पूजा या नमाज... धार भोजशाला विवाद पर आ गया सुप्रीम कोर्ट का फैसला, किसे मिली इजाजत? जानें पूरा मामला

मध्य प्रदेश के धार स्थित भोजशाला परिसर में बसंत पंचमी के मौके पर पूजा और नमाज को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट और संतुलित व्यवस्था तय कर दी है.

Supreme Court decision on Dhar Bhojshala controversy
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Dhar Bhojshala: मध्य प्रदेश के धार स्थित भोजशाला परिसर में बसंत पंचमी के मौके पर पूजा और नमाज को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट और संतुलित व्यवस्था तय कर दी है. अदालत ने आदेश दिया है कि हिंदू पक्ष दोपहर 12 बजे तक पूजा कर सकेगा, इसके बाद मुस्लिम समुदाय को नमाज अदा करने की अनुमति होगी. नमाज के बाद शाम 4 बजे से हिंदू पक्ष दोबारा पूजा कर सकेगा. सुप्रीम कोर्ट ने यह फैसला अखंड सरस्वती पूजा की अनुमति को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई के बाद सुनाया.

हिंदू पक्ष ने 20 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर 23 जनवरी को बसंत पंचमी के अवसर पर पूरे दिन अखंड सरस्वती पूजा की अनुमति मांगी थी. याचिका में कहा गया था कि बसंत पंचमी सरस्वती पूजा का विशेष पर्व है और इस दिन सूर्योदय से सूर्यास्त तक धार्मिक अनुष्ठान, हवन और पूजा की परंपरा रही है. इसी मांग पर सुप्रीम कोर्ट ने 22 जनवरी को सुनवाई कर अपना आदेश सुनाया.

तीन जजों की पीठ ने की सुनवाई

मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल पंचोली की पीठ ने की. सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों की दलीलें सुनी गईं और प्रशासन व भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) से भी स्थिति पर जानकारी ली गई.

हिंदू पक्ष की दलील: सूर्योदय से सूर्यास्त तक पूजा की परंपरा

हिंदू पक्ष की ओर से अदालत को बताया गया कि पिछले कुछ वर्षों से बसंत पंचमी शुक्रवार को पड़ रही है, जिससे पूजा और नमाज के समय को लेकर विवाद की स्थिति बनती रही है. वकील ने दलील दी कि बसंत पंचमी पर पारंपरिक रूप से पूरे दिन पूजा, हवन और धार्मिक अनुष्ठान किए जाते हैं, इसलिए अखंड पूजा की अनुमति दी जानी चाहिए.

ASI ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने का दिया भरोसा

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के वकील ने अदालत को आश्वस्त किया कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सभी जरूरी इंतजाम किए जाएंगे. उन्होंने कहा कि पिछले वर्षों की तरह इस बार भी प्रशासन पूरी तरह सतर्क रहेगा और किसी भी तरह की अव्यवस्था नहीं होने दी जाएगी.

मुस्लिम पक्ष ने नमाज के समय को लेकर रखी बात

मस्जिद पक्ष के वकील ने अदालत को बताया कि दोपहर 1 बजे से 3 बजे के बीच नमाज अदा की जाएगी और इसके बाद परिसर खाली कर दिया जाएगा. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जुमे की नमाज का समय बदला नहीं जा सकता. हालांकि, अन्य नमाजों के समय में लचीलापन संभव हो सकता है.

हिंदू पक्ष की ओर से सुझाव दिया गया कि नमाज को शाम 5 बजे के बाद कराया जाए ताकि पूजा बिना रुकावट जारी रह सके, लेकिन मस्जिद पक्ष ने इसे अस्वीकार कर दिया.

सुप्रीम कोर्ट का संतुलित समाधान

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने संतुलित व्यवस्था लागू करने का फैसला किया. कोर्ट ने कहा कि दोपहर 1 से 3 बजे तक नमाज के लिए परिसर के भीतर एक अलग और विशेष स्थान उपलब्ध कराया जाएगा. नमाज अदा करने वालों के लिए अलग प्रवेश और निकास मार्ग सुनिश्चित किए जाएंगे ताकि किसी प्रकार की असुविधा या टकराव न हो.

पूजा के लिए भी अलग स्थान की व्यवस्था

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि बसंत पंचमी के अवसर पर हिंदू समुदाय को पारंपरिक धार्मिक अनुष्ठान करने के लिए परिसर में अलग स्थान उपलब्ध कराया जाएगा. कोर्ट ने साफ किया कि नमाज के बाद हिंदू पक्ष को शाम 4 बजे से दोबारा पूजा करने की पूरी अनुमति होगी.

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