मिडिल ईस्ट में फिर बढ़ेगा तनाव! ईरान के एक बयान ने बढ़ाई हलचल, कहा- युद्ध के लिए तैयार...

Abbas Araghchi On War: ईरान और इज़राइल के बीच हुए 12 दिन के युद्ध को चार महीने बीत चुके हैं, लेकिन तनाव अब भी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है. इसी बीच ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने बड़ा बयान दिया है.

Tension will increase again in the Middle East statement from Iran increased the stir
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Abbas Araghchi On War: ईरान और इज़राइल के बीच हुए 12 दिन के युद्ध को चार महीने बीत चुके हैं, लेकिन तनाव अब भी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है. इसी बीच ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि ईरान की सेना अब पहले से कहीं ज्यादा तैयार है और किसी भी संभावित खतरे से निपटने की पूरी क्षमता रखती है. हालांकि, उन्होंने साफ कहा कि देश किसी जंग की तैयारी नहीं कर रहा, बल्कि सुरक्षा और आत्मरक्षा पर ध्यान दे रहा है.

अराघची ने अमेरिका-आधारित पत्रकार दरियूश सज्जादी को दिए एक इंटरव्यू में कहा, “हमारी तैयारी का स्तर अब उस समय से भी ऊंचा है जब युद्ध छिड़ा था. लेकिन युद्ध के लिए तैयार रहना, युद्ध की उम्मीद करना नहीं है. अगर आप तैयार हैं, तो कोई हमला करने की हिम्मत नहीं करता. मुझे यकीन है कि पिछला अनुभव दोबारा नहीं दोहराया जाएगा.”

अमेरिका की मध्यस्थता से थमा था 12 दिन का युद्ध

इस साल जून में ईरान और इज़राइल के बीच 12 दिन तक मिसाइलें और हवाई हमले चलते रहे थे. युद्ध 24 जून को अमेरिका की मध्यस्थता में हुए युद्धविराम के बाद थमा था. सूत्रों के मुताबिक, इस संघर्ष की शुरुआत तब हुई जब अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु कार्यक्रम को लेकर हुई 5 दौर की बातचीत किसी समझौते तक नहीं पहुंच पाई.

13 जून को समयसीमा खत्म होते ही इज़राइल ने सैन्य कार्रवाई शुरू कर दी. 22 जून को अमेरिका ने भी इस्फहान, नतांज और फोर्दो जैसे प्रमुख परमाणु ठिकानों पर हवाई हमले किए. युद्ध के बाद ईरान के 400 किलो उच्च संवर्धित यूरेनियम (Highly Enriched Uranium) के गायब होने की खबरें सामने आईं, जिससे वैश्विक चिंता और बढ़ गई.

ईरान ने परमाणु आरोपों को बताया “झूठा”

तेहरान का कहना है कि यह यूरेनियम अमेरिकी और इज़रायली हमलों के मलबे के नीचे दब गया है और अभी पहुंच से बाहर है. लेकिन अंतरराष्ट्रीय परमाणु एजेंसी (IAEA) को अब तक इन जगहों पर जाने की अनुमति नहीं दी गई है.

अराघची ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा, “हमारा परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह शांतिपूर्ण और कानूनी है. हमारे सिद्धांत में परमाणु हथियारों की कोई जगह नहीं है.
हम संवर्धन करते हैं क्योंकि यह हमारा अधिकार है, बम बनाने के लिए नहीं.” वहीं IAEA का कहना है कि इतनी ऊंची शुद्धता तक यूरेनियम संवर्धन का कोई नागरिक मकसद नहीं हो सकता, जिससे शक और गहरा गया है.

अमेरिका पर फिर बरसे अराघची

अराघची ने अमेरिका पर भरोसा तोड़ने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा, “हमने वार्ता की, समझौते किए, पर हर बार अमेरिका ने वादाखिलाफी की. न्यूयॉर्क में भी बातचीत का मौका था, लेकिन उनकी मांगें पूरी तरह अव्यावहारिक थीं. वो चाहते थे कि हम अपने संवर्धित पदार्थ सौंप दें, बदले में सिर्फ छह महीने की स्नैपबैक अवधि मिले. कौन ऐसा स्वीकार करेगा?” उन्होंने कहा कि कूटनीति को बंद नहीं किया जा सकता, लेकिन बातचीत तभी संभव है जब अमेरिका “ईमानदारी और आपसी सम्मान” के साथ सामने आए.

“दबाव नहीं, सम्मान चाहिए”

ईरानी विदेश मंत्री ने कहा कि देश अपने राष्ट्रीय अधिकारों और गरिमा से समझौता नहीं करेगा. ईरान बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन किसी दबाव या धमकी के आगे झुकेगा नहीं. ईरानी विदेश मंत्री ने कहा, “हम किसी भी उचित और निष्पक्ष समाधान के लिए खुले हैं, लेकिन दबाव की राजनीति अब नहीं चलेगी.”

JCPOA से ट्रंप की वापसी के बाद बिगड़े रिश्ते

2018 में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका को ईरान परमाणु समझौते (JCPOA) से बाहर निकाल दिया था. इसके बाद वॉशिंगटन ने तेहरान पर कड़े प्रतिबंध लगाए और “मैक्सिमम प्रेशर पॉलिसी” लागू की. नतीजा यह हुआ कि दोनों देशों के रिश्ते लगातार बिगड़ते चले गए और क्षेत्र में तनाव बढ़ता गया.

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