सूरज में हुआ भीषण विस्फोट! पृथ्वी की ओर बढ़ रहा भयानक सौर तूफान, कितना बड़ा है खतरा?

Solar Flares: अंतरिक्ष में होने वाली गतिविधियां केवल वैज्ञानिकों की जिज्ञासा तक सीमित नहीं रहतीं, बल्कि कई बार उनका असर पृथ्वी पर मौजूद संचार व्यवस्था और उपग्रहों तक भी पहुंचता है. हाल ही में सूर्य पर हुए एक शक्तिशाली विस्फोट ने दुनियाभर की स्पेस एजेंसियों को सतर्क कर दिया है.

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Solar Flares: अंतरिक्ष में होने वाली गतिविधियां केवल वैज्ञानिकों की जिज्ञासा तक सीमित नहीं रहतीं, बल्कि कई बार उनका असर पृथ्वी पर मौजूद संचार व्यवस्था और उपग्रहों तक भी पहुंचता है. हाल ही में सूर्य पर हुए एक शक्तिशाली विस्फोट ने दुनियाभर की स्पेस एजेंसियों को सतर्क कर दिया है. वैज्ञानिकों के अनुसार, इस विस्फोट के बाद निकला विशाल कोरोनल मास इजेक्शन (CME) पृथ्वी की दिशा में बढ़ रहा है. हालांकि इससे आम लोगों को सीधे खतरे की आशंका नहीं है, लेकिन संचार और अंतरिक्ष तकनीक पर इसका प्रभाव पड़ सकता है.

सूर्य पर हुआ शक्तिशाली विस्फोट

वैज्ञानिकों के मुताबिक, 30 जून को सूर्य के एक्टिव रीजन 4479 से X1.1 श्रेणी का एक शक्तिशाली सोलर फ्लेयर (सौर ज्वाला) निकला. यह विस्फोट सूर्य के उस हिस्से से हुआ, जिसका रुख पृथ्वी की ओर था. विस्फोट के बाद निकलने वाली तीव्र एक्स-रे तरंगें लगभग आठ मिनट में पृथ्वी तक पहुंच गईं, जिससे उत्तरी अमेरिका के कुछ हिस्सों में हाई-फ्रीक्वेंसी रेडियो सेवाएं अस्थायी रूप से प्रभावित हुईं.

क्या है कोरोनल मास इजेक्शन (CME)?

सोलर फ्लेयर के साथ कई बार सूर्य से प्लाज्मा और चुंबकीय ऊर्जा का विशाल बादल भी अंतरिक्ष में निकलता है, जिसे कोरोनल मास इजेक्शन (CME) कहा जाता है. इसमें बड़ी मात्रा में विद्युत आवेशित (चार्ज्ड) कण होते हैं, जो तेज गति से अंतरिक्ष में आगे बढ़ते हैं. यदि इनका मार्ग पृथ्वी से टकराता है, तो जियोमैग्नेटिक स्टॉर्म यानी भू-चुंबकीय तूफान उत्पन्न हो सकता है.

NOAA ने जारी की जियोमैग्नेटिक स्टॉर्म की चेतावनी

अमेरिका के नेशनल ओशियनिक एंड एटमॉस्फेरिक एडमिनिस्ट्रेशन (NOAA) के स्पेस वेदर प्रेडिक्शन सेंटर ने 3 जुलाई (भारतीय समयानुसार 4 जुलाई) के लिए जियोमैग्नेटिक स्टॉर्म की चेतावनी जारी की है. वैज्ञानिकों का अनुमान है कि CME का कुछ हिस्सा पृथ्वी के मैग्नेटिक फील्ड से टकरा सकता है, जिससे अंतरिक्ष मौसम (Space Weather) में बदलाव देखने को मिल सकता है.

क्या पृथ्वी पर पड़ेगा इसका असर?

विशेषज्ञों का कहना है कि इस सौर गतिविधि से पृथ्वी पर रहने वाले लोगों के लिए किसी बड़े खतरे की आशंका नहीं है. हालांकि भू-चुंबकीय तूफान की स्थिति बनने पर हाई-फ्रीक्वेंसी रेडियो संचार, जीपीएस नेविगेशन सिस्टम और कुछ सैटेलाइट सेवाएं अस्थायी रूप से प्रभावित हो सकती हैं. बिजली ग्रिड और अंतरिक्ष में मौजूद उपकरणों पर भी इसका सीमित प्रभाव पड़ने की संभावना रहती है.

नॉर्दर्न लाइट्स दिखने की बढ़ सकती है संभावना

जब चार्ज्ड कण पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र से टकराते हैं, तो ध्रुवीय क्षेत्रों के आसमान में रंग-बिरंगी रोशनी दिखाई देती है, जिसे ऑरोरा या नॉर्दर्न लाइट्स कहा जाता है. वैज्ञानिकों का मानना है कि यदि CME का प्रभाव अनुमान के अनुरूप रहा, तो अमेरिका और अन्य उत्तरी क्षेत्रों में यह प्राकृतिक नजारा देखने को मिल सकता है. हालांकि यह पूरी तरह तूफान की दिशा और तीव्रता पर निर्भर करेगा.

आखिर क्या होता है सौर तूफान?

सौर तूफान सूर्य की सतह पर होने वाले शक्तिशाली चुंबकीय विस्फोटों का परिणाम होता है. इन विस्फोटों से भारी मात्रा में ऊर्जा, एक्स-रे और चार्ज्ड कण अंतरिक्ष में फैलते हैं. जब ये कण पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र से टकराते हैं, तो इसे जियोमैग्नेटिक स्टॉर्म कहा जाता है. यह घटना अंतरिक्ष मौसम का महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जाती है और इसका असर मुख्य रूप से संचार एवं उपग्रह प्रणालियों पर पड़ता है.

इसरो भी रख रहा है नजर

भारत के लिए भी यह गतिविधि महत्वपूर्ण है. भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) अपने 50 से अधिक सक्रिय उपग्रहों की लगातार निगरानी कर रहा है, ताकि किसी भी संभावित अंतरिक्ष मौसम के प्रभाव का समय रहते आकलन किया जा सके. उपग्रहों की सुरक्षा और संचार सेवाओं को सुचारु बनाए रखने के लिए ऐसी घटनाओं पर लगातार नजर रखी जाती है.

घबराने की नहीं, सतर्क रहने की जरूरत

वैज्ञानिकों का कहना है कि इस तरह की सौर घटनाएं समय-समय पर होती रहती हैं और इनके प्रभाव का पहले से अनुमान लगाने के लिए दुनिया भर की स्पेस एजेंसियां लगातार निगरानी करती हैं. फिलहाल आम लोगों को इससे घबराने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि संभावित प्रभाव मुख्य रूप से अंतरिक्ष और संचार प्रणालियों तक सीमित रहने की संभावना है.

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