हवाई सफर को सबसे सुरक्षित परिवहन माध्यमों में गिना जाता है, लेकिन एयरपोर्ट पर हथियार जैसी संवेदनशील चीज की मौजूदगी सुरक्षा व्यवस्था के लिए बेहद गंभीर विषय होती है. वाराणसी के लाल बहादुर शास्त्री इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर चेकिंग के दौरान लाइसेंसी बंदूक से अचानक गोली चलने की घटना ने एक बार फिर विमान यात्रा में हथियार ले जाने से जुड़े नियमों और सुरक्षा प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं.
घटना में एयर इंडिया एक्सप्रेस की फ्लाइट से मुंबई जा रहे एक यात्री के लाइसेंसी हथियार की जांच के दौरान फायरिंग हो गई. गोली पहले फर्श से टकराई और उसके बाद एयरपोर्ट पर मौजूद दो कर्मचारियों को चोट लगी. इसके बाद सुरक्षा व्यवस्था को लेकर हड़कंप मच गया. ऐसे में यह समझना जरूरी है कि लाइसेंसी हथियार रखने वाला व्यक्ति घरेलू उड़ान में उसे किस प्रक्रिया के तहत ले जा सकता है और इस दौरान यात्री की जिम्मेदारी क्या होती है.
वाराणसी एयरपोर्ट पर चेकिंग के दौरान कैसे चली गोली?
घटना सुबह करीब 9:30 बजे वाराणसी एयरपोर्ट पर हुई. कमलेश राय अपनी पत्नी के साथ एयर इंडिया एक्सप्रेस की फ्लाइट IX-1810 से मुंबई जाने वाले थे. उनके पास लाइसेंसी हथियार था और बताया गया कि यात्रा से पहले एयरलाइन को इसकी जानकारी दी गई थी.
हथियार की सुरक्षा जांच और वेरिफिकेशन के दौरान अचानक एक राउंड फायर हो गया. गोली पहले फर्श से टकराई और फिर पास में मौजूद महिला स्टाफ सुमन की जांघ में जा लगी. गोली के छर्रों से एक अन्य कर्मचारी रोहित राज के हाथ में भी चोट आई.
घटना के तुरंत बाद दोनों घायलों को इलाज के लिए न्यू लक्ष्मी ट्रॉमा सेंटर ले जाया गया. स्वतंत्रता दिवस के मद्देनजर एयरपोर्ट पर पहले से ही सुरक्षा व्यवस्था कड़ी थी. ऐसे में चेकिंग के दौरान हुई इस फायरिंग ने सुरक्षा प्रोटोकॉल को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए.
घरेलू फ्लाइट में लाइसेंसी बंदूक ले जाने के क्या नियम हैं?
घरेलू उड़ान में लाइसेंसी हथियार ले जाने की अनुमति कुछ निर्धारित शर्तों के साथ होती है. रक्षा विशेषज्ञ ग्रुप कैप्टन यूके देवनाथ के मुताबिक, हथियार ले जाने वाले यात्री को यात्रा की योजना बनाते समय ही एयरलाइन को इसकी जानकारी देनी चाहिए. एयरपोर्ट पर भी यात्री को पर्याप्त समय पहले पहुंचना जरूरी है, ताकि हथियार की जांच और दस्तावेजों की प्रक्रिया जल्दबाजी में न हो.
लाइसेंसी होने का मतलब यह नहीं है कि हथियार को सामान्य सामान की तरह विमान में ले जाया जा सकता है. एयरपोर्ट और एयरलाइन की सुरक्षा प्रक्रिया के तहत हथियार की अलग से जांच की जाती है और उसे यात्री के केबिन बैगेज में ले जाने की अनुमति नहीं होती.
चेक-इन लगेज के रूप में ही देना होता है हथियार
घरेलू उड़ान में लाइसेंसी बंदूक को यात्री अपने साथ केबिन में नहीं ले जा सकता. इसे निर्धारित प्रक्रिया के तहत चेक-इन बैगेज के रूप में जमा करना होता है. इसके लिए एयरलाइन को पहले से सूचना देना और एयरपोर्ट पर संबंधित सुरक्षा अधिकारियों के सामने हथियार प्रस्तुत करना जरूरी होता है.
यात्रा के दौरान हथियार को इस तरह रखा जाता है कि वह विमान के केबिन तक यात्री की पहुंच में न रहे और कार्गो होल्ड में सुरक्षित तरीके से रखा जा सके.
बंदूक पूरी तरह अनलोड होना जरूरी
हथियार को विमान में जमा कराने से पहले यह सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है कि उसमें कोई गोली मौजूद न हो. बंदूक का चैंबर और मैगजीन पूरी तरह खाली होना चाहिए. हथियार को सुरक्षित तरीके से पैक करने के बाद ही उसे आगे की सुरक्षा प्रक्रिया में भेजा जाता है.
यही वजह है कि वाराणसी जैसी घटना में जांच के दौरान हथियार से फायरिंग होना सुरक्षा प्रक्रिया के लिहाज से गंभीर मामला माना जाता है. ऐसे मामलों में यह जांच की जाती है कि हथियार में गोली कैसे मौजूद थी और फायरिंग किस परिस्थिति में हुई.
मजबूत बॉक्स में होती है हथियार की पैकिंग
हथियार को सामान्य बैग में रखकर चेक-इन नहीं किया जा सकता. इसके लिए मजबूत पैकिंग की आवश्यकता होती है. नियमों के अनुसार धातु, लकड़ी या मजबूत कार्डबोर्ड जैसे सुरक्षित बॉक्स में हथियार को पैक किया जाता है, ताकि सफर के दौरान वह सुरक्षित रहे और किसी तरह की अनचाही स्थिति पैदा न हो.
कारतूसों को भी हथियार से अलग सुरक्षित तरीके से पैक करना होता है. उपलब्ध नियमों के अनुसार सामान्य घरेलू यात्रा में अधिकतम 50 कारतूस तक ले जाने की अनुमति की व्यवस्था है और हथियार तथा कारतूस के कुल वजन से जुड़ी निर्धारित सीमा का भी पालन करना होता है. शूटिंग खिलाड़ियों और विशेष श्रेणियों के यात्रियों के लिए अलग प्रावधान लागू हो सकते हैं.
एयरपोर्ट पर हथियार की जांच कैसे होती है?
हथियार लेकर यात्रा करने वाले यात्री को एयरपोर्ट पहुंचने के बाद एयरलाइन और सुरक्षा कर्मचारियों को इसकी जानकारी देनी होती है. इसके बाद हथियार को सामान्य चेक-इन प्रक्रिया से अलग निर्धारित सुरक्षा प्रक्रिया के तहत लिया जाता है.
सुरक्षा अधिकारी हथियार की स्थिति की जांच करते हैं और उसके लाइसेंस तथा हथियार पर दर्ज विवरण का मिलान करते हैं. इसके बाद हथियार और कारतूस को निर्धारित तरीके से पैक और सील किया जाता है. सुरक्षा जांच पूरी होने के बाद उसे विमान के कार्गो होल्ड में भेजा जाता है. इस पूरी प्रक्रिया का उद्देश्य यही होता है कि हथियार यात्री या किसी अन्य व्यक्ति के लिए उड़ान के दौरान खतरा न बने.
हथियार जमा करने की रसीद संभालकर रखना क्यों जरूरी है?
हथियार जमा कराने के बाद यात्री को संबंधित घोषणा या डिक्लेरेशन की रसीद और दस्तावेज अपने पास सुरक्षित रखने चाहिए. यह दस्तावेज इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि गंतव्य पर हथियार प्राप्त करते समय पहचान और जमा करने की प्रक्रिया का सत्यापन किया जा सकता है.
सामान्य बैगेज बेल्ट पर हथियार मिलने के बजाय इसे निर्धारित प्रक्रिया के तहत एयरलाइन या सुरक्षा अधिकारी यात्री को सौंपते हैं. पहचान और संबंधित दस्तावेजों का मिलान होने के बाद ही हथियार वापस दिया जाता है.
अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में नियम और भी सख्त
अगर कोई यात्री भारत से बाहर लाइसेंसी हथियार ले जाना चाहता है तो केवल भारतीय हथियार लाइसेंस पर्याप्त नहीं होता. अंतरराष्ट्रीय यात्रा में भारत के संबंधित नियमों के साथ-साथ उस देश के कानूनों का पालन करना भी आवश्यक होता है, जहां यात्री जा रहा है.
विदेश जाने से पहले संबंधित सरकारी अनुमति, कस्टम दस्तावेज और गंतव्य देश के हथियार संबंधी परमिट की जरूरत पड़ सकती है. किसी देश में भारतीय हथियार लाइसेंस को वैध मान्यता नहीं मिलती, इसलिए बिना आवश्यक अनुमति के हथियार लेकर अंतरराष्ट्रीय यात्रा करना गंभीर कानूनी परेशानी पैदा कर सकता है.
यात्री और एयरलाइन की जिम्मेदारी क्या है?
हथियार लेकर यात्रा करने में जिम्मेदारी केवल यात्री की नहीं होती. यात्री को अपने लाइसेंस, पहचान और यात्रा से जुड़े सभी जरूरी दस्तावेज सही रखने के साथ यह सुनिश्चित करना होता है कि हथियार पूरी तरह अनलोड हो और निर्धारित तरीके से पैक किया गया हो.
वहीं एयरलाइन और सुरक्षा एजेंसियों की जिम्मेदारी है कि हथियार की जांच निर्धारित सुरक्षा प्रोटोकॉल के अनुसार की जाए. जांच के दौरान हथियार को सुरक्षित स्थान पर ले जाकर उसकी स्थिति की पुष्टि करना और उसके बाद उसे सील करके कार्गो होल्ड में भेजना सुरक्षा प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा है.
क्या हर एयरलाइन के नियम अलग होते हैं?
लाइसेंसी हथियार और कारतूस की हवाई यात्रा से जुड़े बुनियादी सुरक्षा नियम सरकारी विमानन और सुरक्षा मानकों के तहत निर्धारित होते हैं. इसलिए किसी भी एयरलाइन को इन मूल सुरक्षा नियमों से अलग जाकर हथियार स्वीकार करने की अनुमति नहीं होती.
हालांकि अलग-अलग एयरलाइंस अपनी प्रक्रिया के तहत सूचना देने का तरीका, हैंडलिंग फीस या कुछ अतिरिक्त दस्तावेज मांग सकती हैं. इसलिए यात्रा से पहले संबंधित एयरलाइन की मौजूदा शर्तों की पुष्टि करना जरूरी है.
नियमों की अनदेखी पर हो सकती है कड़ी कार्रवाई
हथियार से जुड़े नियमों का उल्लंघन केवल एयरपोर्ट सुरक्षा का मामला नहीं है, बल्कि यह आपराधिक और प्रशासनिक कार्रवाई का कारण भी बन सकता है. बिना निर्धारित सूचना हथियार लेकर पहुंचने, हथियार को अनलोड न रखने या सुरक्षा प्रक्रिया का उल्लंघन करने पर संबंधित कानूनों के तहत कार्रवाई की जा सकती है.
अगर लापरवाही के कारण गोली चलती है और किसी व्यक्ति को चोट पहुंचती है, तो मामले की परिस्थितियों के आधार पर भारतीय न्याय संहिता और हथियार संबंधी कानूनों के तहत आपराधिक कार्रवाई हो सकती है. हथियार जब्त होने और लाइसेंस पर कार्रवाई की संभावना भी परिस्थितियों और जांच के निष्कर्ष पर निर्भर करती है.
वहीं विमानन सुरक्षा नियमों के उल्लंघन पर यात्री के खिलाफ अलग से कार्रवाई हो सकती है. यदि जांच में एयरलाइन या उसके कर्मचारियों की ओर से निर्धारित सुरक्षा प्रक्रिया में गंभीर लापरवाही सामने आती है, तो संबंधित कर्मचारियों और एयरलाइन पर भी नियामकीय कार्रवाई संभव है.
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