लैंडमाइन विस्फोट में खोया पैर, नहीं टूटा हौसला... कौन हैं सोमन राणा? जिन्होंने CWG 2026 में जीता गोल्ड

यह कहानी है सोमन राणा की, जिन्होंने सेना की वर्दी से लेकर पैरा एथलेटिक्स के मैदान तक हर मोर्चे पर खुद को साबित किया. कॉमनवेल्थ गेम्स में F57 शॉट पुट स्पर्धा में गोल्ड जीतकर उन्होंने यह दिखा दिया कि असली जीत शरीर की नहीं, बल्कि हौसले की होती है.

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भारत के लिए कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में आया यह गोल्ड मेडल सिर्फ पदकों की सूची में जुड़ा एक और नाम नहीं था, बल्कि यह उस जज्बे का प्रतीक था जो विपरीत परिस्थितियों के आगे कभी झुकता नहीं. एक सैनिक, जिसने देश की रक्षा करते हुए अपना पैर खो दिया, लेकिन अपने सपनों को नहीं छोड़ा. एक मुक्केबाज, जिसका करियर एक लैंडमाइन विस्फोट के बाद खत्म माना गया, लेकिन जिसने उसी दर्द को अपनी सबसे बड़ी ताकत बना लिया. यही कहानी है सोमन राणा की, जिन्होंने सेना की वर्दी से लेकर पैरा एथलेटिक्स के मैदान तक हर मोर्चे पर खुद को साबित किया. कॉमनवेल्थ गेम्स में F57 शॉट पुट स्पर्धा में गोल्ड जीतकर उन्होंने यह दिखा दिया कि असली जीत शरीर की नहीं, बल्कि हौसले की होती है.

खेलों के प्रति जुनून ने बचपन से तय कर दिया था रास्ता

16 जनवरी 1983 को बिहार में जन्मे सोमन राणा का बचपन खेलों के बीच बीता. उन्हें शुरू से ही प्रतिस्पर्धा पसंद थी और यही लगन आगे चलकर उन्हें भारतीय सेना तक ले गई. भारतीय सेना की 2nd Battalion, 8 Gorkha Rifles में भर्ती होने के बाद भी खेल उनके जीवन का सबसे अहम हिस्सा बने रहे. सेना में रहते हुए उन्होंने बॉक्सिंग को गंभीरता से अपनाया और सर्विसेज स्पोर्ट्स कंट्रोल बोर्ड की ओर से मिडिलवेट वर्ग में अपनी पहचान बनाई. साल 2005 की सीनियर नेशनल बॉक्सिंग चैंपियनशिप में उन्होंने क्वार्टर फाइनल तक का सफर तय किया और देश के दिग्गज मुक्केबाज विजेंदर सिंह जैसे खिलाड़ियों के साथ अभ्यास करने का अवसर भी मिला.

पुंछ में हुआ धमाका और बदल गई पूरी जिंदगी

दिसंबर 2006 का वह दिन सोमन राणा के जीवन में हमेशा के लिए दर्ज हो गया. जम्मू-कश्मीर के पुंछ सेक्टर में सेना के सर्च ऑपरेशन के दौरान उनका पैर एक लैंडमाइन पर पड़ गया. विस्फोट इतना भीषण था कि डॉक्टरों को उनका दाहिना पैर घुटने के नीचे से काटना पड़ा. जिस खिलाड़ी ने बॉक्सिंग रिंग में देश के लिए पदक जीतने का सपना देखा था, उसके सामने अचानक जिंदगी की सबसे कठिन परीक्षा खड़ी हो गई. चोट सिर्फ शरीर पर नहीं थी, बल्कि सपनों पर भी लगी थी.

लंबे इलाज और पुनर्वास के बाद सोमन राणा पुणे स्थित आर्मी रिहैबिलिटेशन सेंटर पहुंचे. शारीरिक रूप से संभलने के बाद उन्होंने सेना में करीब दस वर्षों तक प्रशासनिक जिम्मेदारियां निभाईं. इस दौरान उन्हें अक्सर लगता था कि उनका खिलाड़ी वाला जीवन अब कभी वापस नहीं लौटेगा. बॉक्सिंग का अध्याय बंद हो चुका था और भविष्य धुंधला दिखाई देता था. लेकिन जिंदगी ने उनके लिए एक नया रास्ता पहले से तैयार कर रखा था.

सेना के एक फैसले ने फिर जगा दिया चैंपियन

साल 2017 सोमन राणा के जीवन में नया मोड़ लेकर आया. सेना के अधिकारी कर्नल गौरव दत्ता ने उन्हें पुणे स्थित आर्मी पैरालंपिक नोड से जुड़ने की सलाह दी. यही वह अवसर था जिसने उनके भीतर दबे खिलाड़ी को फिर से जगा दिया. उन्होंने पैरा शॉट पुट को चुना और महसूस किया कि बॉक्सिंग में वर्षों तक सीखी गई ताकत, शरीर का संतुलन और तकनीक इस खेल में भी उनकी सबसे बड़ी पूंजी बन सकती है.

F57 वर्ग में बैठकर शॉट पुट फेंकने की तकनीक सीखना आसान नहीं था, लेकिन सोमन ने इसे चुनौती की तरह स्वीकार किया. उन्होंने लगातार अभ्यास किया और देखते ही देखते राष्ट्रीय स्तर पर अपनी अलग पहचान बना ली.

अंतरराष्ट्रीय मंच पर लगातार बढ़ता गया कद

पैरा एथलेटिक्स में कदम रखने के बाद सोमन राणा का आत्मविश्वास लगातार बढ़ता गया. साल 2019 से उन्होंने अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत का प्रतिनिधित्व करना शुरू किया. 2021 में ट्यूनिस में आयोजित वर्ल्ड पैरा एथलेटिक्स ग्रां प्री में उन्होंने स्वर्ण पदक जीतकर दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा.

इसके बाद 2022 एशियन पैरा गेम्स में पुरुष F57 शॉट पुट स्पर्धा में रजत पदक हासिल किया. टोक्यो और पेरिस पैरालंपिक में भी उन्होंने भारत का प्रतिनिधित्व किया. हालांकि दोनों मौकों पर वह पदक जीतने से बेहद करीब रह गए, लेकिन उनकी मेहनत और प्रदर्शन ने यह साफ कर दिया कि वह दुनिया के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों में शामिल हो चुके हैं.

विश्व चैंपियनशिप का पदक बना सबसे बड़ा आत्मविश्वास

साल 2025 सोमन राणा के करियर का सबसे खास साल साबित हुआ. नई दिल्ली में आयोजित विश्व पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप में उन्होंने 14.69 मीटर का सीजन बेस्ट थ्रो करते हुए कांस्य पदक अपने नाम किया. यह उनके करियर का पहला विश्व चैंपियनशिप पदक था और इसी उपलब्धि ने उन्हें वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिलाई. इस प्रदर्शन के बाद उनके आत्मविश्वास में जबरदस्त बढ़ोतरी हुई और वह कॉमनवेल्थ गेम्स के लिए मजबूत दावेदार बनकर उभरे.

ग्लासगो में पूरा हुआ गोल्ड जीतने का सपना

कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में सोमन राणा शानदार फॉर्म के साथ पहुंचे. राष्ट्रीय पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप में स्वर्ण जीतने के बाद उन्होंने ग्लासगो में भी अपनी लय बरकरार रखी. पुरुष F57 शॉट पुट फाइनल में दूसरे प्रयास में उन्होंने 13.40 मीटर का बेहतरीन थ्रो किया. यह प्रदर्शन इतना शानदार था कि कोई भी प्रतिद्वंद्वी उनके करीब नहीं पहुंच सका और उन्होंने स्वर्ण पदक अपने नाम कर लिया. इस स्पर्धा में भारत के शुभम जुयाल ने रजत पदक जीतकर देश को डबल पोडियम की खुशी भी दी. यह जीत भारतीय पैरा एथलेटिक्स के लिए ऐतिहासिक उपलब्धियों में शामिल हो गई.

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