सावन का तीसरा मंगला गौरी व्रत आज, सुहागिन महिलाएं जरूर चढ़ाएं ये चीजें, माता बरसाएंगी सुख-समृद्धि

Sawan Third Mangala Gauri Vrat 2026: सावन के तीसरे मंगलवार को मंगला गौरी की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है. सुहागिन महिलाएं अखंड सौभाग्य और वैवाहिक सुख की कामना से व्रत रखती हैं, जबकि अविवाहित कन्याएं मनचाहे जीवनसाथी के लिए माता गौरी की आराधना करती हैं. जानें पूजा विधि, भोग और 16 श्रृंगार का महत्व.

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Mangala Gauri Vrat 2026: सावन का महीना भगवान शिव की भक्ति के साथ माता पार्वती की आराधना के लिए भी विशेष माना जाता है. इस पूरे महीने मंगलवार का दिन देवी उपासना के लिए महत्वपूर्ण होता है और इसी दिन सुहागिन महिलाएं पति की लंबी उम्र, वैवाहिक सुख और परिवार की खुशहाली की कामना से मंगला गौरी व्रत रखती हैं. आज सावन का तीसरा मंगला गौरी व्रत है, इसलिए मंदिरों और घरों में माता गौरी की पूजा-अर्चना का विशेष माहौल रहेगा.

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मंगला गौरी व्रत करने से दांपत्य जीवन में सुख-शांति बनी रहती है और माता पार्वती का आशीर्वाद प्राप्त होता है. वहीं अविवाहित कन्याएं अच्छे और मनचाहे जीवनसाथी की कामना से यह व्रत रखती हैं. पूजा के दौरान माता को सुहाग सामग्री अर्पित करने और विधि-विधान से आराधना करने की परंपरा है. आइए जानते हैं आज मंगला गौरी व्रत की पूजा किस तरह करें और माता को कौन सा भोग लगाना शुभ माना जाता है.

सावन का तीसरा मंगला गौरी व्रत क्यों है खास?

सावन के प्रत्येक मंगलवार को मंगला गौरी व्रत रखने की परंपरा है. इस दिन माता पार्वती के मंगला गौरी स्वरूप की पूजा की जाती है. धार्मिक मान्यताओं में माता गौरी को सौभाग्य, दांपत्य सुख और समृद्धि से जोड़ा गया है. यही कारण है कि सुहागिन महिलाओं के लिए इस व्रत का महत्व और भी बढ़ जाता है.

मंगला गौरी की पूजा में माता पार्वती के साथ भगवान शिव की आराधना भी की जाती है. मान्यता है कि श्रद्धा के साथ पूजा करने से पति-पत्नी के बीच प्रेम और आपसी समझ मजबूत होती है तथा परिवार में सुख-शांति का वातावरण बना रहता है.

मंगला गौरी व्रत की पूजा विधि

व्रत रखने वाली महिलाओं को सुबह स्नान आदि से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करने चाहिए. इसके बाद पूजा स्थल को साफ करके वहां चौकी स्थापित करें और उस पर लाल या पीले रंग का कपड़ा बिछाएं. चौकी पर माता गौरी और भगवान शिव की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें.

पूजा की शुरुआत भगवान गणेश के स्मरण और पूजन से करें. इसके बाद माता गौरी और भगवान शिव को जल अर्पित करें. माता पार्वती को लाल चुनरी, सिंदूर, कुमकुम, अक्षत और लाल फूल अर्पित किए जा सकते हैं. सुहागिन महिलाएं माता को चूड़ी, बिंदी, मेहंदी और अन्य सुहाग सामग्री भी चढ़ा सकती हैं.

भगवान शिव को जल और बेलपत्र अर्पित करने के बाद माता गौरी का ध्यान करें. इस दौरान मंगला गौरी व्रत कथा का पाठ या श्रवण करना शुभ माना जाता है. पूजा पूरी होने के बाद माता की आरती करें और अपने पति, परिवार तथा संतान के सुख-स्वास्थ्य की कामना करें.

माता मंगला गौरी को कौन सा भोग लगाएं?

माता गौरी की पूजा में सात्विक भोग का विशेष महत्व माना जाता है. घर पर बने लड्डू, खीर या हलवे का भोग माता को अर्पित किया जा सकता है. इसके साथ केले, सेब, नारियल और अन्य मौसमी फलों को भी प्रसाद के रूप में चढ़ाया जा सकता है. भोग बनाते समय साफ-सफाई और सात्विकता का विशेष ध्यान रखना चाहिए. पूजा के बाद भोग को प्रसाद के रूप में परिवार के सदस्यों में बांटना शुभ माना जाता है.

16 श्रृंगार से जुड़ी है विशेष मान्यता

मंगला गौरी की पूजा में 16 श्रृंगार की सामग्री अर्पित करने की परंपरा कई क्षेत्रों में देखने को मिलती है. सुहागिन महिलाएं माता को सिंदूर, बिंदी, चूड़ियां, मेहंदी, काजल, कंघी, चुनरी और अन्य श्रृंगार सामग्री अर्पित करती हैं. धार्मिक मान्यता के अनुसार, माता गौरी को सुहाग सामग्री चढ़ाने से वैवाहिक जीवन के लिए देवी का आशीर्वाद प्राप्त होता है. महिलाएं माता के सामने अपने पति की लंबी उम्र, दांपत्य जीवन में प्रेम और परिवार की सुख-समृद्धि की प्रार्थना करती हैं.

अविवाहित कन्याओं के लिए भी महत्वपूर्ण है व्रत

मंगला गौरी व्रत केवल सुहागिन महिलाओं तक सीमित नहीं माना जाता. अविवाहित कन्याएं भी अच्छे और योग्य जीवनसाथी की कामना से माता गौरी की पूजा कर सकती हैं. धार्मिक मान्यता है कि माता पार्वती ने भी भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या की थी. इसी वजह से कुंवारी कन्याओं के बीच गौरी पूजा को विशेष महत्व दिया जाता है.

व्रत और पूजा के दौरान मन को शांत रखकर माता गौरी का ध्यान करना और अपनी मनोकामना प्रकट करना शुभ माना जाता है. श्रद्धा और विश्वास के साथ की गई आराधना को देवी कृपा प्राप्त करने का माध्यम माना गया है.

पूजा में रखें शुद्धता और श्रद्धा का ध्यान

मंगला गौरी व्रत के दौरान पूजा स्थल और पूजन सामग्री की स्वच्छता का ध्यान रखना चाहिए. माता को अर्पित की जाने वाली सामग्री ताजा और साफ होनी चाहिए. पूजा के दौरान मन को शांत रखते हुए माता गौरी और भगवान शिव का स्मरण करना चाहिए.

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार व्रत का वास्तविक उद्देश्य केवल नियमों का पालन करना नहीं, बल्कि श्रद्धा, संयम और सकारात्मक भावना के साथ देवी-देवताओं की आराधना करना है. इसलिए अपनी क्षमता और स्वास्थ्य के अनुसार ही व्रत रखें और किसी विशेष स्वास्थ्य स्थिति में कठोर उपवास करने से पहले विशेषज्ञ की सलाह लेना उचित है.

माता गौरी से सुख-समृद्धि की करें कामना

सावन के तीसरे मंगला गौरी व्रत पर माता पार्वती और भगवान शिव की आराधना कर श्रद्धालु दांपत्य जीवन में प्रेम, परिवार में शांति और जीवन में सुख-समृद्धि की कामना करते हैं. माता को सुहाग सामग्री और सात्विक भोग अर्पित कर विधि-विधान से पूजा करने की परंपरा इस पर्व को और खास बनाती है.

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सच्ची श्रद्धा और भक्ति से माता गौरी का स्मरण करने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा आती है. यही वजह है कि सावन के मंगलवार को मंगला गौरी की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है.

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