कौन है नन्हा हीरो श्रवण सिंह? राष्ट्रपति ने किया सम्मानित, ऑपरेशन सिंदूर में ऐसे की थी सेना की मदद

    पंजाब के फिरोजपुर जिले के सीमावर्ती गांव चक तरां वाली के युवा नायक श्रवण सिंह को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार 2025 से सम्मानित किया गया है.

    Shravan Singh recived National Children s Award He helped the Army in Operation Sindoor
    Image Source: Social Media

    पंजाब के फिरोजपुर जिले के सीमावर्ती गांव चक तरां वाली के युवा नायक श्रवण सिंह को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार 2025 से सम्मानित किया गया है. यह सम्मान उन्हें उनकी अद्वितीय साहसिकता और निस्वार्थ सेवा के लिए दिया गया. 21 मई 2025 को दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित एक समारोह में उन्हें यह प्रतिष्ठित पुरस्कार प्राप्त हुआ. इस पुरस्कार से न केवल श्रवण सिंह, बल्कि पूरे पंजाब और विशेष रूप से पंजाबी समुदाय को गर्व महसूस हुआ है. मुख्यमंत्री भगवंत मान ने भी इस सम्मान को पंजाबियों के लिए गर्व का पल बताया है.

    ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान श्रवण सिंह की असाधारण भूमिका

    मई 2025 में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान श्रवण सिंह ने अपनी बहादुरी और सूझबूझ से सभी को चौंका दिया था. इस ऑपरेशन के दौरान भारत-पाकिस्तान सीमा पर अत्यधिक तनावपूर्ण स्थितियां थीं, लेकिन श्रवण सिंह ने इस चुनौतीपूर्ण माहौल में भारतीय सैनिकों की मदद की. उन्होंने न केवल सैनिकों के लिए आवश्यक सामग्री पहुंचाई, बल्कि उनकी सेवा और साहस ने उन्हें पहचान दिलाई.

    सैनिकों के लिए आवश्यक सामग्री पहुंचाने का साहसिक कार्य

    वर्तमान में बढ़ते हुए तनाव के कारण दुश्मन के ड्रोनों द्वारा बार-बार सीमा पार करने की घटनाएं हो रही थीं. बावजूद इसके, श्रवण सिंह ने सैनिकों की मदद के लिए हर दिन अग्रिम चौकियों तक जाने का साहस दिखाया. वे सैनिकों के लिए पानी, दूध, लस्सी, चाय और बर्फ जैसी जरूरी सामग्री पहुंचाते थे. यह काम उन्होंने बहुत जोखिम उठाकर किया, लेकिन उनका मानना था कि ये सभी सैनिकों के लिए जरूरी हैं और उनकी मदद से सैनिकों का मनोबल बना रहेगा.

    सेना द्वारा सम्मान और शिक्षा की व्यवस्था

    श्रवण सिंह की देशभक्ति और साहस को देखते हुए भारतीय सेना ने उन्हें पहले ही सम्मानित किया था और उनके द्वारा किए गए काम की सराहना की थी. इसके अलावा, सेना की तरफ से उनकी पढ़ाई भी करवाई जा रही है, ताकि वे आगे चलकर और भी बड़ा योगदान दे सकें. उनकी यह कहानी न केवल एक प्रेरणा है, बल्कि यह दिखाती है कि युवा पीढ़ी में देश सेवा का जज्बा कितना मजबूत है.

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