आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर और सख्त प्रवर्तन से GST गाजियाबाद को दी नई पहचान, संजय लवानिया का कार्यकाल बना 'मॉडल कमिश्नरेट'

GST गाजियाबाद के निवर्तमान कमिश्नर संजय लवानिया ने अपने 2 वर्ष 8 माह के कार्यकाल में विभाग को केवल एक टैक्स कलेक्शन यूनिट तक सीमित नहीं रहने दिया, बल्कि उसे एक आधुनिक, तकनीक आधारित, जवाबदेह और सख्त प्रशासनिक इकाई के रूप में स्थापित कर दिया.

Sanjay Lavanias tenure became Model Commissionerate GST Ghaziabad
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गाजियाबाद: GST गाजियाबाद के निवर्तमान कमिश्नर संजय लवानिया ने अपने 2 वर्ष 8 माह के कार्यकाल में विभाग को केवल एक टैक्स कलेक्शन यूनिट तक सीमित नहीं रहने दिया, बल्कि उसे एक आधुनिक, तकनीक आधारित, जवाबदेह और सख्त प्रशासनिक इकाई के रूप में स्थापित कर दिया. उनके कार्यकाल को विभागीय अधिकारियों और व्यापारिक जगत दोनों ही वर्गों में “परिवर्तन, पारदर्शिता और सख्त प्रवर्तन” के दौर के रूप में देखा जा रहा है.

जब संजय लवानिया ने GST गाजियाबाद की कमान संभाली, तब विभाग कई प्रशासनिक चुनौतियों से जूझ रहा था. संसाधनों का सीमित उपयोग, धीमी कार्यप्रणाली, तकनीकी ढांचे की कमी और कर अनुपालन को लेकर कई समस्याएं मौजूद थीं. लेकिन उन्होंने शुरुआत से ही स्पष्ट कर दिया था कि विभाग केवल राजस्व वसूली तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसे एक प्रोफेशनल और रिजल्ट-ओरिएंटेड प्रशासनिक मॉडल में बदला जाएगा.

इंफ्रास्ट्रक्चर से लेकर डिजिटल मॉनिटरिंग तक बदलाव

अपने कार्यकाल में संजय लवानिया ने विभागीय इंफ्रास्ट्रक्चर को पूरी तरह नई दिशा दी. कार्यालयों में आधुनिक सुविधाओं का विस्तार, डिजिटल फाइल सिस्टम, बेहतर रिकॉर्ड मैनेजमेंट और तकनीकी संसाधनों के उपयोग को बढ़ावा देकर कार्यप्रणाली को तेज और पारदर्शी बनाया गया.

फाइल निस्तारण की गति बढ़ी, केस मॉनिटरिंग मजबूत हुई और विभागीय जवाबदेही पहले से कहीं अधिक स्पष्ट दिखाई देने लगी.

सूत्र बताते हैं कि विभागीय परिसरों में कार्यकुशलता बढ़ाने के लिए कई ऐसी व्यवस्थाएं लागू की गईं, जिनका असर सीधे प्रशासनिक प्रदर्शन पर दिखाई दिया. GST गाजियाबाद को तकनीकी रूप से मजबूत और व्यवस्थित कमिश्नरेट बनाने में उनका योगदान निर्णायक माना जा रहा है.

ईमानदार करदाता को सम्मान, टैक्स चोरों पर प्रहार

संजय लवानिया के कार्यकाल की सबसे बड़ी पहचान रही- ईमानदार करदाताओं के लिए सहयोगी रवैया और टैक्स चोरी करने वालों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति.

उन्होंने व्यापारिक संगठनों, उद्योग प्रतिनिधियों और टैक्स सलाहकारों के साथ नियमित संवाद स्थापित कर विभाग और व्यापारिक समुदाय के बीच विश्वास का माहौल तैयार किया.

करदाताओं की शिकायतों के त्वरित समाधान, जागरूकता कार्यक्रमों और स्पष्ट प्रशासनिक दृष्टिकोण ने व्यापारियों के बीच सकारात्मक संदेश दिया कि विभाग केवल दबाव बनाने वाली एजेंसी नहीं, बल्कि सहयोगी प्रशासनिक संस्था भी है.

फर्जी बिलिंग गैंग्स पर सबसे बड़ी चोट

दूसरी ओर, टैक्स चोरी, फर्जी बिलिंग और फर्जी ITC नेटवर्क के खिलाफ GST गाजियाबाद ने उनके नेतृत्व में बेहद आक्रामक रणनीति अपनाई.

इंटेलिजेंस आधारित जांच, डेटा एनालिटिक्स और तकनीकी मॉनिटरिंग के जरिए कई बड़े नेटवर्क्स का खुलासा किया गया. करोड़ों रुपये के राजस्व नुकसान को रोकते हुए विभाग ने फर्जी फर्मों के संगठित सिंडिकेट्स पर प्रभावी कार्रवाई की.

सूत्रों के अनुसार, उनके कार्यकाल में हाई-वैल्यू केस डिटेक्शन में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई. कई मामलों में अन्य राज्यों और केंद्रीय एजेंसियों के साथ समन्वय बनाकर कार्रवाई की गई, जिससे टैक्स चोरी के इंटर-स्टेट नेटवर्क्स पर भी शिकंजा कसा गया.

विभागीय अधिकारियों का मानना है कि “सख्त प्रवर्तन और संतुलित प्रशासन” को साथ लेकर चलना उनकी सबसे बड़ी प्रशासनिक क्षमता रही.

विभागीय कार्यसंस्कृति में दिखा बड़ा बदलाव

संजय लवानिया ने केवल बाहरी व्यवस्था नहीं बदली, बल्कि विभाग के अंदर भी कार्यसंस्कृति में बड़ा परिवर्तन किया.

समयबद्ध कार्य निष्पादन, जवाबदेही, अनुशासन और प्रोफेशनल अप्रोच को प्राथमिकता दी गई. अधिकारियों और कर्मचारियों को तकनीकी प्रशिक्षण और क्षमता विकास के लिए प्रेरित किया गया, जिससे विभाग की दक्षता में स्पष्ट सुधार देखने को मिला.

कई अधिकारियों का कहना है कि उनके कार्यकाल में विभाग की कार्यशैली अधिक परिणामोन्मुख और प्रोफेशनल बनी. निर्णय प्रक्रिया में पारदर्शिता और नियमित मॉनिटरिंग के कारण प्रदर्शन लगातार बेहतर हुआ.

“मॉडल कमिश्नरेट” की पहचान छोड़कर जा रहे

अपने 2 वर्ष 8 माह के कार्यकाल की समाप्ति पर संजय लवानिया GST गाजियाबाद को एक मजबूत, आधुनिक और सक्रिय कमिश्नरेट के रूप में स्थापित कर जा रहे हैं.
इंफ्रास्ट्रक्चर विकास, प्रशासनिक सुधार, तकनीकी आधुनिकीकरण और हाई-वैल्यू केस डिटेक्शन के क्षेत्र में उनके द्वारा किए गए कार्य लंबे समय तक विभाग के लिए एक मजबूत आधार बने रहेंगे.

विभागीय और व्यापारिक दोनों वर्गों में यह भावना स्पष्ट है कि उनका कार्यकाल GST गाजियाबाद के इतिहास में “सुदृढ़ीकरण और बदलाव” के दौर के रूप में याद किया जाएगा. उन्होंने यह साबित किया कि यदि नेतृत्व स्पष्ट, तकनीक आधारित और जवाबदेह हो, तो प्रशासनिक व्यवस्था केवल सख्त ही नहीं बल्कि प्रभावी और भरोसेमंद भी बन सकती है.