बेवकूफ हो क्या? रिपोर्टर की किस बात पर भड़क गए ट्रंप...लगा दी क्लास

वॉशिंगटन डीसी के ठीक बीचोंबीच, व्हाइट हाउस के सामने हुई गोलीबारी के बाद अमेरिकी राजनीति का तापमान अचानक बढ़ गया है. घटना पर मीडिया को संबोधित कर रहे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप उस वक्त भड़क उठे जब उनसे पूछा गया कि वे इसका दोष बार-बार बाइडन प्रशासन पर क्यों मढ़ रहे हैं.

Trump got angry on reporter asking question on afghanistan
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वॉशिंगटन डीसी के ठीक बीचोंबीच, व्हाइट हाउस के सामने हुई गोलीबारी के बाद अमेरिकी राजनीति का तापमान अचानक बढ़ गया है. घटना पर मीडिया को संबोधित कर रहे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप उस वक्त भड़क उठे जब उनसे पूछा गया कि वे इसका दोष बार-बार बाइडन प्रशासन पर क्यों मढ़ रहे हैं. सवाल पूरा होते ही ट्रंप की आवाज ऊंची हो गई और उन्होंने गुस्से में पत्रकार से कहा “क्या तुम बेवकूफ़ हो?”


ट्रंप पिछले 24 घंटों से लगातार दावा कर रहे हैं कि गोलीबारी के आरोपी रहमानुल्लाह को अमेरिका लाने की जिम्मेदारी जो बाइडन प्रशासन की है. आरोपी कथित रूप से ऑपरेशन अलाइज वेलकम के दौरान अमेरिका पहुंचा था—वह कार्यक्रम, जिसके जरिए अफगानिस्तान में अमेरिकी सेना की मदद करने वाले नागरिकों को सुरक्षित निकाला गया था. पत्रकार द्वारा सवाल उठाए जाने पर ट्रंप ने सख्त लहजे में कहा दोष इसलिए दे रहा हूं क्योंकि बाइडन हजारों ऐसे लोगों को देश में लेकर आए जिन्हें यहां होना ही नहीं चाहिए था. तुम ऐसा सवाल पूछ रहे हो क्योंकि तुम एक बेवकूफ़ इंसान हो. उन्होंने आगे कहा कि बाइडन प्रशासन ने ऐसे कानून बनाए जिनकी वजह से सरकार इन लोगों को वापस नहीं भेज सकती. ट्रंप ने अफगानिस्तान से अमेरिकी सेना की वापसी के फैसले को “सबसे बड़ी गड़बड़ी” बताते हुए कहा कि यह पूरा कार्यक्रम शुरुआत से ही गलत था.

नेशनल गार्ड सैनिक की मौत

घटना के बाद सुरक्षा एजेंसियां लगातार आरोपी से जुड़े पहलुओं की जांच कर रही हैं. इसी बीच ट्रंप ने जानकारी दी कि गोलीबारी में घायल नेशनल गार्ड की एक सदस्य सारा बेकस्ट्राम की मौत हो गई है. यह सूचना सामने आते ही परिस्थिति और भी संवेदनशील हो गई.

बाइडन समर्थक मैदान में

ट्रंप के तीखे आरोपों का जवाब बाइडन समर्थकों ने भी देना शुरू कर दिया है. उनका कहना है कि ऑपरेशन अलाइज वेलकम किसी राजनीतिक लाभ के लिए नहीं बल्कि मानवीय आधार पर शुरू किया गया था.अफगानिस्तान में तालिबान की वापसी के बाद उन नागरिकों और दुभाषियों की जान जोखिम में थी जिन्होंने सालों तक अमेरिकी सेना की सहायता की थी. समर्थक जोर देकर कह रहे हैं कि सभी को विस्तृत सुरक्षा जांच के बाद ही अमेरिका लाया गया था.

76,000 अफगान नागरिकों को मिला था सुरक्षित ठिकाना

बाइडन प्रशासन ने इस कार्यक्रम के अंतर्गत करीब 76 हजार अफगान नागरिकों को अमेरिका में अस्थायी संरक्षण दिया था. इनमें बड़ी संख्या उन लोगों की थी जिन्होंने युद्ध के दौरान अमेरिकी सैनिकों के साथ दुभाषिए, मार्गदर्शक और सहयोगी की भूमिका निभाई थी. व्हाइट हाउस के सामने हुई यह घटना अब सिर्फ सुरक्षा का मुद्दा नहीं रही—यह अमेरिका की आंतरिक राजनीति, प्रवासन नीति और अफगानिस्तान से जुड़े पुराने फैसलों को लेकर एक नई बहस को जन्म दे चुकी है.

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