प्रेम चोपड़ा ने याद किए सरदार सिंह सूरी, 7वीं पुण्यतिथि पर उमड़ी श्रद्धा और सेवा की भावना

चार बंगला गुरुद्वारा साहिब के संस्थापक सरदार सिंह सूरी की 7वीं पुण्यतिथि श्रद्धा, भक्ति और सेवा भाव के साथ मनाई गई. इस अवसर पर हजारों श्रद्धालु भजन-कीर्तन, अरदास और विशाल लंगर में शामिल होकर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि देने पहुंचे.

Sardar Singh Suri Remembered on 7th Death Anniversary Prem Chopra Pays Tribute
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मुंबई: चार बंगला गुरुद्वारा साहिब के संस्थापक सरदार सिंह सूरी की 7वीं पुण्यतिथि श्रद्धा, भक्ति और सेवा भाव के साथ मनाई गई. इस अवसर पर हजारों श्रद्धालु भजन-कीर्तन, अरदास और विशाल लंगर में शामिल होकर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि देने पहुंचे. वरिष्ठ अभिनेता प्रेम चोपड़ा ने भी उन्हें याद करते हुए भावुक शब्दों में श्रद्धांजलि अर्पित की.

प्रेम चोपड़ा ने कहा, “सरदार सिंह सूरी जी सिर्फ एक नेक इंसान ही नहीं थे, बल्कि ऐसे व्यक्तित्व थे जिन्होंने कई लोगों की जिंदगी को दिशा दी. उनके साथ मैंने अपनी पहली फिल्म में हीरो के रूप में काम किया था, जिसे मैं आज तक नहीं भूल पाया.”

सरदार सिंह सूरी का जीवन संघर्ष और सेवा की प्रेरक मिसाल है. विभाजन के बाद रावलपिंडी से भारत आकर उन्होंने मुंबई में टैक्सी चालक के रूप में अपने जीवन की शुरुआत की, लेकिन उनका असली उद्देश्य समाज सेवा बन गया. 1967 में एक छोटे से 10×10 ढांचे से शुरू हुआ यह गुरुद्वारा आज हजारों लोगों की आस्था और सेवा का केंद्र बन चुका है.

उन्होंने “ऐ धरती पंजाब दी” फिल्म के माध्यम से सिनेमा में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया. इस फिल्म में  प्रेम चोपड़ा , जबीन जलील, निम्मी और मदन पूरी जैसे कलाकार थे, जबकि मोहम्मद रफ़ी और महेंद्र कपूर की आवाज़ ने फिल्म को खास बनाया. इस फिल्म को उस समय कुल 9 अवॉर्ड मिले थे, जो तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू द्वारा प्रदान किए गए. प्रेम चोपड़ा, जबीन जलील, मोहम्मद रफ़ी, महेंद्र कपूर, निर्माता सरदार सिंह सूरी और गीतकार नक्श लायलपुरी को सम्मानित किया गया. हालांकि विडंबना यह रही कि सरदार सिंह सूरी उस समय आर्थिक तंगी के कारण स्वयं यह अवॉर्ड लेने दिल्ली नहीं जा सके. उस दौर में यह फिल्म टैक्स फ्री भी घोषित की गई थी.

गुरुद्वारे में रोजाना लगभग 2,000 लोगों को लंगर परोसा जाता है, जबकि रविवार को यह संख्या 5,000 से अधिक हो जाती है. इसके साथ ही गुरु तेग बहादुर स्कूल के माध्यम से सैकड़ों जरूरतमंद बच्चों को शिक्षा दी जा रही है.

सरदार सिंह सूरी ने केवल एक गुरुद्वारा नहीं बनाया, बल्कि सेवा, समानता और इंसानियत की ऐसी अमूल्य विरासत छोड़ी, जो आज भी हर जरूरतमंद के जीवन में उम्मीद और मुस्कान बनकर जीवित है.

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