नई दिल्ली: भारत के स्वदेशी लड़ाकू विमान तेजस (LCA Tejas) कार्यक्रम में एक बड़ी प्रगति देखने को मिल रही है. लंबे समय तक इंजन आपूर्ति में देरी करने के बाद अब अमेरिकी एयरोस्पेस कंपनी General Electric (GE) ने अचानक रफ्तार पकड़ ली है. कंपनी ने Hindustan Aeronautics Limited (HAL) को भरोसा दिलाया है कि अब इंजन की डिलीवरी तेज़ी से की जाएगी, जिससे वायुसेना को तेजस Mk-1A की आपूर्ति में देरी ना हो.
यह बदलाव ऐसे समय पर देखने को मिल रहा है जब भारत फ्रांस की कंपनी Safran S.A. के साथ फाइटर जेट इंजन निर्माण को लेकर गंभीर बातचीत कर रहा है. रिपोर्टों के मुताबिक, GE की तरफ से आया यह सकारात्मक रुख कहीं न कहीं फ्रांसीसी विकल्प के उभरते दबाव का परिणाम भी माना जा रहा है.
GE की ढिलाई पर फ्रांसीसी प्रभाव?
तेजस Mk-1A प्रोजेक्ट को लेकर GE द्वारा इंजन सप्लाई में काफी लंबे समय तक अनिश्चितता बनी रही. इसका असर HAL द्वारा तैयार किए गए तेजस विमानों की डिलीवरी पर भी पड़ा. लेकिन जैसे ही खबरें सामने आईं कि भारत अब Safran के साथ इंजन निर्माण पर विचार कर रहा है, GE ने अपनी रणनीति में बदलाव कर दिया.
HAL के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक डॉ. सीबी अनंतकृष्णन ने बताया कि अब GE ने सप्लाई चेन के मुद्दों को काफी हद तक सुलझा लिया है और इंजन उत्पादन में तेजी लाने का वादा किया है. HAL को मौजूदा वित्त वर्ष में 12 इंजन मिलने थे, जिनमें से पहले सिर्फ 3 ही मिले थे. लेकिन अब कंपनी ने इस साल के अंत तक 10 और इंजन सप्लाई करने की बात कही है. मार्च 2026 तक बाकी बचे दो इंजन भी मिलने की उम्मीद है.
तेजस Mk-1A की डिलीवरी अब ट्रैक पर
भारत ने HAL को तेजस Mk-1A फाइटर जेट की डिलीवरी के लिए एक बड़ा ऑर्डर दिया है. हाल ही में रक्षा मंत्रालय और HAL के बीच 62,370 करोड़ रुपये की डील साइन की गई है, जिसमें कुल 97 तेजस Mk-1A लड़ाकू विमान शामिल हैं, इनमें 68 सिंगल सीट और 29 डुअल सीट वेरिएंट होंगे. HAL की ओर से पहले ही लगभग 10 विमान तैयार किए जा चुके हैं और 11वां विमान भी अंतिम चरण में है.
हालांकि इन विमानों को इंडक्शन के लिए तैयार करने में सबसे बड़ी बाधा GE इंजन की समय पर आपूर्ति थी, जो अब धीरे-धीरे दूर होती दिख रही है.
Safran का विकल्प: अमेरिका के लिए चेतावनी!
भारत और अमेरिका ने 2023 में एक बड़े करार पर हस्ताक्षर किए थे, जिसके तहत GE और HAL भारत में ही F414 इंजन का निर्माण करने वाले थे. यह इंजन भारत के अगली पीढ़ी के तेजस Mk-2 और अन्य स्वदेशी फाइटर जेट प्रोजेक्ट्स में इस्तेमाल होना था.
लेकिन जब अमेरिकी प्रशासन और GE की तरफ से इस डील को लेकर अपेक्षित तेजी नहीं दिखी, तब भारत ने फ्रांस के साथ बातचीत शुरू की. Safran S.A., जो मिराज और राफेल जेट के इंजन भी बनाती है, भारत को एक भरोसेमंद विकल्प के रूप में दिखाई देने लगी. Safran की तरफ से भारत में जॉइंट वेंचर और ट्रांसफर ऑफ टेक्नोलॉजी (ToT) को लेकर स्पष्ट प्रस्ताव दिए गए हैं, जो भारत की आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ा कदम साबित हो सकते हैं.
Safran पहले से ही HAL के साथ कई परियोजनाओं में कार्य कर चुकी है और उसने इंजन निर्माण की 100% तकनीक भारत को देने की पेशकश भी की है, जो अमेरिका जैसी ताकतवर सैन्य अर्थव्यवस्था से भी नहीं मिली.
भारत की रणनीति: एक से अधिक विकल्प
भारत अब रक्षा क्षेत्र में मल्टी-वेंडर स्ट्रेटेजी अपना रहा है. इसका सीधा उद्देश्य यह है कि कोई एक देश या कंपनी भारत के अहम रणनीतिक कार्यक्रमों को दबाव में न ले सके. अमेरिका की GE को भी अब यह समझ आने लगा है कि अगर वह समय पर आपूर्ति और विश्वसनीयता नहीं बनाए रखती, तो भारत के पास Safran जैसे तकनीकी रूप से सक्षम विकल्प मौजूद हैं.
हाल की प्रगति से साफ है कि GE अब भारत के साथ अपने रिश्तों को मज़बूत करने की दिशा में गंभीर हो गई है. कंपनी ने HAL को न केवल समय पर इंजन देने का भरोसा दिलाया है, बल्कि सप्लाई चेन में सुधार और संवाद को बेहतर करने की प्रतिबद्धता भी दिखाई है.
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