U.S. without a valid Photo ID? India’s last Election had 646,000,000 Voters! Less than 1%… pic.twitter.com/GDblVs4EHb
— ANI (@ANI) August 18, 2026
ट्रंप ने इस मुद्दे को अपने ‘SAVE America Act’ के समर्थन से जोड़ते हुए कहा कि अमेरिकी नागरिकों को मतदान के लिए पंजीकरण कराते समय नागरिकता का प्रमाण देना चाहिए और पूरे देश में वोटर आईडी की व्यवस्था लागू होनी चाहिए. उन्होंने भारत में मतदान के दौरान पहचान पत्र के इस्तेमाल और पोस्टल बैलेट की सीमित हिस्सेदारी का भी जिक्र किया.
भारत की चुनाव व्यवस्था का ट्रंप ने दिया उदाहरण
डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘Truth Social’ पर भारत की चुनाव प्रक्रिया का उल्लेख किया. उन्होंने दावा किया कि भारत में हालिया आम चुनाव के दौरान एक प्रतिशत से भी कम मतदाताओं ने पोस्टल बैलेट का इस्तेमाल किया था और मतदाताओं के लिए वैध फोटो पहचान पत्र जरूरी था. ट्रंप ने इसी उदाहरण के आधार पर सवाल उठाया कि जब भारत में मतदाताओं की पहचान सुनिश्चित करने के लिए व्यवस्था लागू है, तो अमेरिका में बिना वैध फोटो आईडी के चुनाव कैसे कराए जा सकते हैं. हालांकि, ट्रंप द्वारा भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से जुड़ा जो दावा किया गया है, उसकी स्वतंत्र पुष्टि के लिए आधिकारिक स्रोतों को देखना जरूरी है.
ट्रंप ने CEC ज्ञानेश कुमार का किया जिक्र
ट्रंप ने अपने पोस्ट में दावा किया कि भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने हाल ही में अमेरिकी प्रशासन से सवाल किया था कि अमेरिका में बिना वैध फोटो पहचान पत्र के चुनाव कैसे कराए जा सकते हैं. ट्रंप के मुताबिक, ज्ञानेश कुमार ने भारत में हुए चुनावों का उदाहरण देते हुए अमेरिकी चुनाव व्यवस्था पर सवाल उठाया. इसी संदर्भ में ट्रंप ने अमेरिका में फोटो आईडी की अनिवार्यता को लेकर अपनी पुरानी मांग को फिर से सामने रखा.
नागरिकता का प्रमाण दिखाने पर भी जोर
ट्रंप जिस ‘SAVE America Act’ का समर्थन कर रहे हैं, उसमें केवल फोटो आईडी ही नहीं बल्कि मतदान के लिए रजिस्ट्रेशन के समय नागरिकता का प्रमाण देने की व्यवस्था की मांग की गई है. ट्रंप का तर्क है कि इससे केवल पात्र अमेरिकी नागरिकों के मतदान को सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी. प्रस्तावित व्यवस्था के तहत मतदाता पहचान पत्र की जरूरत को देशभर में लागू करने और मेल के जरिए होने वाले मतदान को सीमित करने की बात भी कही गई है. ट्रंप इसे चुनावी प्रक्रिया की सुरक्षा और विश्वसनीयता बढ़ाने की दिशा में जरूरी कदम बता रहे हैं.
क्या है SAVE America Act?
‘SAVE America Act’ का पूरा नाम ‘Safeguard American Voter Eligibility Act’ है. ट्रंप इस प्रस्तावित कानून को अमेरिकी चुनावों में मतदाता पात्रता और पहचान से जोड़कर देख रहे हैं. उनका कहना है कि मतदान से पहले मतदाता की नागरिकता और पहचान की पुष्टि करने से चुनावी धोखाधड़ी की आशंकाओं को कम किया जा सकता है. हालांकि, इस प्रस्ताव को लेकर अमेरिका में राजनीतिक मतभेद भी मौजूद हैं. डेमोक्रेट्स और रिपब्लिकन पार्टी के भीतर भी इस मुद्दे पर पूरी तरह एकराय नहीं है. समर्थक इसे चुनावी सुरक्षा से जोड़ते हैं, जबकि विरोधी पक्ष इसे मतदान के अधिकार और मतदाताओं की पहुंच से जुड़े सवालों के संदर्भ में देखता है.
मेल वोटिंग को सीमित करने की मांग
ट्रंप ने अमेरिका में मेल या पोस्टल वोटिंग को सीमित करने की मांग भी दोहराई है. उन्होंने भारत में पोस्टल बैलेट के अपेक्षाकृत कम इस्तेमाल का उदाहरण देते हुए अमेरिकी व्यवस्था में भी बदलाव की जरूरत बताई. अमेरिका में मेल वोटिंग की व्यवस्था राज्य-दर-राज्य अलग-अलग नियमों के तहत संचालित होती है. ऐसे में पूरे देश के लिए एक समान व्यवस्था लागू करने का मुद्दा राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर बहस का विषय बना हुआ है.
अमेरिकी सीनेट में भी नहीं बनी सहमति
SAVE Act को लेकर अमेरिकी राजनीति में मतभेद साफ दिखाई देते हैं. ट्रंप इसके पारित होने की लगातार वकालत कर रहे हैं, लेकिन इसे लेकर सीनेट में अभी तक ठोस प्रगति नहीं हुई है. इस मुद्दे पर दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों के बीच मतभेद बने हुए हैं. ऐसे में ट्रंप का भारत की चुनाव व्यवस्था का उदाहरण देना अमेरिकी चुनाव सुधार की बहस को अंतरराष्ट्रीय संदर्भ से जोड़ता है. आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि SAVE America Act को लेकर अमेरिकी कांग्रेस में क्या रुख अपनाया जाता है और क्या प्रस्तावित बदलावों पर राजनीतिक सहमति बन पाती है.
भारत का उदाहरण क्यों बना चर्चा का विषय?
भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और यहां बड़े पैमाने पर चुनाव कराने के लिए व्यापक चुनावी व्यवस्था लागू है. मतदाता पहचान और चुनाव संचालन से जुड़े नियमों का हवाला देते हुए ट्रंप अमेरिकी व्यवस्था में भी कुछ समान प्रावधान लागू करने की मांग कर रहे हैं. हालांकि दोनों देशों की चुनाव प्रणालियां, कानून और मतदान प्रक्रियाएं अलग हैं.
ये भी पढ़ें- किम जोंग की धमकी के आगे झुके ट्रंप! साउथ कोरिया का छोड़ा साथ, पेंटागन को दिया ये आदेश