नई दिल्ली/मॉस्को: यूक्रेन युद्ध को रोकने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस की आर्थिक कमर तोड़ने की रणनीति अपनाई थी. इसके तहत रूस के ऊर्जा निर्यात को निशाना बनाया गया और रूसी तेल खरीदने वाले देशों पर भी दबाव बढ़ाया गया. भारत जैसे देशों पर अतिरिक्त टैरिफ लगाए गए ताकि रूस की आमदनी पर असर पड़े. लेकिन तमाम प्रतिबंधों और सख्त कदमों के बावजूद रूस ने एक नया रास्ता निकाल लिया है. अब तेल के बजाय सोने के जरिए रूस भारत के साथ अपना व्यापार बढ़ा रहा है और रिकॉर्ड स्तर पर गोल्ड एक्सपोर्ट कर रहा है.
भारत को रिकॉर्ड मात्रा में सोना बेच रहा रूस
रूस की सरकारी समाचार एजेंसी RIA नोवोस्ती के मुताबिक, रूस ने बीते साल के पहले 10 महीनों में भारत को 5 करोड़ डॉलर से ज्यादा मूल्य का सोना निर्यात किया है. यह आंकड़ा भारत के वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के डेटा के हवाले से सामने आया है. रिपोर्ट के अनुसार, यह रूस और भारत के बीच गोल्ड ट्रेड में एक बड़ा उछाल माना जा रहा है.
2021 के बाद सबसे बड़ी गोल्ड डिलीवरी
रूसी एजेंसी की रिपोर्ट बताती है कि अगस्त 2025 में रूस ने 2.34 करोड़ डॉलर मूल्य का सोना भारत भेजा, जो 2021 के बाद सबसे बड़ा सिंगल शिपमेंट था. इसके बाद अक्टूबर महीने में रूस ने 2.69 करोड़ डॉलर का सोना और भारत को निर्यात किया. इन आंकड़ों से साफ है कि रूस अब भारत के साथ अपने लेनदेन में सोने को एक अहम माध्यम के रूप में इस्तेमाल कर रहा है.
रूसी तेल पर भारत को झेलना पड़ा अमेरिकी टैरिफ
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अगस्त में भारत पर रूसी तेल खरीदने को लेकर 25 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ लगा दिया था. इसके साथ ही भारत पर कुल अमेरिकी टैरिफ बढ़कर 50 प्रतिशत तक पहुंच गया, जो दुनिया में सबसे ज्यादा टैरिफ दरों में शामिल है. ट्रंप प्रशासन का तर्क था कि रूसी तेल की खरीद से राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को यूक्रेन युद्ध जारी रखने के लिए फंडिंग मिलती है.
तेल आय पर असर, लेकिन रूस नहीं पड़ा कमजोर
रिपोर्ट्स में यह दावा किया गया है कि अमेरिकी दबाव और ऊंचे टैरिफ के बाद भारत ने रूसी तेल की खरीद में कुछ कमी जरूर की है. हालांकि, इसके बावजूद रूस की अर्थव्यवस्था को वह झटका नहीं लगा, जिसकी उम्मीद वॉशिंगटन को थी. रूस ने तेल पर निर्भरता घटाकर सोने जैसे वैकल्पिक संसाधनों के जरिए अंतरराष्ट्रीय व्यापार को जारी रखा है.
रूस बेच रहा गोल्ड और विदेशी मुद्रा भंडार
इसी हफ्ते सामने आई एक अन्य रूसी मीडिया रिपोर्ट में कहा गया कि रूस अपने नेशनल वेल्थ फंड (NWF) से विदेशी मुद्रा और सोने की बिक्री तेज करने जा रहा है. अमेरिकी प्रतिबंधों के चलते तेल और गैस निर्यात से होने वाली कमाई में गिरावट आई है, जिसकी भरपाई के लिए रूस अपने रिजर्व का सहारा ले रहा है.
युआन और सोने की बड़ी बिक्री की तैयारी
मॉस्को टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, रूसी वित्त मंत्रालय ने 16 जनवरी से 5 फरवरी के बीच रोजाना करीब 16.5 करोड़ डॉलर मूल्य के चीनी युआन और सोना बेचने की योजना बनाई है. कुल मिलाकर यह बिक्री 2.48 अरब डॉलर तक पहुंच सकती है, जो कोविड-19 संकट के दौरान की गई बिक्री से भी ज्यादा बताई जा रही है.
इसी रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि रूस ने बीते चार वर्षों में अपने नेशनल फंड से करीब 60 प्रतिशत सोना पहले ही बेच दिया है. यह कदम अमेरिकी प्रतिबंधों और पश्चिमी देशों के आर्थिक दबाव का सीधा नतीजा माना जा रहा है.
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