ट्रंप को समर्थन देकर फंस गए शहबाज-मुनीर, सड़कों पर युद्ध जैसा माहौल! अनिश्चितकाल के लिए इंटरनेट बंद

Unrest In Pakistan: पाकिस्तान के कई प्रमुख शहरों, खासकर लाहौर, इस्लामाबाद और रावलपिंडी में इन दिनों हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं. कट्टरपंथी धार्मिक संगठन तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान (TLP) के आह्वान पर हजारों की संख्या में लोग सड़कों पर उतर आए हैं.

Shahbaz-Munir trapped by supporting Trump war-like atmosphere on the streets
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Unrest In Pakistan: पाकिस्तान के कई प्रमुख शहरों, खासकर लाहौर, इस्लामाबाद और रावलपिंडी में इन दिनों हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं. कट्टरपंथी धार्मिक संगठन तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान (TLP) के आह्वान पर हजारों की संख्या में लोग सड़कों पर उतर आए हैं. विरोध का मुख्य कारण है अमेरिका और इज़रायल के प्रति पाकिस्तान सरकार के हालिया रुख, जिसे लेकर टीएलपी और उसके समर्थकों में भारी नाराज़गी देखी जा रही है.

सरकार ने प्रदर्शन पर काबू पाने के लिए कई सख्त कदम उठाए हैं, जिसमें मोबाइल इंटरनेट सेवाओं का बंद होना, धारा 144 का लागू किया जाना, और राजधानी इस्लामाबाद की ओर जाने वाले सभी प्रमुख मार्गों को सील किया जाना शामिल है. इन तमाम उपायों के बावजूद प्रदर्शनकारियों की भीड़ लगातार बढ़ती जा रही है, और देश में गंभीर राजनीतिक और सामाजिक संकट की स्थिति बन रही है.

हिंसा की चपेट में लाहौर और अन्य शहर

प्रदर्शन की शुरुआत लाहौर से हुई, जहां टीएलपी के कार्यकर्ता भारी संख्या में एकत्रित हुए और राजधानी की ओर कूच करने लगे. हालात उस समय बेकाबू हो गए जब पुलिस ने उन्हें रोकने की कोशिश की. इसके बाद दोनों पक्षों के बीच झड़पें शुरू हो गईं, जिसमें एक टीएलपी कार्यकर्ता और एक पुलिसकर्मी की मौत हो गई, जबकि कई लोग घायल हुए हैं.

पुलिस को भीड़ नियंत्रित करने के लिए वॉटर कैनन, आंसू गैस, और साउंड ग्रेनेड का इस्तेमाल करना पड़ा. वहीं, प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर पत्थरबाजी की और सरकारी वाहनों को नुकसान पहुंचाया.

प्रदर्शन के पीछे की वजह

TLP का यह विरोध प्रदर्शन मुख्यतः इज़रायल और अमेरिका की नीतियों के खिलाफ है. संगठन ने पहले ही घोषणा कर दी थी कि वह 10 अक्टूबर को इस्लामाबाद स्थित अमेरिकी दूतावास के सामने प्रदर्शन करेगा. इसके लिए कार्यकर्ताओं का एक बड़ा मार्च राजधानी की ओर बढ़ रहा है.

इससे पहले, पंजाब पुलिस ने टीएलपी के प्रमुख साद हुसैन रिजवी को गिरफ्तार करने के लिए संगठन के मुख्यालय पर छापा मारा था. संगठन ने आरोप लगाया कि इस छापेमारी के दौरान पुलिस की कार्रवाई में उनके एक कार्यकर्ता की मौत हुई, और करीब 20 अन्य घायल हुए हैं. इसके बाद मामला और अधिक भड़क गया.

इंटरनेट बंद, कानून-व्यवस्था के सख्त कदम

पाकिस्तान सरकार ने स्थिति को नियंत्रण में लाने के लिए कई आपात कदम उठाए हैं. इस्लामाबाद और रावलपिंडी में अनिश्चितकाल के लिए मोबाइल इंटरनेट सेवा बंद कर दी गई है. रावलपिंडी में धारा 144 लागू कर दी गई है, जिससे लोगों के एकत्रित होने पर रोक है.

इस्लामाबाद जाने वाले सभी रास्तों को सील किया गया है ताकि मार्च को राजधानी में प्रवेश से रोका जा सके. पाकिस्तानी गृह मंत्रालय की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि “कानून-व्यवस्था को बिगाड़ने की किसी भी कोशिश को सख्ती से रोका जाएगा”.

अमेरिका और गाजा विवाद के चलते असंतोष

प्रदर्शन का एक और बड़ा कारण है पाकिस्तान का हालिया राजनयिक रुख. प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने अमेरिका यात्रा के दौरान डोनाल्ड ट्रंप द्वारा प्रस्तावित गाजा शांति योजना का समर्थन किया था. इस फैसले से कट्टरपंथी संगठनों और कुछ राजनीतिक दलों में असंतोष पैदा हुआ.

हालांकि, बाद में पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार ने यह कहकर स्थिति संभालने की कोशिश की कि पाकिस्तान को जो पीस प्लान प्रस्तुत किया गया था, वह अरब देशों से अलग था, और पाकिस्तान ने उसे पूरी तरह स्वीकार नहीं किया. लेकिन तब तक प्रदर्शन की चिंगारी भड़क चुकी थी और टीएलपी ने सरकार पर मुस्लिम दुनिया के हितों के साथ समझौता करने का आरोप लगाते हुए देशव्यापी विरोध की रणनीति अपना ली.

प्रदर्शन के पीछे राजनीतिक मकसद?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि TLP इस विरोध प्रदर्शन के माध्यम से न सिर्फ सरकार पर दबाव बनाना, बल्कि खुद को एक बार फिर राजनीतिक ध्रुवीकरण का केंद्र बनाने की कोशिश कर रहा है. पार्टी पहले भी ऐसे आंदोलनों से सरकार को घुटनों पर ला चुकी है.

विशेषज्ञों का कहना है कि पाकिस्तान की मौजूदा आर्थिक और राजनीतिक स्थिति बेहद नाजुक है, और ऐसे समय में इस तरह के आंदोलन सरकार के लिए नई चुनौती पैदा कर सकते हैं. एक तरफ आर्थिक संकट, दूसरी ओर राजनीतिक अस्थिरता, और अब इस तरह के धार्मिक आंदोलन, यह सब मिलकर शहबाज शरीफ सरकार के लिए गंभीर खतरे बन सकते हैं.

अंतरराष्ट्रीय नजरें पाकिस्तान पर

पाकिस्तान में इंटरनेट बंद करने और विरोध प्रदर्शन पर की जा रही सख्ती को लेकर मानवाधिकार संगठनों और अंतरराष्ट्रीय मीडिया की नजरें भी इस घटनाक्रम पर टिकी हैं. कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक, यूएन और एमनेस्टी इंटरनेशनल जैसे संगठनों ने हालात पर चिंता जताई है और पाकिस्तान से संयम बरतने की अपील की है.

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