लश्कर-ए-तैयबा के वरिष्ठ कैडर कारी सईद अब्दुल अजीज की शनिवार को इस्लामाबाद की क्यूबा मस्जिद में संदिग्ध हालात में मौत हो गई. बताया जा रहा है कि कारी सईद ने किसी अज्ञात जगह पर खाना खाया था. इसके बाद वह नमाज पढ़ने के लिए मस्जिद पहुंचा. मस्जिद के गेट पर पहुंचते ही वह अचानक जमीन पर गिर पड़ा और उसकी मौत हो गई.
कारी सईद लश्कर-ए-तैयबा में उस विभाग की जिम्मेदारी संभालता था, जो जम्मू-कश्मीर में मुठभेड़ों में मारे गए लश्कर के आतंकियों के परिवारों से संपर्क और उनकी मदद का काम देखता था. उसकी मौत की वजह अभी साफ नहीं हुई है.
नमाज पढ़ने पहुंचा था कारी सईद
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, सीसीटीवी फुटेज में कारी सईद उर्फ अब्दुल अजीज इस्लामाबाद की क्यूबा मस्जिद में बैग लेकर पहुंचता दिखाई दे रहा है. वहां उसने अपना बैग एक साथी को दिया और नमाज से पहले वुजू किया.
वुजू करने के बाद उसने बैग वापस लिया और सीढ़ियों से ऊपर मस्जिद के मुख्य हिस्से में जाने लगा. जैसे ही वह चप्पल उतारने के लिए बैठा, अचानक जमीन पर गिर पड़ा.
पास मौजूद लश्कर-ए-तैयबा के लोगों ने उसे उठाकर एक जगह पहुंचाया. सांस रुकने के बाद उसे सीपीआर देने की कोशिश की गई, लेकिन उसे होश नहीं आया. बाद में उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया.
हाफिज सईद के साथ जुड़ा था कारी सईद
सूत्रों के अनुसार, कारी सईद साल 1990 से आतंकी हाफिज सईद के साथ जुड़ा हुआ था और उसका करीबी कमांडर था. साल 2017 तक वह सक्रिय आतंकी के तौर पर काम करता रहा. उसका मुख्य काम लश्कर-ए-तैयबा के लिए आतंकियों की भर्ती करना था.
बाद में उसे संगठन के प्रशासनिक कामों में लगा दिया गया. इसके तहत दक्षिण पंजाब के मुल्तान, बहावलपुर और डेरा गाजी खान से जुड़े उन आतंकियों के परिवारों तक हर महीने आर्थिक मदद पहुंचाने का काम करता था, जो भारत में मारे गए थे. इसके अलावा इन जिलों से जुड़े आतंकियों की सूची तैयार करने की जिम्मेदारी भी उसके पास थी.
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