बूंद-बूंद को तरस रहा ईरान, राजधानी करनी पड़ सकती है खाली, सांसद महिलाओं को बताया सूखे का जिम्मेदार

इस्लामिक गणराज्य ईरान इस समय अपने इतिहास के सबसे गंभीर सूखे में से एक से जूझ रहा है. देश के ज्यादातर हिस्सों में बारिश न के बराबर हुई है और जलाशयों का जलस्तर खतरनाक रूप से नीचे चला गया है.

Severe drought in Islamic country Iran Women responsible
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तेहरान: इस्लामिक गणराज्य ईरान इस समय अपने इतिहास के सबसे गंभीर सूखे में से एक से जूझ रहा है. देश के ज्यादातर हिस्सों में बारिश न के बराबर हुई है और जलाशयों का जलस्तर खतरनाक रूप से नीचे चला गया है. स्थिति इतनी विकट हो चुकी है कि राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने चेतावनी दी है कि अगर जल्द हालात नहीं सुधरे तो राजधानी तेहरान को आंशिक या पूरी तरह खाली करना पड़ सकता है.

बीबीसी फारसी की रिपोर्ट के मुताबिक, राष्ट्रपति पेजेशकियन ने रविवार को एक आपात बैठक के दौरान कहा कि देश के पास अब पानी वितरण को सीमित करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है. उन्होंने कहा, "अगर पानी की राशनिंग कारगर नहीं होती, तो हमें तेहरान से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर भेजने की तैयारी करनी होगी."

हालांकि, उनकी इस टिप्पणी ने ईरानी मीडिया और सोशल प्लेटफॉर्म्स पर हलचल मचा दी है. कुछ नागरिकों ने राष्ट्रपति के बयान को “वास्तविकता की चेतावनी” बताया, जबकि कई नेताओं ने इसे “घबराहट फैलाने वाला बयान” करार दिया. तेहरान के पूर्व मेयर गुलाम हुसैन करबास्ची ने प्रतिक्रिया दी, "राजधानी को खाली करने की बात व्यावहारिक नहीं है. हमें समाधान ढूंढने की जरूरत है, न कि पलायन की."

जलाशयों में सिर्फ 8% पानी बचा

ईरान के मौसम विज्ञान संगठन के मुताबिक, देशभर में पिछले एक वर्ष में 92% तक कम बारिश हुई है. राजधानी के मुख्य जल स्रोत लातियन बांध और करज बांध लगभग सूख चुके हैं.

लातियन बांध के प्रभारी अधिकारी ने बताया कि अब इसमें अपनी क्षमता का सिर्फ 10% से भी कम पानी बचा है. वहीं करज बांध के निदेशक मोहम्मद-अली मोअल्लेम ने कहा, "हमारे पास कुल पानी का सिर्फ आठ प्रतिशत हिस्सा बचा है. इसका अधिकांश भाग मृत जल (Dead Water) है, जो उपयोग के लायक नहीं है."

उन्होंने यह भी बताया कि ईरान के उत्तरी और पश्चिमी क्षेत्रों में भूजल स्तर भी ऐतिहासिक रूप से नीचे गिर गया है.

तेहरान के लोग खरीद रहे हैं पानी

राजधानी के कई इलाकों में नल सूख चुके हैं. स्थानीय लोगों को अब टैंकर और बोतलबंद पानी खरीदने पर मजबूर होना पड़ रहा है. बीबीसी फारसी से बातचीत में तेहरान की एक महिला ने कहा, "हमने अब घर में पानी के ड्रम भरना शुरू कर दिया है. शौचालय और रसोई के लिए हमें टैंकर से पानी खरीदना पड़ रहा है."

सोशल मीडिया पर भी संकट की तस्वीरें वायरल हैं. लोकप्रिय रैपर वफा अहमदपूर ने एक वीडियो पोस्ट करते हुए लिखा, "चार घंटे से नल में पानी नहीं आ रहा. अब बाथरूम जाने के लिए भी बोतलबंद पानी का इस्तेमाल कर रहा हूं."

ऊर्जा मंत्री ने दी और सख्त चेतावनी

ईरान के ऊर्जा मंत्री अब्बास अली अबादी ने स्पष्ट कहा कि सरकार को अब कुछ इलाकों में रात के समय पानी की सप्लाई बंद करनी पड़ सकती है. उन्होंने कहा, "आने वाले हफ्तों में कुछ रातों में हमें पानी का प्रवाह शून्य तक करना पड़ सकता है. यह आवश्यक कदम है ताकि मुख्य आपूर्ति बची रह सके."

सरकार ने पानी की बर्बादी रोकने के लिए नया नियम लागू करने की भी घोषणा की है. इसके तहत जो परिवार या व्यवसाय तय सीमा से ज्यादा पानी खर्च करेंगे, उन पर भारी जुर्माना लगाया जाएगा.

सूखे का धार्मिक विवाद: महिलाओं पर ठीकरा

इस संकट के बीच ईरान की विशेषज्ञ सभा के एक वरिष्ठ सदस्य और सांसद मोहसिन अराकी ने विवादित बयान देकर नया विवाद खड़ा कर दिया है. उन्होंने दावा किया, "महिलाओं के हिजाब न पहनने की वजह से देश पर अल्लाह का कोप हुआ है और बारिश बंद हो गई है."

उन्होंने कहा कि यह सूखा “ईश्वर की चेतावनी” है और सरकार ने “धार्मिक अनुशासन” लागू करने में ढिलाई बरती है. अराकी के बयान की देश और विदेश में तीखी आलोचना हो रही है. सोशल मीडिया पर कई लोगों ने लिखा कि धार्मिक बहाने बनाकर सरकार मूल समस्या जल प्रबंधन और भ्रष्टाचार से ध्यान हटाने की कोशिश कर रही है.

युद्ध और बुनियादी ढांचे की तबाही ने बढ़ाई मुश्किल

ईरानी ऊर्जा मंत्रालय के सूत्रों ने बताया कि देश के पुराने जल संग्रहण ढांचे को हालिया संघर्षों में नुकसान पहुंचा है. मंत्री अब्बास अबादी ने कहा कि इजरायल के साथ जून महीने में हुए संघर्ष के दौरान तेहरान के ताजरिश इलाके में बने जलाशयों और नहरों को क्षति पहुंची थी.

वहां हुए मिसाइल हमलों से पानी के पाइपलाइन सिस्टम में दरारें आईं, जिससे जल रिसाव और भंडारण क्षमता दोनों घट गई. अधिकारियों का कहना है कि राजधानी की जनसंख्या बढ़ने और पुरानी पाइपलाइन प्रणाली के कारण जल संकट और गंभीर हुआ है.

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