चीन पर बुरी तरह भड़के ट्रंप, जिनपिंग के किस फैसले को बताया दुर्भावनापूर्ण और खतरनाक?

US China Trade War: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीन के हालिया फैसले पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है, जिसमें बीजिंग ने रेयर अर्थ एलिमेंट्स (REEs) के निर्यात पर सख्त नियंत्रण लगाने की घोषणा की है.

Trump got angry at China which decision of Jinping was called malicious and dangerous
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US China Trade War: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीन के हालिया फैसले पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है, जिसमें बीजिंग ने रेयर अर्थ एलिमेंट्स (REEs) के निर्यात पर सख्त नियंत्रण लगाने की घोषणा की है. ट्रंप ने इसे न केवल "दुर्भावनापूर्ण" (hostile) बल्कि "खतरनाक और चालबाज़ी से भरा" कदम करार दिया है, जो वैश्विक तकनीकी और औद्योगिक आपूर्ति शृंखला के लिए गंभीर चुनौती पैदा कर सकता है.

ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर अपनी नाराज़गी ज़ाहिर करते हुए कहा, "चीन में कुछ बहुत अजीब और चिंताजनक चीजें हो रही हैं. वो पहले से कहीं ज्यादा आक्रामक रवैया अपना रहा है. अब उसने कुछ देशों को पत्र भेजे हैं, जिनमें कहा गया है कि रेयर अर्थ मटीरियल्स के निर्यात पर विशेष मंज़ूरी के बिना भेजना संभव नहीं होगा."

क्या हैं रेयर अर्थ एलिमेंट्स?

रेयर अर्थ एलिमेंट्स वे 17 खास धातुएं हैं, जो अत्याधुनिक तकनीक, रक्षा उपकरणों, इलेक्ट्रिक वाहनों, मोबाइल फोनों, और सोलर पैनलों जैसी ग्रीन एनर्जी तकनीकों के निर्माण में अनिवार्य हैं. चीन इस क्षेत्र में दुनिया का सबसे बड़ा उत्पादक और निर्यातक देश है, और इसका वैश्विक बाजार पर लगभग 60-70% नियंत्रण है.

चीन का नया फैसला

हाल ही में चीन के वाणिज्य मंत्रालय (Ministry of Commerce) ने नई गाइडलाइंस जारी की हैं, जिनके अनुसार अब कोई भी कंपनी REEs या उससे बने उत्पादों को निर्यात करने से पहले सरकार से "स्पेशल अप्रूवल" लेगी. बीजिंग का कहना है कि यह कदम देश की राष्ट्रीय सुरक्षा की रक्षा के लिए उठाया गया है.

लेकिन अमेरिका समेत कई पश्चिमी देशों का मानना है कि यह फैसला असल में वैश्विक तकनीकी आपूर्ति श्रृंखला पर चीन के नियंत्रण को और मजबूत करने की रणनीति का हिस्सा है.

ट्रंप की तीखी प्रतिक्रिया

डोनाल्ड ट्रंप ने इस फैसले की आलोचना करते हुए कहा, "इस तरह का कदम वैश्विक बाजार को अव्यवस्थित करेगा और कई देशों की टेक्नोलॉजी इंडस्ट्री को नुकसान पहुंचेगा. अंततः इससे सबसे ज्यादा नुकसान चीन को ही होगा, क्योंकि दुनिया विकल्प तलाशना शुरू कर देगी."

उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका इस "आर्थिक आक्रामकता" का करारा जवाब देगा. ट्रंप के मुताबिक, अमेरिका चीनी सामान पर भारी टैरिफ लगाने की योजना पर काम कर रहा है और अन्य आर्थिक प्रतिबंधों की भी तैयारी हो रही है.

शी जिनपिंग से मुलाकात टली?

ट्रंप ने संकेत दिया कि अब वे चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात की आवश्यकता नहीं देखते. यह मुलाकात एशिया-पैसिफिक इकनॉमिक कोऑपरेशन (APEC) सम्मेलन के दौरान होनी थी, लेकिन ट्रंप के बयान से साफ है कि यह बैठक अब रद्द मानी जा रही है. उन्होंने कहा, "जो पत्र चीन ने भेजे हैं, वो बेहद अनुचित हैं. शायद यह समय है जब अमेरिका को स्पष्ट रुख अपनाना चाहिए. यह दीर्घकालिक रूप से अमेरिका के हित में होगा."

"रिश्ते सुधर रहे थे, पर अब बदले हालात"

ट्रंप ने यह भी कहा कि पिछले छह महीनों में अमेरिका और चीन के संबंधों में सुधार देखा गया था, लेकिन अब बीजिंग के इस कदम ने एक बार फिर टकराव की स्थिति पैदा कर दी है. "मुझे हमेशा संदेह था कि चीन किसी मौके की तलाश में है, और अब मेरी आशंका सही साबित हुई है," उन्होंने कहा.

अमेरिकी प्रतिक्रिया और वैश्विक असर

व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने Reuters से बातचीत में बताया कि चीन के नए निर्यात नियमों को बिना किसी पूर्व सूचना के लागू किया गया है, जिससे टेक्नोलॉजी और डिफेंस इंडस्ट्री पर गहरा प्रभाव पड़ सकता है. अमेरिका के मुताबिक यह कदम आपूर्ति श्रृंखला में अनिश्चितता और बाधाएं पैदा करेगा.

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि चीन REEs की सप्लाई में कटौती करता है, तो इससे इलेक्ट्रिक व्हीकल्स, विंड टर्बाइंस, और आधुनिक सैन्य उपकरणों के निर्माण में समस्याएं खड़ी हो सकती हैं. अमेरिका, यूरोपीय यूनियन और जापान पहले से ही इस क्षेत्र में विकल्प और वैकल्पिक स्रोत तलाशने पर काम कर रहे हैं, लेकिन फिलहाल चीन की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण बनी हुई है.

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