China-India relations: बीते कुछ वर्षों में भारत और चीन के बीच का रिश्ता कई बार तनावपूर्ण मोड़ पर पहुंचा है, खासकर गलवान जैसी घटनाओं के बाद. लेकिन अब संकेत मिल रहे हैं कि दोनों देश फिर से संवाद और सहयोग की पटरी पर लौटने का प्रयास कर रहे हैं. हाल ही में चीनी विदेश मंत्री वांग यी की नई दिल्ली यात्रा इसी दिशा में एक अहम कदम साबित हुई है.
अपनी यात्रा के दौरान वांग यी ने भारत के विदेश मंत्री सुब्रह्मण्यम जयशंकर से मुलाकात की और यह स्पष्ट किया कि दोनों देशों को आपसी मतभेदों से ऊपर उठकर रणनीतिक साझेदारी की ओर देखना चाहिए. वांग का यह बयान कि “भारत और चीन को एक-दूसरे को साझेदार मानना चाहिए,” इस बात का संकेत है कि बीजिंग भी अब रिश्तों को स्थिर करने के लिए तैयार है.
सीमा पर भरोसे की बहाली
भारत-चीन वार्ताओं में सीमा विवाद हमेशा सबसे बड़ा और संवेदनशील मुद्दा रहा है. वांग यी और जयशंकर की बैठक में भी सीमा पर शांति और स्थिरता की अहमियत पर ज़ोर दिया गया. जयशंकर ने दो टूक कहा कि द्विपक्षीय संबंधों में कोई भी सकारात्मक गति तभी मुमकिन है जब सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति बनी रहे. वहीं, वांग यी ने यह माना कि संवाद के कई स्तर फिर से सक्रिय हो रहे हैं, यह दोनों देशों की इच्छाशक्ति को दर्शाता है कि वे अतीत की कटुता से आगे बढ़ना चाहते हैं. सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और वांग यी के बीच प्रस्तावित सीमा वार्ता भी इस दिशा में उम्मीद जगाती है कि लम्बे समय से अटकी बातचीत में अब ठोस प्रगति हो सकती है.
अब बात व्यापार और विश्वास की
भारत और चीन के आर्थिक संबंध गहरे हैं, लेकिन संतुलन की कमी हमेशा एक बड़ा मुद्दा रहा है. जयशंकर ने इस बातचीत में न केवल व्यापार घाटे का मुद्दा उठाया बल्कि नदी डेटा शेयरिंग, सीमा व्यापार, और सांस्कृतिक संपर्क जैसे पहलुओं पर भी चर्चा की. ये वे कदम हैं जो व्यापार के साथ-साथ आपसी भरोसे को भी मज़बूत बना सकते हैं. वांग यी का यह कहना भी दिलचस्प है कि भारत और चीन मिलकर Global South, यानी विकासशील देशों के लिए नेतृत्वकारी भूमिका निभा सकते हैं. यह संकेत है कि दोनों देश वैश्विक मंच पर साझेदारी का एक नया अध्याय शुरू करने की सोच रहे हैं.
SCO शिखर सम्मेलन से पहले की तैयारी या संकेत?
वांग यी की यह भारत यात्रा ऐसे समय में हुई है जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जल्द ही शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के शिखर सम्मेलन में शामिल होने बीजिंग जाने वाले हैं, यह पिछले सात वर्षों में उनकी पहली चीन यात्रा होगी. इस संदर्भ में वांग यी की यात्रा को सिर्फ द्विपक्षीय बातचीत नहीं माना जा सकता, बल्कि यह एशियाई क्षेत्रीय स्थिरता और सामूहिक सुरक्षा के बड़े फ्रेमवर्क का हिस्सा है.
SCO जैसे मंचों पर भारत और चीन को न केवल अपने मतभेद सुलझाने का मौका मिलता है, बल्कि दुनिया को यह दिखाने का भी अवसर मिलता है कि दोनों शक्तिशाली पड़ोसी देश आपसी सहयोग से वैश्विक संतुलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं.
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