CWG 2026: कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय मुक्केबाजों का दमदार अभियान लगातार जारी है. प्रीति पवार और जैस्मिन लंबोरिया की स्वर्णिम सफलता के बाद अब जादूमणि सिंह मंदेंगबाम ने भी अपने शानदार प्रदर्शन से देश का सिर ऊंचा किया है. पुरुषों के 55 किलोग्राम वर्ग के फाइनल में उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के जाई डिक्सन के खिलाफ पूरी ताकत झोंक दी, लेकिन कड़े मुकाबले में उन्हें हार का सामना करना पड़ा. हालांकि गोल्ड मेडल उनसे दूर रह गया, लेकिन सिल्वर मेडल जीतकर उन्होंने यह साबित कर दिया कि भारतीय मुक्केबाजी का भविष्य बेहद मजबूत हाथों में है.
पूरे टूर्नामेंट में दिखाया दम
जादूमणि का ग्लास्गो में सफर किसी शानदार अभियान से कम नहीं रहा. उन्होंने अपने पहले मुकाबले में स्कॉटलैंड के एरॉन कलन को एकतरफा अंदाज में 5-0 से हराया. इसके बाद पाकिस्तान के सुमामा रहमान और जाम्बिया के म्वेंगो म्वाले के खिलाफ भी उसी आत्मविश्वास के साथ जीत दर्ज की. सेमीफाइनल में नामीबिया के फिलिप हाओसेब को हराकर उन्होंने फाइनल का टिकट हासिल किया. खिताबी मुकाबले में भी उन्होंने आखिरी राउंड तक जोरदार संघर्ष किया, लेकिन निर्णायकों का फैसला ऑस्ट्रेलियाई मुक्केबाज के पक्ष में गया और जादूमणि को रजत पदक से संतोष करना पड़ा.
ये फैसला बना करियर का सबसे बड़ा दांव
जादूमणि सिंह का यह सफर केवल रिंग के भीतर की लड़ाई नहीं, बल्कि खुद पर भरोसे की मिसाल भी है. पहले वह 50 किलोग्राम वर्ग में उतरते थे, लेकिन बेहतर संभावनाओं को देखते हुए उन्होंने अपना वजन बढ़ाकर 55 किलोग्राम वर्ग में खेलने का फैसला किया. इस बदलाव को लेकर उन्हें काफी आलोचनाओं का सामना करना पड़ा. यहां तक कि उन्होंने सार्वजनिक तौर पर यह भी कहा था कि यदि इस नए वर्ग में सफल नहीं हुए तो बॉक्सिंग छोड़ देंगे. लेकिन कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में सिल्वर मेडल जीतकर उन्होंने अपने फैसले को सही साबित कर दिया और आलोचकों को करारा जवाब दिया.
500 रुपये के इनाम ने बदल दी जिंदगी
आज अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम रोशन करने वाले जादूमणि कभी फुटबॉल खिलाड़ी बनने का सपना देखते थे. उनके चाचा की सलाह पर उन्होंने बॉक्सिंग की दुनिया में कदम रखा और यहीं से उनकी किस्मत बदल गई. साल 2016 में इंफाल में महज 28 किलो वजन के बावजूद उन्होंने 36 किलो वर्ग में शानदार प्रदर्शन किया. उनके खेल से प्रभावित होकर भारत की दिग्गज मुक्केबाज मैरी कॉम और एल. सरिता देवी ने उन्हें 500-500 रुपये का इनाम दिया था. वही छोटी-सी सराहना उनके लिए सबसे बड़ी प्रेरणा बनी और उन्होंने बॉक्सिंग को अपना करियर बना लिया. आज कॉमनवेल्थ गेम्स का सिल्वर मेडल उस सफर की सबसे बड़ी उपलब्धियों में शामिल हो गया है.
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