फिनलैंड में आयोजित 'कुल्तारंता टॉक्स' कार्यक्रम के दौरान विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने रूस से तेल खरीदने को लेकर भारत की नीति का बचाव किया. उन्होंने कहा कि भारत अपने राष्ट्रीय हितों और ऊर्जा सुरक्षा को ध्यान में रखकर फैसले लेता है. इस चर्चा में फिनलैंड की विदेश मंत्री एलिना वाल्टोनन और यूएई की सहायक विदेश मंत्री लाना नुसेबेह भी मौजूद थीं.
रूस से तेल खरीदने को लेकर पूछे गए सवाल के जवाब में जयशंकर ने कहा कि कई यूरोपीय देश वर्षों से ऐसे हथियारों की आपूर्ति करते रहे हैं, जिनका इस्तेमाल भारत के खिलाफ किया गया. उन्होंने कहा कि भारत ने कभी भी यूरोप की सुरक्षा को नुकसान पहुंचाने वाला कोई कदम नहीं उठाया, इसलिए इस तरह की आलोचनाओं को व्यापक संदर्भ में देखा जाना चाहिए.
ऊर्जा आपूर्ति के बदलते वैश्विक समीकरण
विदेश मंत्री ने कहा कि हाल के अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों के बाद दुनिया ऊर्जा आपूर्ति के स्रोतों में विविधता लाने की कोशिश कर रही है. उन्होंने बताया कि वर्तमान में रूस भारत के प्रमुख तेल आपूर्तिकर्ताओं में शामिल है, जबकि अमेरिका भारत को सबसे अधिक गैस उपलब्ध कराने वाला देश है.
अमेरिका के अनुरोध का भी किया जिक्र
जयशंकर ने कहा कि वर्ष 2022 से पहले भारत रूस से सीमित मात्रा में तेल खरीदता था. उनके अनुसार, वैश्विक तेल बाजार में स्थिरता बनाए रखने के उद्देश्य से उस समय अमेरिका ने भारत से रूस से तेल खरीद जारी रखने का अनुरोध किया था. उन्होंने यह भी कहा कि रूस ने एक भरोसेमंद आपूर्तिकर्ता के रूप में समय पर तेल की आपूर्ति सुनिश्चित की है.
राष्ट्रीय हितों के आधार पर तय होती है ऊर्जा नीति
रूसी तेल खरीद को लेकर उठने वाले नैतिक सवालों पर प्रतिक्रिया देते हुए विदेश मंत्री ने कहा कि ऊर्जा संबंधी फैसले किसी आदर्शवादी बहस के बजाय व्यावहारिक जरूरतों के आधार पर लिए जाते हैं. उन्होंने दोहराया कि भारत अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए कीमत, उपलब्धता और आपूर्ति की विश्वसनीयता जैसे कारकों को प्राथमिकता देता है.
भारत ने दोहराया अपना स्वतंत्र रुख
जयशंकर ने स्पष्ट किया कि भारत की विदेश और ऊर्जा नीतियां स्वतंत्र रूप से राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखकर तय की जाती हैं. उन्होंने संकेत दिया कि वैश्विक ऊर्जा व्यापार और कूटनीतिक संबंधों को केवल राजनीतिक नजरिए से नहीं, बल्कि आर्थिक और रणनीतिक जरूरतों के संदर्भ में भी समझना चाहिए.
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