इस्लामाबाद/वॉशिंगटन डीसी: पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच जारी सीमा संघर्ष के बीच अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मध्यस्थता की पहल को लेकर एक बार फिर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप चर्चा में हैं. हाल ही में दोनों देशों के बीच 48 घंटे का युद्धविराम घोषित किया गया था, लेकिन यह बहुत कम समय में टूट गया और सीमा पर हिंसक झड़पें फिर शुरू हो गईं. इस बीच, ट्रंप ने बयान जारी कर कहा कि यदि उन्हें अवसर मिले, तो इस संघर्ष को बहुत ही आसानी से सुलझा सकते हैं.
ट्रंप ने मीडिया से बातचीत करते हुए इस क्षेत्र में शांति स्थापना में अपनी संभावित भूमिका का संकेत दिया और कहा कि यह उनके लिए कोई नया या कठिन कार्य नहीं है, क्योंकि उन्हें दोनों पक्षों की रणनीतिक स्थितियों की अच्छी समझ है.
ट्रंप का दावा - मुझे युद्ध सुलझाना आता है
अमेरिकी राष्ट्रपति ने शुक्रवार को वॉशिंगटन में पत्रकारों से बात करते हुए कहा, "मैं जानता हूं कि पाकिस्तान ने हाल ही में अफगानिस्तान पर सैन्य कार्रवाई की है. मैं यह भी जानता हूं कि इसे कैसे रोका जा सकता है. अगर मुझे जिम्मेदारी सौंपी जाए, तो मैं इस संकट को बहुत ही जल्द समाप्त कर सकता हूं."
Video: US President Donald Trump said that he understands that Pakistan attacked Afghanistan and that solving the war will be easy for him.
— TOLOnews English (@TOLONewsEnglish) October 17, 2025
Donald Trump added that he has so far saved tens of millions of lives by solving 8 wars.
He has criticized other US Presidents saying that… pic.twitter.com/hXNryttUra
उन्होंने यह भी कहा कि वे पहले भी कई अंतरराष्ट्रीय विवादों में मध्यस्थता कर चुके हैं और यह एक ऐसा क्षेत्र है जिसमें वे अपना अनुभव और प्रभाव सफलतापूर्वक इस्तेमाल कर सकते हैं.
अब तक 8 संघर्षों को शांत किया: ट्रंप
ट्रंप ने दावा किया कि वे अब तक आठ अंतरराष्ट्रीय संघर्षों में शांति प्रक्रिया का हिस्सा रह चुके हैं. इनमें उन्होंने उल्लेख किया कि वे भारत-पाकिस्तान, उत्तर कोरिया-अमेरिका, इजराइल और कुछ अरब देशों, और रूस-यूक्रेन के बीच जारी विवादों में भी रणनीतिक भूमिकाएं निभा चुके हैं.
हालांकि इनमें से कुछ मामलों में उनकी पहल विवादास्पद भी रही है, लेकिन वे अक्सर अपनी कूटनीतिक सक्रियता को एक शांति-प्रेमी वैश्विक नेता की छवि से जोड़ते हैं.
शांति के लिए नोबल की चाह
ट्रंप की अंतरराष्ट्रीय नीतियों में शांति स्थापना एक महत्वपूर्ण बिंदु रही है, और उन्होंने पूर्व में भी यह कहा है कि वे नोबल शांति पुरस्कार के हकदार हैं.
उनकी सरकार ने अब्राहम समझौते (Abraham Accords) के तहत इजराइल और कुछ अरब देशों के बीच राजनयिक संबंध स्थापित कराए, जिसके बाद उन्हें इजराइल और पाकिस्तान की ओर से नोबल पुरस्कार के लिए नामांकित भी किया गया था. हालांकि, वर्ष 2024 में यह पुरस्कार वेनेजुएला की विपक्षी नेता मारिया कोरिना मचाडो को प्रदान किया गया.
फिर भी ट्रंप ने साफ किया कि वे अपनी कोशिशें जारी रखेंगे, और अगर वे इस क्षेत्र में शांति स्थापित करने में सफल होते हैं, तो उन्हें पूरा भरोसा है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय उनके प्रयासों को सम्मान देगा.
पाक-अफगान तनाव की पृष्ठभूमि
पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच चल रहा तनाव नया नहीं है. डूरंड रेखा को लेकर लंबे समय से दोनों देशों के बीच सीमा विवाद है. हाल ही में पाकिस्तान ने सीमा पार एयरस्ट्राइक की, जिसमें कई नागरिकों के साथ क्लब स्तर के क्रिकेट खिलाड़ी भी मारे गए. इसके जवाब में अफगानिस्तान की ओर से भी कड़ी प्रतिक्रिया दी गई है.
इस बीच, तालिबान सरकार और पाकिस्तान सेना के बीच आपसी भरोसे की कमी भी स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही है. पाकिस्तान का आरोप है कि आतंकी संगठन तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) को अफगान सीमा से शरण और समर्थन मिल रहा है, जबकि अफगान प्रशासन इससे इनकार करता रहा है.
सीजफायर टूटा, तनाव फिर से उभरा
14 अक्टूबर को दोनों देशों ने 48 घंटे के सीजफायर की घोषणा की थी, लेकिन यह समझौता मात्र एक दिवसीय विराम जैसा साबित हुआ. कुछ ही समय बाद फिर से सीमा पर गोलाबारी और ड्रोन हमलों की खबरें आने लगीं.
संघर्ष में अब तक दोनों ओर से नागरिकों की मौत, सीमावर्ती गांवों में विस्थापन, और मानवाधिकार उल्लंघन की चिंताजनक खबरें सामने आई हैं. अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं भी इस क्षेत्र में स्थायी समाधान की आवश्यकता की ओर इशारा कर चुकी हैं.
ट्रंप की पहल की संभावनाएं
इस पूरे घटनाक्रम के बीच ट्रंप की पहल कितनी असरदार होगी, यह अभी स्पष्ट नहीं है. लेकिन उन्होंने संकेत दिया है कि यदि पाकिस्तान और अफगानिस्तान दोनों देश संवाद के लिए तैयार होते हैं, तो वे अमेरिका की ओर से मध्यस्थता की भूमिका निभा सकते हैं.
उन्होंने यह भी कहा कि वे शांति के लिए सीधा संवाद पसंद करते हैं और किसी तीसरे पक्ष के बिना ही बातचीत को आगे बढ़ाने में विश्वास रखते हैं.
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