वाशिंगटन/अलास्का: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का यूक्रेन युद्ध पर रुख अचानक पूरी तरह से बदल गया है. हाल ही में अलास्का में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ हुई एक विशेष बैठक के बाद ट्रंप ने अब संघर्षविराम (सीजफायर) की बजाय एक व्यापक शांति समझौते की वकालत की है.
पहले दी थी सख्त चेतावनी, अब दिखा नरम रुख
अलास्का शिखर वार्ता से पहले ट्रंप ने कई मौकों पर चेतावनी दी थी कि अगर रूस युद्ध रोकने को तैयार नहीं हुआ तो उसे "गंभीर परिणामों" का सामना करना पड़ेगा. ट्रंप ने उस समय अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लगातार यह कहा था कि रूस को तत्काल युद्धविराम के लिए तैयार होना चाहिए, वरना अमेरिका कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगाएगा.
लेकिन पुतिन से छह घंटे लंबी मुलाकात के बाद ट्रंप की भाषा और रुख दोनों ही पूरी तरह बदल चुके हैं. अब ट्रंप का कहना है कि युद्ध को केवल “टेम्पररी सीजफायर” से नहीं रोका जा सकता, बल्कि एक स्थायी, विस्तृत और राजनीतिक समाधान की ज़रूरत है.
ट्रंप ने कहा, "सभी नेताओं का मानना है कि यूक्रेन युद्ध का अंत सिर्फ एक मजबूत और टिकाऊ शांति समझौते के ज़रिए ही संभव है. केवल संघर्षविराम पर भरोसा नहीं किया जा सकता क्योंकि वे लंबे समय तक नहीं टिकते."
व्हाइट हाउस में जेलेंस्की से मुलाकात की पुष्टि
इस नई नीति दिशा के तहत ट्रंप ने यह भी स्पष्ट किया कि वह आने वाले सोमवार को व्हाइट हाउस में यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की से मुलाकात करेंगे. यह मुलाकात संभावित रूप से बेहद अहम मानी जा रही है क्योंकि इसमें अमेरिका की भविष्य की भूमिका और शांति प्रक्रिया की रूपरेखा तय की जा सकती है.
इसके अलावा ट्रंप ने यह भी संकेत दिया कि पुतिन के साथ एक और बैठक आयोजित हो सकती है. उन्होंने यह भी कहा कि अगर माहौल सकारात्मक रहा तो वे एक त्रिपक्षीय बैठक ट्रंप, पुतिन और जेलेंस्की के बीच की संभावना को भी खारिज नहीं करते. हालांकि, क्रेमलिन की ओर से इस पर कोई उत्साह नहीं दिखाया गया है, और रूस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने इस प्रस्ताव को "फिलहाल असंभव" बताया.
बैठक में नहीं हुआ ‘सीजफायर’ का ज़िक्र
सबसे दिलचस्प बात यह रही कि छह घंटे तक चली इस बातचीत में कहीं भी 'सीजफायर' शब्द का इस्तेमाल नहीं किया गया. यह उस स्थिति से बिल्कुल अलग था जब ट्रंप लगातार युद्धविराम की बात कर रहे थे. बैठक में न तो किसी नए प्रतिबंध का ऐलान हुआ और न ही रूस पर किसी कार्रवाई का कोई संकेत दिया गया.
इसके बजाय, दोनों नेताओं के बीच बातचीत का माहौल काफी दोस्ताना रहा. बैठक के बाद पुतिन ने इसे सकारात्मक और रचनात्मक बताया, वहीं ट्रंप ने इसे बेहद सफल दिन करार दिया. दोनों नेताओं के चेहरों पर मुस्कान थी और किसी भी प्रकार की टकरावपूर्ण भावना नजर नहीं आई.
पुतिन की कूटनीतिक चाल?
विश्लेषकों का मानना है कि इस बैठक में असली कूटनीतिक जीत पुतिन की रही. रूसी राष्ट्रपति ने ट्रंप की सार्वजनिक प्रशंसा करते हुए यहां तक कह दिया कि “अगर ट्रंप राष्ट्रपति होते तो यह युद्ध कभी शुरू ही नहीं होता.” इस बयान को ट्रंप के लिए एक राजनीतिक उपहार माना जा रहा है, खासकर 2024 के चुनावों के मद्देनज़र.
पुतिन ने पश्चिमी देशों और यूक्रेन को अप्रत्यक्ष तौर पर चेतावनी दी कि अब अगर इस “शांति की शुरुआत” को नुकसान पहुंचाने की कोशिश हुई तो स्थिति और अधिक खराब हो सकती है. यानी, रूस ने अब गेंद यूक्रेन और उसके सहयोगियों के पाले में डाल दी है.
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