इस्लामाबाद: सिंधु जल संधि (Indus Waters Treaty) के निलंबन के बाद भारत की जल नीति को लेकर पाकिस्तान की चिंता लगातार बढ़ती दिखाई दे रही है. हाल ही में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल के बयान ने इस मुद्दे को और चर्चा में ला दिया है. उन्होंने कहा कि भारत ऐसे प्रोजेक्ट्स पर तेजी से काम कर रहा है जिनका उद्देश्य देश के हिस्से के पानी का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करना है.
पाटिल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्देशों के अनुसार उन नदियों के जल संसाधनों का पूरा इस्तेमाल भारत के भीतर करने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं, जिनका पानी अब तक पाकिस्तान की ओर बहता रहा है. उनके इस बयान के बाद पाकिस्तान में जल सुरक्षा और कृषि क्षेत्र को लेकर नई चिंताएं सामने आने लगी हैं.
पाकिस्तान में बढ़ी जल संकट की आशंका
पाकिस्तानी मीडिया रिपोर्ट्स और विशेषज्ञों के अनुसार, वर्तमान समय में भारत के अधिकांश बांधों की क्षमता इतनी नहीं है कि वे पूरे नदी प्रवाह को रोक सकें या उसका मार्ग पूरी तरह बदल दें. हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि भारत जिन नई परियोजनाओं पर काम कर रहा है, उनका प्रभाव आने वाले वर्षों में दिखाई दे सकता है.
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि नदी जल के प्रवाह में कमी आती है तो पाकिस्तान के कृषि क्षेत्र, सिंचाई व्यवस्था और खाद्य सुरक्षा पर इसका असर पड़ सकता है, क्योंकि देश का बड़ा हिस्सा सिंधु बेसिन की नदियों पर निर्भर है.
भारत और पाकिस्तान के बीच अलग-अलग रुख
सिंधु जल संधि को लेकर दोनों देशों के बीच मतभेद लगातार बने हुए हैं. पाकिस्तान का कहना है कि 1960 में हुई इस संधि को एकतरफा तरीके से समाप्त या निलंबित नहीं किया जा सकता. इस मुद्दे को लेकर पाकिस्तान विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी अपनी बात रखता रहा है.
दूसरी ओर भारत का रुख यह है कि बदलती परिस्थितियों और राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखते हुए जल संसाधनों के उपयोग को लेकर नई रणनीति अपनाई जा रही है. भारत ने स्पष्ट किया है कि अपने हिस्से के पानी के उपयोग को प्राथमिकता दी जाएगी.
छह नदियों से जुड़ी है संधि
सिंधु जल संधि भारत और पाकिस्तान के बीच बहने वाली छह प्रमुख नदियों के जल बंटवारे से जुड़ी है. इन नदियों का उद्गम भारत में होता है और बाद में वे पाकिस्तान की ओर बहती हैं. पाकिस्तान की बड़ी आबादी खेती, पेयजल और अन्य जरूरतों के लिए इन नदियों पर निर्भर करती है.
जल उपयोग बढ़ाने के लिए परियोजनाओं पर काम
भारत ने अपने हिस्से के जल संसाधनों के बेहतर उपयोग के लिए कई परियोजनाओं को आगे बढ़ाया है. इनमें सतलुज नदी पर भाखड़ा बांध, ब्यास नदी पर पोंग और पंडोह बांध तथा रावी नदी पर रणजीत सागर बांध जैसी परियोजनाएं शामिल हैं.
इसके अलावा ब्यास-सतलुज लिंक, माधोपुर-ब्यास लिंक और इंदिरा गांधी नहर जैसी योजनाओं के जरिए भी पूर्वी नदियों के पानी का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करने की दिशा में काम किया गया है.
भविष्य पर टिकी निगाहें
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की नई जल परियोजनाओं का वास्तविक प्रभाव आने वाले वर्षों में स्पष्ट होगा. वहीं पाकिस्तान इस संभावना को लेकर चिंतित है कि भविष्य में उसकी ओर जाने वाले जल प्रवाह में कमी आ सकती है.
सिंधु जल संधि और उससे जुड़े जल संसाधनों का मुद्दा आने वाले समय में दोनों देशों के बीच रणनीतिक और आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण विषय बना रह सकता है.
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