नई दिल्ली: स्वतंत्रता दिवस से पहले सुरक्षा एजेंसियों ने पाकिस्तान में बैठे गैंगस्टर से आतंकी बने शहजाद भट्टी के नेटवर्क के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की. 12 अगस्त को 14 राज्यों में एक साथ छापेमारी और जांच की गई, जिसमें 253 लोगों को हिरासत में लिया गया. अब तक इस नेटवर्क से जुड़े मामलों में 80 से ज्यादा एफआईआर दर्ज हो चुकी हैं और 200 से ज्यादा लोगों की गिरफ्तारी हुई है.
सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक, इस कार्रवाई का मकसद 15 अगस्त के आसपास किसी संभावित आतंकी गतिविधि को रोकना था. 12 अगस्त की कार्रवाई में उत्तर प्रदेश से सबसे ज्यादा 62 लोग पकड़े गए. इसके बाद हरियाणा से 52, दिल्ली से 51 और पंजाब से 44 लोगों को हिरासत में लिया गया. इन चार राज्यों से ही 209 लोग पकड़े गए, जो कुल संख्या का करीब 83 फीसदी है.
नेटवर्क में शामिल युवाओं की उम्र कितनी?
12 अगस्त को हिरासत में लिए गए 253 लोगों की पूरी उम्र की जानकारी अभी सामने नहीं आई है. हालांकि, अलग-अलग मामलों में गिरफ्तार आरोपियों की उम्र से पता चलता है कि इस नेटवर्क में युवाओं की भी बड़ी भूमिका रही है.
राजस्थान के एक मामले में 20 साल के कृष राय पर पुलिस ने आरोप लगाया कि उसने हनुमानगढ़ और रायसिंहनगर पुलिस स्टेशनों के वीडियो और उनकी लोकेशन भट्टी तक पहुंचाई. वहीं 29 साल के जसवंत कुमार उर्फ सोनू पर भट्टी के सोशल मीडिया खातों से संपर्क रखने और उसके पोस्ट साझा करने का आरोप लगा.
29 साल के सुनील कुमार उर्फ ढोलू के मोबाइल से भी भट्टी के साथ व्हाट्सऐप संपर्क के संकेत मिलने की बात सामने आई. उत्तराखंड एसटीएफ ने 29 साल के विक्रांत कश्यप को संवेदनशील जगहों की जानकारी पाकिस्तान में बैठे लोगों तक पहुंचाने के आरोप में गिरफ्तार किया था.
दिल्ली के एक मामले में पकड़े गए सात आरोपियों की उम्र 26 से 38 साल के बीच बताई गई थी. वहीं दिल्ली पुलिस ने 18 साल के हरमनदीप सिंह को भी भट्टी से जुड़े एक मामले में गिरफ्तार किया था. यानी सामने आए मामलों में 18 से 38 साल तक के युवाओं के इस नेटवर्क से जुड़े होने की जानकारी मिली है.
सोशल मीडिया के जरिए युवाओं को जोड़ने का आरोप
जांच में सामने आया है कि भट्टी सोशल मीडिया पर काफी सक्रिय था. आरोप है कि वह इंस्टाग्राम और फेसबुक के जरिए युवाओं पर नजर रखता था. शुरुआत में युवाओं को छोटे काम दिए जाते थे और इसके बदले 5 से 10 हजार रुपये तक देने की बात सामने आई है.
धीरे-धीरे कुछ युवाओं को ज्यादा गंभीर काम सौंपे जाने का आरोप है. इनमें पुलिस स्टेशन, रेलवे स्टेशन, एयरबेस और दूसरी अहम जगहों की जानकारी जुटाना शामिल था. इसके अलावा सीसीटीवी कैमरों की जानकारी और वीडियो पाकिस्तान भेजने के भी आरोप हैं.
जांच एजेंसियों के मुताबिक, कुछ मामलों में युवाओं को हथियार और विस्फोटक से जुड़े कामों में भी इस्तेमाल करने की कोशिश की गई.
जांच एजेंसियों ने कैसे तोड़ा नेटवर्क?
इस पूरे नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई किसी एक एजेंसी ने नहीं की. एनआईए, दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल और अलग-अलग राज्यों की पुलिस, एटीएस और एसटीएफ ने कई महीनों तक जांच की. अलग-अलग राज्यों से मिले इनपुट को जोड़कर नेटवर्क के सदस्यों तक पहुंचने की कोशिश की गई.
एनआईए ने कई जगह की छापेमारी
एनआईए भट्टी से जुड़े कम से कम तीन बड़े मामलों की जांच कर रही है. जून में एजेंसी ने पंजाब और हरियाणा के 9 जिलों में 18 ठिकानों पर छापे मारे थे. इस दौरान डिजिटल उपकरण, दस्तावेज और पैसों के लेन-देन से जुड़ी जानकारी जब्त की गई.
जांच में जालंधर में सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर रोजर संधू के घर पर ग्रेनेड हमला, सिरसा महिला पुलिस स्टेशन में विस्फोट और अंबाला के बलदेव नगर पुलिस स्टेशन में कार-बम विस्फोट जैसे मामले भी शामिल हैं.
एनआईए ने अप्रैल 2026 में जालंधर मामले में भट्टी को फरार आरोपी के तौर पर चार्जशीट किया था. सिरसा मामले में भी भट्टी और पाकिस्तान में बैठे कथित हैंडलर सोहेल अहमद उर्फ सोहेल बलोच समेत नौ आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई.
दिल्ली में हथियार और ड्रग नेटवर्क पर कार्रवाई
दिल्ली-एनसीआर में भट्टी से जुड़े हथियार और नशीले पदार्थों के नेटवर्क को पकड़ने में दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने भी कार्रवाई की. जून में सात लोगों की गिरफ्तारी के दौरान पांच सेमी-ऑटोमैटिक पिस्तौल, 41 कारतूस, सात मोबाइल फोन और एक एसयूवी बरामद होने की जानकारी दी गई.
जांच के दौरान मोबाइल फोन से भट्टी और उसके साथियों के साथ कथित चैट और वॉइस नोट मिलने की बात भी सामने आई. एक दूसरे मामले में दिल्ली के संवेदनशील इलाकों की रेकी से जुड़े वीडियो मिलने की जानकारी दी गई.
राज्य पुलिस और एटीएस ने भी पकड़े मॉड्यूल
उत्तर प्रदेश एटीएस, राजस्थान पुलिस, उत्तराखंड एसटीएफ समेत कई राज्यों की एजेंसियों ने भट्टी से जुड़े अलग-अलग लोगों को पकड़ा. उत्तराखंड में विक्रांत कश्यप की गिरफ्तारी भी इसी जांच का हिस्सा थी.
12 अगस्त की कार्रवाई में सबसे अहम बात अलग-अलग राज्यों की एजेंसियों के बीच तेजी से जानकारी साझा करना रही. जांच में मिले इनपुट को आपस में जोड़कर कई राज्यों में एक साथ कार्रवाई की गई.
ऑनलाइन भर्ती से लेकर रेकी तक का नेटवर्क
इस पूरे मामले में सबसे अहम बात यह सामने आई है कि नेटवर्क सिर्फ हथियारों या विस्फोटकों तक सीमित नहीं था. आरोप है कि सोशल मीडिया के जरिए युवाओं को अपने साथ जोड़ा जाता था और शुरुआत में छोटे काम देकर उनका भरोसा जीता जाता था.
इसके बाद कुछ लोगों से रेकी, सीसीटीवी की जानकारी जुटाने, हथियारों की आवाजाही और हमलों से जुड़े काम कराए जाने का आरोप है. कुछ मामलों में सीमा पार से ड्रोन के जरिए हथियार और नशीले पदार्थ पहुंचाने और उन्हें दिल्ली-एनसीआर तक भेजने की भी जांच की जा रही है.
12 अगस्त की कार्रवाई के बाद सुरक्षा एजेंसियां अब इस नेटवर्क से जुड़े बाकी लोगों और उनके संपर्कों की जानकारी जुटाने में लगी हैं.
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