Trump Peace Plan: मध्यपूर्व एक बार फिर उबल रहा है, लेकिन इस बार उम्मीद की एक छोटी सी किरण अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पीस प्लान के रूप में दिख रही है. दो साल से जलते गाज़ा में स्थायी शांति लाने के लिए ट्रंप ने एक महत्वाकांक्षी 20-प्वाइंट योजना तैयार की है. मगर सबसे बड़ी चुनौती यही है, क्या यह प्लान सिर्फ़ एक कागज़ी सपना बनकर रह जाएगा या तुर्की की मदद से इसे ज़मीन पर उतारा जा सकेगा?
राष्ट्रपति ट्रंप, जो इस योजना को हर हाल में अमल में लाना चाहते हैं, अब तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैय्यप एर्दोगन से मदद मांग चुके हैं. एर्दोगन का दावा है कि ट्रंप ने हमास को बिना शर्त इस शांति प्रस्ताव को मानने के लिए मनाने का आग्रह किया है.
तुर्की बना कूटनीति का नया केंद्र
एर्दोगन ने मीडिया को बताया कि वे इस समय हमास सहित सभी पक्षों के संपर्क में हैं और अमेरिका के साथ बातचीत के बाद उन्होंने सक्रिय भूमिका निभानी शुरू की है. उन्होंने कहा, “हम कोशिश कर रहे हैं कि हमास को यह समझा सकें कि कौन सा रास्ता फिलिस्तीनियों के लिए बेहतर है.”
ग़ौरतलब है कि मिस्र के शर्म अल-शेख में चल रही इजरायल-हमास वार्ता में तुर्की की खुफिया एजेंसी के प्रमुख इब्राहिम कालिन भी मौजूद हैं. इससे तुर्की की भूमिका और स्पष्ट हो जाती है कि वह सिर्फ़ दर्शक नहीं, बल्कि सक्रिय मध्यस्थ बन चुका है.
हमास की ‘सशर्त हां’ और डील का टकराव
हालांकि ट्रंप के प्लान को लेकर हमास ने कोई सीधी असहमति नहीं जताई है, परन्तु उन्होंने कुछ कड़े शर्तों के साथ ही डील को स्वीकारने की बात कही है. मिस्र की मध्यस्थता में चल रही बातचीत के दौरान हमास ने बंधक-स्वैप लिस्ट सौंपी है, जिसमें इजरायली बंदियों के बदले फिलिस्तीनी कैदियों को रिहा करने की मांग शामिल है. लेकिन यहां सवाल यह है कि क्या इजरायल इन शर्तों को स्वीकार करेगा? और क्या अमेरिका तटस्थ रहकर सभी पक्षों को एक ही मंच पर ला सकेगा?
संख्या नहीं, एक समूची पीढ़ी का सवाल
गाज़ा पट्टी पिछले दो वर्षों से इजरायली बमबारी का केंद्र बनी हुई है. अबतक 67,000 से अधिक फिलिस्तीनी नागरिकों की मौत हो चुकी है. संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के अनुसार, गाज़ा 69 साल पीछे चला गया है. गाजा से सिर्फ मलबा हटाने में ही 21 साल लगने का अनुमान है.
यह आंकड़े सिर्फ़ आँकड़े नहीं, बल्कि एक पूरी पीढ़ी के छिनते भविष्य की कहानी बयां करते हैं. ऐसे में शांति की हर कोशिश, चाहे वह अमेरिका की हो, तुर्की की या मिस्र की, अब निर्णायक मोड़ पर है.
क्या ट्रंप की योजना कूटनीति को नया मोड़ दे पाएगी?
ट्रंप का यह शांति प्रस्ताव न केवल मध्यपूर्व की राजनीति में बल्कि वैश्विक कूटनीति में भी अमेरिका की सक्रियता को फिर से केंद्र में ला सकता है. लेकिन इसमें कामयाबी तभी संभव है, जब यह योजना सिर्फ़ राजनीतिक एजेंडा न बनकर, मानवीय दृष्टिकोण से लागू की जाए.
तुर्की की भूमिका भी अब एक “डील ब्रेकर या डील मेकर” के रूप में उभर रही है. अगर एर्दोगन हमास को मना पाने में सफल होते हैं, तो यह एक नई शुरुआत हो सकती है, न सिर्फ़ गाज़ा के लिए, बल्कि पूरे पश्चिम एशिया के लिए.
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