Third World Countries: व्हाइट हाउस के ठीक कुछ ब्लॉक दूर हुई गोलीबारी ने अमेरिकी राजनीति को उस तरह झकझोर दिया, जिसकी गूंज अब भी वॉशिंगटन की दीवारों में सुनाई दे रही है. लेकिन असली हलचल तब मची, जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस घटना के बाद अचानक यह घोषणा कर दी कि अब अमेरिका ‘थर्ड वर्ल्ड कंट्रीज’ से आने वाले माइग्रेशन पर पूरी तरह रोक लगाएगा.
यह फैसला इतना बड़ा था कि राजनीति, मीडिया और विशेषज्ञ सभी एक ही सवाल पर अटक गए, आख़िर ये थर्ड वर्ल्ड देश हैं कौन? क्योंकि आज इस शब्द की कोई आधिकारिक परिभाषा दुनिया में कहीं मौजूद ही नहीं है. फिर भी ट्रंप ने इसे राष्ट्रीय सुरक्षा से जोड़ दिया, जिससे बहस और भी गहरी हो गई.
नया माइग्रेशन बैन और अनुत्तरित सवाल
गोलीबारी की घटना के बाद दिए गए संबोधन में ट्रंप ने सिर्फ सीमा सुरक्षा की बात नहीं की, बल्कि यह भी कहा कि अमेरिका को अब “रिवर्स माइग्रेशन” यानी पहले से यहाँ रह रहे लाखों प्रवासियों को वापस भेजने की दिशा में काम करना होगा.
उनका ये बयान अमेरिकी इतिहास में सबसे आक्रामक इमिग्रेशन नीतियों में गिना जा रहा है. लेकिन जिस शब्द, Third World का अब कोई कानूनी दर्जा तक नहीं, उसके आधार पर पूरा माइग्रेशन रोकने की बात ने राजनीतिक माहौल को गर्मा दिया है.
‘थर्ड वर्ल्ड’ शब्द की कहानी,जहाँ से शुरू हुआ भ्रम
आज लोग अक्सर “थर्ड वर्ल्ड” शब्द को गरीब, पिछड़े या अस्थिर देशों के लिए इस्तेमाल करते हैं, लेकिन इसकी असली जड़ें इससे बिल्कुल अलग हैं. 1952 में फ्रेंच डेमोग्राफर अल्फ्रेड सॉवी ने पहली बार यह शब्द गढ़ा था. उस समय दुनिया शीत युद्ध में तीन हिस्सों में बंटी थी, एक आर्थिक या विकास के आधार पर नहीं, बल्कि राजनीतिक गुटों के आधार पर:
1. फर्स्ट वर्ल्ड
अमेरिका, पश्चिमी यूरोप, NATO देश, जापान-पूंजीवादी लोकतंत्र.
2. सेकंड वर्ल्ड
सोवियत यूनियन और उसके कम्युनिस्ट सहयोगी, चीन, क्यूबा आदि.
3. थर्ड वर्ल्ड
वे देश जो किसी भी गुट में शामिल नहीं हुए, अफ्रीका, एशिया, लैटिन अमेरिका और मध्य-पूर्व के कई राष्ट्र.
यानी शुरुआत में “थर्ड वर्ल्ड” का मतलब गरीब नहीं, बल्कि गुट-निरपेक्ष था.
सोवियत पतन के बाद बदल गई परिभाषा
1991 में USSR टूट गया. साथ ही “फर्स्ट-सेकंड-थर्ड वर्ल्ड” की पूरी अवधारणा भी खत्म हो गई. इसके बाद यह शब्द धीरे-धीरे बदलाव से गुजरते हुए आर्थिक रूप से कमजोर और विकासशील देशों के लिए इस्तेमाल होने लगा. संयुक्त राष्ट्र आज ऐसे देशों को Least Developed Countries (LDCs) कहता है, जहाँ आय कम है, स्वास्थ्य सुविधाएँ पिछड़ी हैं और संसाधन सीमित हैं.
अमेरिकी सरकार ने आज तक किसी भी देश को ‘थर्ड वर्ल्ड’ कहकर आधिकारिक श्रेणी में नहीं रखा है. यानी ट्रंप जिस श्रेणी का जिक्र कर रहे हैं, वो कानूनी रूप से अस्तित्व में ही नहीं है.
क्या ट्रंप का इशारा अफ्रीका, एशिया और लैटिन अमेरिका की ओर?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह प्रतिबंध निम्न क्षेत्रों पर लागू हो सकता है:
अमेरिकी राजनीति में उठता तूफान
ट्रंप का यह बयान चुनावी राजनीति के केंद्र में आ गया है. उनके विरोधियों का कहना है कि यह शब्द अस्पष्ट, गैरकानूनी और विभाजनकारी है. यह नीति नस्ली तनाव बढ़ाएगी और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिका की छवि खराब करेगी.
वहीं, समर्थकों का तर्क है कि सुरक्षा खतरे को देखते हुए यह सख्ती ज़रूरी है. उनके अनुसार सीमाओं पर नियंत्रण के बिना अमेरिका का सिस्टम सुधारना नामुमकिन है. इस तरह यह मुद्दा अब सिर्फ माइग्रेशन का नहीं, बल्कि अमेरिका की पहचान और भविष्य का सवाल बन चुका है.
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