Iran US Talk: डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ दूसरे दौर की बातचीत के संकेत दिए हैं. यह बयान ऐसे समय आया है जब होर्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिका की नौसेना ने सख्त निगरानी और नाकेबंदी कर रखी है.
ट्रंप ने एक इंटरव्यू में कहा कि अमेरिका और ईरान के अधिकारी अगले दो दिनों में फिर से मिल सकते हैं. उन्होंने बताया कि पिछली बैठक इस्लामाबाद के होटल सेरेना में हुई थी और अगली बातचीत भी वहीं हो सकती है. इससे यह संकेत मिल रहा है कि दोनों देश अभी भी बातचीत के जरिए समाधान निकालने की कोशिश कर रहे हैं.
पाकिस्तान की बढ़ी भूमिका
ट्रंप ने पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर की तारीफ भी की. उन्होंने कहा कि वे अच्छा काम कर रहे हैं और उनकी वजह से बातचीत आगे बढ़ने की उम्मीद है.
इससे साफ है कि इस पूरे मामले में पाकिस्तान की भूमिका अहम होती जा रही है.
बयानों में दिखी उलझन
हालांकि ट्रंप के बयानों में थोड़ी असमंजस भी नजर आई. उन्होंने पहले कहा कि बातचीत धीमी चल रही है और अगली बैठक शायद पाकिस्तान में न हो. उन्होंने यह भी संकेत दिया कि अगली मीटिंग किसी और जगह, जैसे यूरोप में भी हो सकती है.
समय और जगह अभी तय नहीं
यानी अभी यह साफ नहीं है कि अगली बातचीत कब और कहां होगी. इतना जरूर है कि बातचीत पूरी तरह बंद नहीं हुई है और दोनों देश अब भी बातचीत के रास्ते पर हैं.
पहली बैठक रही बेनतीजा
दो हफ्ते के युद्धविराम के बाद अमेरिका और ईरान के प्रतिनिधियों की इस्लामाबाद में मुलाकात हुई थी. लेकिन यह बैठक किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सकी. दोनों देशों ने वार्ता के असफल होने के लिए एक-दूसरे को जिम्मेदार ठहराया था.
होर्मुज में सख्ती बढ़ी
इस बीच यूएस सेंट्रल कमांड ने बताया कि होर्मुज स्ट्रेट में नाकेबंदी के पहले 24 घंटों में कोई भी जहाज पार नहीं कर सका. इस ऑपरेशन में 10,000 से ज्यादा सैनिक, कई युद्धपोत और विमान तैनात किए गए हैं.
कुछ जहाजों ने बदला रास्ता
CENTCOM के मुताबिक, 6 व्यापारिक जहाजों ने अमेरिकी निर्देश मानते हुए अपना रास्ता बदल लिया और वापस ईरानी बंदरगाहों की ओर लौट गए.
मीडिया रिपोर्ट्स में अलग दावा
हालांकि कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया है कि नाकेबंदी के बावजूद ईरान से जुड़े 4 जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य पार करने में सफल रहे. इससे साफ है कि जमीनी स्थिति को लेकर अलग-अलग दावे सामने आ रहे हैं.
क्या है आगे की स्थिति
कुल मिलाकर, हालात अभी भी तनावपूर्ण बने हुए हैं. एक तरफ समुद्र में सख्ती बढ़ाई जा रही है, तो दूसरी तरफ बातचीत के जरिए हल निकालने की कोशिश भी जारी है. अब सबकी नजर इस बात पर है कि अगली बातचीत कब और कहां होती है और क्या इससे दोनों देशों के बीच तनाव कम हो पाएगा या नहीं.
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