पेरिस: हिरोशिमा और नागासाकी पर हुए परमाणु हमलों को आज भी दुनिया इतिहास की सबसे भयानक घटनाओं में गिनती है. 6 अगस्त 1945 को अमेरिका ने हिरोशिमा पर परमाणु बम गिराया था. इसके तीन दिन बाद नागासाकी पर दूसरा हमला हुआ. इन हमलों के बाद द्वितीय विश्व युद्ध का अंत करीब आ गया और जापान ने कुछ ही दिनों में आत्मसमर्पण कर दिया.
अब एक बार फिर परमाणु हथियारों को लेकर चिंता बढ़ रही है. स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट यानी SIPRI और कार्नेगी एंडोमेंट फॉर इंटरनेशनल पीस की रिपोर्टों में दक्षिण एशिया, खासकर भारत और पाकिस्तान के बीच परमाणु टकराव के खतरे को गंभीर बताया गया है. रिपोर्ट में भारत-पाकिस्तान के बीच लगातार बने तनाव को इसकी बड़ी वजह माना गया है.
भारतीय उपमहाद्वीप को बताया सबसे संवेदनशील क्षेत्र
कार्नेगी एंडोमेंट फॉर इंटरनेशनल पीस के मुताबिक भारतीय उपमहाद्वीप दुनिया के सबसे संवेदनशील परमाणु क्षेत्रों में शामिल है. भारत और पाकिस्तान के पास परमाणु हथियार आने के बाद दोनों देशों के बीच कई बार ऐसे हालात बने हैं, जब तनाव काफी बढ़ गया.
1999 का कारगिल युद्ध इसका एक बड़ा उदाहरण था. इसके बाद 13 दिसंबर 2001 को भारतीय संसद पर आतंकी हमले के बाद दोनों देशों के बीच सैन्य तनाव बढ़ा था. उस समय भी परमाणु टकराव की आशंका जताई गई थी.
22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद एक बार फिर भारत और पाकिस्तान आमने-सामने आ गए. मई के शुरुआती दिनों में दोनों देशों के बीच करीब 88 घंटे तक सैन्य संघर्ष चला. इस दौरान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी परमाणु युद्ध की आशंका को लेकर चिंता जताई गई थी.
पाकिस्तान की परमाणु धमकियों से बढ़ी चिंता
इस संघर्ष के दौरान पाकिस्तान के कुछ नेताओं और सैन्य अधिकारियों की ओर से परमाणु हथियारों के इस्तेमाल की धमकियां भी सामने आईं. इससे दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ गया.
भारत ने इन धमकियों के बावजूद अपनी सैन्य कार्रवाई जारी रखी. ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत ने पाकिस्तान और उसके कब्जे वाले क्षेत्र में मौजूद आतंकी ठिकानों के साथ-साथ कई सैन्य ठिकानों को भी निशाना बनाया.
भारत के मुताबिक कार्रवाई के दौरान पाकिस्तान के कई एयरबेस, रडार और वायु रक्षा प्रणालियों को नुकसान पहुंचा. मुरीदके और बहावलपुर में आतंकी ढांचे भी भारतीय हमलों के निशाने पर रहे.
भारत और पाकिस्तान के पास कितने परमाणु हथियार?
SIPRI के जनवरी 2026 के अनुमान के मुताबिक भारत और पाकिस्तान के परमाणु हथियारों की संख्या में बहुत बड़ा अंतर नहीं है. भारत के पास करीब 190 और पाकिस्तान के पास करीब 170 परमाणु हथियार होने का अनुमान है.
हालांकि दोनों देशों की परमाणु रणनीति और हथियारों को इस्तेमाल करने की क्षमता अलग-अलग है. यही वजह है कि केवल हथियारों की संख्या से दोनों देशों के बीच परमाणु संतुलन को पूरी तरह नहीं समझा जा सकता.
SIPRI के अनुमान में यह भी कहा गया था कि भारत ने अपने कुछ परमाणु हथियारों को मिसाइल और अन्य प्रक्षेपण प्रणालियों के साथ तैनात रखा है, जबकि कुछ हथियार इस्तेमाल के लिए तैयार स्थिति में हो सकते हैं.
भारत और पाकिस्तान की परमाणु नीति
भारत लंबे समय से 'नो फर्स्ट यूज' यानी पहले परमाणु हथियार का इस्तेमाल नहीं करने की नीति पर कायम रहा है. भारत की परमाणु नीति का आधार भरोसेमंद न्यूनतम प्रतिरोध माना जाता है. भारत यह भी कह चुका है कि वह परमाणु हथियार संपन्न देश के खिलाफ अपनी नीति के तहत जवाब देने की क्षमता रखता है.
वहीं पाकिस्तान ने 'नो फर्स्ट यूज' की नीति नहीं अपनाई है. पाकिस्तान की परमाणु रणनीति का मुख्य उद्देश्य भारत की पारंपरिक सैन्य ताकत का मुकाबला करना है. इसके लिए उसने 'फुल-स्पेक्ट्रम डेटरेंस' यानी हर स्तर पर परमाणु प्रतिरोध की नीति विकसित की है.
तनाव कम करना क्यों जरूरी?
भारत और पाकिस्तान दोनों परमाणु हथियार रखने वाले देश हैं और दोनों के बीच लंबे समय से सीमा विवाद, आतंकवाद और सैन्य तनाव जैसे मुद्दे मौजूद हैं. ऐसे में किसी भी बड़े सैन्य संघर्ष के दौरान हालात तेजी से बिगड़ सकते हैं.
यही वजह है कि SIPRI और कार्नेगी जैसी संस्थाओं की रिपोर्टें दक्षिण एशिया में तनाव कम करने, बातचीत के रास्ते खुले रखने और परमाणु हथियारों से जुड़े जोखिमों को नियंत्रित करने की जरूरत पर ध्यान खींचती हैं.
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