नई दिल्ली: एक जख्मी इंजन और बीच आसमान में हड़कंप, यह दृश्य था जब थाईलैंड से रूस के बार्नौल जा रहे एक विमान में अचानक तकनीकी खराबी आ गई. शुक्रवार को जब उड़ान में इंजन से संबंधित समस्या उत्पन्न हुई, तो पायलटों ने तुरंत आपातकालीन लैंडिंग की तैयारी शुरू कर दी. विमान में 246 लोग सवार थे, जिनमें 239 यात्री और 7 क्रू सदस्य शामिल थे. इस संकटपूर्ण स्थिति के बावजूद, चीन ने अपनी तत्परता और सहायता से विमान को सुरक्षित लैंडिंग कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.
विमान में क्या हुआ था?
बीते शुक्रवार को बोइंग 757-200 विमान ने थाईलैंड के फुकेट से रूस के बार्नौल के लिए उड़ान भरी थी, लेकिन कुछ समय बाद विमान के दाहिने इंजन में तकनीकी खराबी आ गई. पायलटों ने इसे गंभीरता से लिया और आपातकालीन ट्रांसपोंडर कोड 7700 सेट कर दिया, जो विमान के संकट में होने का संकेत है. इसके बाद पायलटों ने तत्काल लैंडिंग की तैयारी शुरू कर दी और विमान को चीन के लैंझो में डायवर्ट किया.
चीन ने किया संकट में मदद का हाथ बढ़ाना
चीन के ग्लोबल टाइम्स के अनुसार, चीन ने तत्परता दिखाते हुए विमान को लैंझो झोंगचुआन अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर सुरक्षित रूप से उतारने के लिए आवश्यक व्यवस्थाएँ कीं. स्थानीय समयानुसार शाम 4:51 बजे, विमान ने लैंझो एयरपोर्ट पर लैंड किया, जहां यात्रियों को सुरक्षित रूप से उतारा गया. इस घटनाक्रम के बाद यात्रियों ने राहत की सांस ली. शिन्हुआ न्यूज एजेंसी के मुताबिक, हवाई अड्डे पर आपातकालीन सेवाओं द्वारा यात्री और क्रू के लिए सभी आवश्यक प्रबंध किए जा रहे हैं.
दुनिया के सामने संकट में सहयोग का उदाहरण
इस घटना ने दुनिया को यह एक बार फिर से दिखा दिया कि अंतरराष्ट्रीय सहयोग किसी भी संकट को सुलझाने में कितना महत्वपूर्ण हो सकता है. रूस की उड़ान संकट में फंसी थी, और चीन ने बिना कोई देरी किए मदद का हाथ बढ़ाया. इसके कारण विमान को सुरक्षित रूप से लैंड किया गया, और यात्रियों की जान को कोई खतरा नहीं हुआ.
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