रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध के बीच अब रूस ने एक बार फिर दुनिया को अपनी सैन्य ताकत का अहसास कराया है. हाल ही में रूसी सेना ने अपनी न्यूक्लियर-सक्षम क्रूज़ मिसाइल "बुरेवेस्तनिक" (Burevestnik) का नया परीक्षण किया है. यह मिसाइल न केवल पारंपरिक हथियारों में बल्कि रणनीतिक रूप से भी अमेरिका और नाटो देशों के लिए चुनौती मानी जा रही है. रूस के इस कदम से वॉशिंगटन में हलचल मच गई है. इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को सीधी नसीहत दी है कि वह मिसाइल परीक्षणों की बजाय यूक्रेन युद्ध खत्म करने पर ध्यान दें.
ट्रंप ने बदले सुर, पुतिन को दी नसीहत
एशिया दौरे के दौरान पत्रकारों से बातचीत में राष्ट्रपति ट्रंप ने रूस की मिसाइल गतिविधियों पर चिंता जताते हुए कहा, “उन्हें (पुतिन) इस युद्ध को समाप्त करना चाहिए. यह युद्ध जो एक हफ्ते में खत्म हो जाना चाहिए था, अब चौथे वर्ष में प्रवेश कर चुका है. नई मिसाइलों का परीक्षण करने की जगह, उन्हें अपनी ऊर्जा शांति लाने में लगानी चाहिए.”
यह बयान इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि अब तक ट्रंप रूस पर कई बार प्रतिबंध लगाने और सैन्य कार्रवाई की चेतावनी दे चुके हैं. लेकिन रूस के हालिया मिसाइल परीक्षण के बाद उनका रवैया पहले की तुलना में कहीं अधिक नरम दिखा.
14,000 किमी से ज्यादा उड़ान भरी
रूसी सेना के जनरल स्टाफ प्रमुख वैलेरी गेरासिमोव ने राष्ट्रपति पुतिन को जानकारी दी कि 21 अक्टूबर को बुरेवेस्तनिक मिसाइल का मल्टी-ऑवर फ्लाइट टेस्ट सफल रहा.
रूसी सरकारी समाचार एजेंसी TASS के अनुसार, “मिसाइल ने 14,000 किलोमीटर से अधिक की दूरी तय की और लगभग 15 घंटे तक उड़ान भरी. उसने वर्टिकल और हॉरिजॉन्टल दोनों दिशाओं में सफलतापूर्वक मैन्युवर किए.”
यह मिसाइल इतनी निचली ऊंचाई 50 से 100 मीटर पर उड़ सकती है कि किसी भी मौजूदा एयर डिफेंस सिस्टम के लिए इसे इंटरसेप्ट करना बेहद मुश्किल हो जाता है.
क्या है बुरेवेस्तनिक मिसाइल?
सफलता के रास्ते में तकनीकी बाधाएं
हालांकि अंतरराष्ट्रीय रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि रूस को इस मिसाइल के तकनीकी और सुरक्षा पहलुओं में अभी भी बड़ी चुनौतियां झेलनी पड़ रही हैं.
इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर स्ट्रैटेजिक स्टडीज (IISS) की रिपोर्ट के अनुसार, “मिसाइल की वास्तविक सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि रूस इसका न्यूक्लियर प्रोपल्शन सिस्टम कितना सुरक्षित और विश्वसनीय बना सकता है.”
अमेरिकी वायुसेना की 2021 की एक रिपोर्ट में कहा गया था कि यदि यह मिसाइल पूरी तरह सफल होती है, तो यह रूस को एक “अद्वितीय इंटरकॉन्टिनेंटल क्षमता” प्रदान कर सकती है, जिससे वह किसी भी वैश्विक लक्ष्य पर परमाणु हमला करने की स्थिति में होगा.
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