Hantavirus Outbreak: अभी हर जगह हंता वायरस को लेकर चर्चा हो रही है. लोगों के मन में सवाल हैं कि क्या यह वायरस कोरोना की तरह जल्दी फैल सकता है? क्या सिर्फ छूने भर से इंफेक्शन हो सकता है? और क्या दुनिया किसी नई महामारी की तरफ बढ़ रही है? इस बीच, WHO यानी वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन ने स्थिति को लेकर जानकारी दी है.
यह मामला डच झंडे वाले लग्जरी क्रूज शिप MV Hondius से जुड़ा है. जहाज पर रहस्यमयी सांस संबंधी बीमारी के बाद हंता वायरस की पुष्टि हुई. अब तक आठ मामले सामने आए हैं. इनमें से पाँच लोगों में हंता वायरस पाया गया, जबकि तीन मामले संदिग्ध हैं. तीन लोगों की मौत भी हो चुकी है.
WHO क्या कहता है?
WHO के अनुसार, जहाज पर पहला मरीज 6 अप्रैल को बीमार हुआ और 11 अप्रैल को उसकी मौत हो गई. शुरू में डॉक्टरों को हंता वायरस का शक नहीं हुआ क्योंकि लक्षण सामान्य सांस संबंधी बीमारी जैसे थे. बाद में जब और लोग बीमार हुए, तब हंता वायरस की जांच की गई.
एक्सपर्ट की राय
WHO की इंफेक्शन रोग विशेषज्ञ डॉ. मारिया वान केरखोव ने कहा कि हंता वायरस की तुलना कोरोना से नहीं करनी चाहिए. उन्होंने बताया, "यह कोरोना वायरस नहीं है और यह उसी तरह नहीं फैलता. यह केवल बहुत करीबी और लंबे समय के संपर्क में फैल सकता है." ज्यादातर हंता वायरस इंसान से इंसान में नहीं फैलते.
हंता वायरस कैसे फैलता है?
साधारण तौर पर यह वायरस चूहों या उनके मल-मूत्र के संपर्क से फैलता है. इस मामले में “एंडीज स्ट्रेन” का शक है. यह हंता वायरस का ऐसा प्रकार है, जो सीमित स्तर पर इंसान से इंसान में फैल सकता है. इसी कारण WHO इस पर ध्यान दे रहा है.
इन्क्यूबेशन पीरियड और सुरक्षा
WHO ने बताया कि हंता वायरस के लक्षण इंफेक्शन के छह हफ्ते बाद भी दिख सकते हैं. इसलिए कई देशों में यात्रियों की निगरानी की जा रही है. WHO ने उन 12 देशों को अलर्ट भेजा है, जहां के यात्री जहाज से उतर चुके थे.
स्थिति को गंभीर मानते हुए, WHO, नीदरलैंड के डॉक्टर और यूरोपियन सेंटर फॉर डिजीज प्रिवेंशन एंड कंट्रोल की टीम जहाज पर पहुंच गई है. ये टीम यात्रियों की जांच कर रही है और देख रही है कि इंफेक्शन जहाज में फैला या लोग पहले से ही संक्रमित थे.
हालांकि WHO कहता है कि फिलहाल इस वायरस का खतरा दुनिया भर में कम है. लेकिन एक्सपर्ट्स मानते हैं कि बंद जगहों जैसे क्रूज शिप में लंबे समय तक साथ रहने पर इंफेक्शन फैलने का खतरा बढ़ सकता है. इसलिए सभी स्वास्थ्य एजेंसियां इस मामले पर सतर्क हैं.
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