Dhvani Hypersonic Missile: भारत की मिसाइल टेक्नोलॉजी ने विश्व के प्रमुख देशों जैसे चीन, अमेरिका और रूस के बराबर अपनी जगह बना ली है. ब्रह्मोस मिसाइल, जिसकी गति और क्षमताओं की तारीफ पूरी दुनिया में होती है, एक ऐसा हथियार है जिसे लगभग कोई भी एयर डिफेंस सिस्टम पकड़ नहीं सकता. लेकिन अब भारत एक ऐसे मिसाइल प्रोजेक्ट पर काम कर रहा है, जो ब्रह्मोस से भी कई गुना अधिक उन्नत और खतरनाक बताया जा रहा है.
इस मिसाइल को दुनिया की सबसे आधुनिक मिसाइल माना जा रहा है, जो तकनीकी तौर पर चीन की सबसे प्रभावशाली हाइपरसोनिक मिसाइल DF-26 से भी कहीं आगे है. इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट का नेतृत्व भारतीय रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) कर रहा है.
हाइपरसोनिक मिसाइल पर काम शुरू
मिसाइल युद्ध की आधुनिकता में अब हाइपरसोनिक तकनीक एक बड़ा मोड़ साबित हो रही है. भारत ने इस क्षेत्र में कदम बढ़ाते हुए ‘ध्वनि’ नाम की हाइपरसोनिक मिसाइल पर काम शुरू किया है. इस मिसाइल का विकास DRDO के हाइपरसोनिक टेक्नोलॉजी डेमोंस्ट्रेटर व्हीकल (HSTDV) प्रोग्राम के आधार पर हो रहा है. ध्वनि मिसाइल Mach 6 की रफ्तार से उड़ान भर सकेगी, यानी लगभग 7,400 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से.
इसकी खासियत यह है कि यह उड़ान के दौरान अपने मिशन और लक्ष्य के अनुसार दिशा बदल सकती है, जिससे इसे पकड़ना लगभग नामुमकिन हो जाता है. रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस स्पीड और चपलता के कारण अमेरिकी THAAD और इजराइली Iron Dome जैसे सबसे उन्नत एयर डिफेंस सिस्टम भी ध्वनि मिसाइल को रोकने में असमर्थ रहेंगे.
ध्वनि मिसाइल की तकनीकी विशेषताएँ
ध्वनि मिसाइल का डिजाइन HSTDV की सफलता पर आधारित है, जिसने स्क्रैमजेट और सुपरसोनिक रैमजेट इंजन तकनीक में भारत की महारत को साबित किया है. भारत ने इस प्रकार के इंजन की टेस्टिंग में लगातार 1,000 सेकंड से अधिक समय तक बेहतरीन प्रदर्शन किया है, जो एक अद्वितीय रिकॉर्ड है. पारंपरिक क्रूज मिसाइलों की तुलना में, ध्वनि में दो-चरणीय प्रणाली लागू की गई है. पहले चरण में रॉकेट बूस्टर मिसाइल को उच्च ऊंचाई तक पहुंचाता है, और दूसरे चरण में हाइपरसोनिक ग्लाइड व्हीकल लक्ष्य की ओर तेजी से बढ़ती है. यह मिसाइल पृथ्वी की सतह से काफी कम ऊंचाई पर उड़ान भरती है, जिससे रडार और अन्य सेंसरों के लिए इसे पकड़ना मुश्किल हो जाता है.
ध्वनि की गति आवाज़ की गति से लगभग छह गुना तेज है, और यह क्षमता इसे समुंदर और भूमि दोनों तरह के लक्ष्यों को सटीक रूप से नष्ट करने में सक्षम बनाती है. इस मिसाइल के गाइडेंस सिस्टम और थर्मल मैनेजमेंट में भी अत्याधुनिक तकनीकों का उपयोग किया गया है, जिससे यह उच्च तापमान और उच्च दबाव को आसानी से सहन कर सकती है.
चीन की DF-26 मिसाइल के मुकाबले ध्वनि की श्रेष्ठता
चीन की DF-26 मिसाइल को विश्व की शीर्ष हाइपरसोनिक मिसाइलों में गिना जाता है. यह मिसाइल अपनी लंबी दूरी और विनाशकारी क्षमता के लिए जानी जाती है. हालांकि, DF-26 मुख्य रूप से एक सीमित मार्ग और दिशा के अनुसार डिजाइन की गई है, जबकि ध्वनि मिसाइल की सबसे बड़ी ताकत इसकी उड़ान के दौरान दिशा बदलने की क्षमता है. इससे यह अपने विरोधियों को चकमा देने में सक्षम है, जिससे किसी भी एयर डिफेंस सिस्टम के लिए इसे रोकना बहुत कठिन हो जाता है.
इसके अलावा, DF-26 की मारक क्षमता और उड़ान ऊंचाई में भी ध्वनि के मुकाबले कुछ सीमाएं हैं. ध्वनि की तकनीकी विशेषताएं भारत की रक्षा रणनीति को बेहद मजबूत बनाएंगी और भारत को उन चुनिंदा देशों की सूची में शामिल कर देंगी जिन्होंने ऑपरेशनल हाइपरसोनिक हथियार विकसित किए हैं, जिनमें अमेरिका, रूस और चीन भी शामिल हैं.
DRDO की तकनीकी उपलब्धियां और भविष्य की तैयारी
DRDO ने ध्वनि मिसाइल के विकास में कई महत्वपूर्ण परीक्षण सफलतापूर्वक पूरे किए हैं. इनमें एरोडायनेमिक डिज़ाइन, थर्मल मैनेजमेंट, गाइडेंस सिस्टम और स्क्रैमजेट इंजन की जांच शामिल हैं. विशेष रूप से, उच्च तापमान सहन करने वाले एडवांस सेरामिक थर्मल बैरियर कोटिंग्स का परीक्षण भी सफल रहा है. इन सफल परीक्षणों के बाद, ध्वनि मिसाइल का पहला फुल-स्केल उड़ान परीक्षण 2025 में होने की उम्मीद है.
भारतीय सेना की ताकत में वृद्धि
ध्वनि मिसाइल के साथ, ब्रह्मोस मिसाइल भारत की सुरक्षा ताकत में एक क्रांतिकारी वृद्धि करेगी. ये दोनों मिसाइलें अगले कम से कम 15 वर्षों तक भारत को क्षेत्रीय सुरक्षा में एक मजबूत स्थिति देंगी, जिससे चीन और पाकिस्तान जैसी प्रतिद्वंद्वी सेनाओं के लिए उन्हें इंटरसेप्ट करना लगभग असंभव हो जाएगा. इस प्रकार, भारत न केवल अपनी सामरिक ताकत को बढ़ाएगा बल्कि भविष्य के खतरों का सामना करने के लिए भी तैयार रहेगा.
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