टाटा ग्रुप की कमान संभाल रहे एन चंद्रशेखरन के भविष्य को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच बड़ा अपडेट सामने आया है. टाटा संस लिमिटेड के बोर्ड ने गुरुवार को उन्हें एग्जीक्यूटिव चेयरमैन के तौर पर पांच साल का नया कार्यकाल देने की मंजूरी दे दी है. इसके साथ ही टाटा ग्रुप की होल्डिंग कंपनी टाटा संस को शेयर बाजार में लिस्ट कराने की प्रक्रिया शुरू करने को भी हरी झंडी मिल गई है. ऐसे में चंद्रशेखरन के सामने अब IPO की तैयारियों में अहम भूमिका निभाने की जिम्मेदारी होगी.
चेयरमैन पद पर फिर से नियुक्ति को लेकर पेच
खास बात यह है कि कुछ समय पहले चंद्रशेखरन ने खुद संकेत दिया था कि 20 फरवरी 2027 को मौजूदा कार्यकाल खत्म होने के बाद वह तीसरा कार्यकाल नहीं लेंगे. अब बोर्ड की ओर से पांच साल के एक्सटेंशन को मंजूरी मिलने से टाटा संस की लीडरशिप को लेकर तस्वीर बदलती नजर आ रही है. हालांकि, उनकी दोबारा नियुक्ति पर अंतिम फैसला टाटा ट्रस्ट्स की भूमिका के कारण अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं माना जा सकता.
नोएल टाटा ने जताया था विरोध
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन और टाटा संस के डायरेक्टर नोएल टाटा ने फरवरी में हुई बोर्ड मीटिंग के दौरान चंद्रशेखरन के प्रस्तावित तीसरे कार्यकाल का विरोध किया था. रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया गया है कि नोएल टाटा अब भी नेतृत्व में बदलाव के पक्ष में हैं. टाटा ट्रस्ट्स की टाटा संस में करीब 66 फीसदी हिस्सेदारी है, इसलिए चेयरमैन और शीर्ष प्रबंधन से जुड़े फैसलों में उनकी भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है.
टाटा ट्रस्ट्स के रुख पर टिकी निगाहें
टाटा संस में बहुमत हिस्सेदारी रखने वाले टाटा ट्रस्ट्स ही कंपनी के नेतृत्व और भविष्य की रणनीति से जुड़े बड़े फैसलों में निर्णायक भूमिका निभाते हैं. वहीं, सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट ने सार्वजनिक रूप से चंद्रशेखरन के दोबारा नियुक्ति के लिए खुद को पेश न करने के पहले के फैसले का सम्मान करने की बात कही थी. अब बोर्ड की नई मंजूरी के बाद सबकी नजर इस बात पर रहेगी कि टाटा ट्रस्ट्स चंद्रशेखरन के पांच साल के नए कार्यकाल और टाटा संस की लिस्टिंग को लेकर क्या रुख अपनाते हैं.
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