Russia attacked on Turkey: जब मास्को और अंकारा के बीच कूटनीतिक संवाद चल रहा था, ठीक उसी समय काला सागर से आई खबरों ने पूरी तस्वीर बदल दी. रूस और तुर्की के बीच संतुलन साधने वाला रिश्ता अचानक तनाव की गिरफ्त में आ गया. यूक्रेन युद्ध के बीच काला सागर में हुए एक हमले ने न सिर्फ तुर्की को असहज स्थिति में डाल दिया, बल्कि क्षेत्रीय स्थिरता और वैश्विक समुद्री व्यापार को लेकर भी नई आशंकाएं खड़ी कर दीं.
रूस ने यूक्रेन के रणनीतिक बंदरगाहों ओडेसा और चोर्नोमोर्स्क पर ड्रोन और मिसाइलों से एक साथ हमला तेज कर दिया. इसी दौरान तुर्की के तीन व्यापारिक जहाज भी इसकी चपेट में आ गए. इनमें एक जहाज ‘सेनक टी’ भी शामिल था, जो खाद्य सामग्री लेकर जा रहा था और हमले के बाद उसमें आग लग गई. यह घटना इसलिए ज्यादा गंभीर मानी जा रही है क्योंकि इसमें एक तटस्थ देश के जहाजों को नुकसान पहुंचा.
टाइमिंग ने बढ़ाई चिंता
हमले की टाइमिंग ने पूरे घटनाक्रम को और संवेदनशील बना दिया. कुछ ही घंटे पहले तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोआन ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से बातचीत में ऊर्जा और बंदरगाहों को लेकर सीमित संघर्षविराम का प्रस्ताव रखा था. ऐसे में काला सागर में तुर्की जहाजों को नुकसान पहुंचना कूटनीतिक प्रयासों के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है. रूस के रक्षा मंत्रालय की ओर से इस हमले पर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई.
Today, #Erdogan assured the dictator of #Russia, #Putin, that #Turkey would not allow #Ukraine to strike Russian oilers near its coasts again. Only hours later, instead of thanking him, the Russians mistakenly hit Cenk Roro, a Turkish cargo ship docked in the port of #Odesa,… pic.twitter.com/Z3VUUHJbIg
— Babak Taghvaee - The Crisis Watch (@BabakTaghvaee1) December 12, 2025
युद्ध में तुर्की क्यों फंसा?
यूक्रेन हाल के महीनों में रूस की तथाकथित ‘शैडो फ्लीट’ तेल टैंकरों को सी-ड्रोन हमलों के जरिए निशाना बनाता रहा है. इन हमलों के जवाब में पुतिन ने कड़े प्रतिशोध की चेतावनी दी थी. काला सागर में चल रही इस रणनीतिक लड़ाई के बीच तुर्की के जहाज भी उसी समुद्री मार्ग का इस्तेमाल कर रहे थे, जिससे वे अप्रत्यक्ष रूप से संघर्ष के घेरे में आ गए. यही वजह है कि तुर्की, जो अब तक मध्यस्थ की भूमिका में था, खुद संकट में फंसता दिख रहा है.
तुर्की के जहाज क्यों बने शिकार?
रूस और तुर्की के रिश्ते न तो बहुत करीबी हैं और न ही खुले तौर पर शत्रुतापूर्ण. ऐसे में जानबूझकर तुर्की के जहाजों को निशाना बनाना रूस की रणनीति का हिस्सा नहीं माना जा रहा. असल में रूस का मुख्य लक्ष्य ओडेसा जैसे बंदरगाह थे, जो यूक्रेन की अर्थव्यवस्था और निर्यात के लिए बेहद अहम हैं. यूक्रेन द्वारा रूस की तेल और गैस सुविधाओं पर हमलों के जवाब में मास्को उसकी आर्थिक आपूर्ति लाइन को कमजोर करना चाहता है. इसी प्रक्रिया में तुर्की के व्यापारिक जहाज भी हमले की जद में आ गए.हालांकि, तटस्थ जहाजों को नुकसान पहुंचना अंतरराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा के लिए गंभीर संकेत है. इससे काला सागर में बीमा लागत बढ़ सकती है, जहाजों की आवाजाही प्रभावित हो सकती है और वैश्विक स्तर पर खाद्य वस्तुओं की कीमतों पर भी असर पड़ सकता है.
काला सागर क्यों बना युद्ध का नया केंद्र?
इस हमले ने साफ कर दिया है कि रूस फिलहाल कूटनीतिक प्रयासों के बजाय सैन्य दबाव को प्राथमिकता दे रहा है. काला सागर अब पूरी तरह से संघर्ष का नया मोर्चा बन चुका है. इसकी एक बड़ी वजह ब्लैक सी ग्रेन डील का टूटना है. जुलाई 2022 में हुए इस समझौते के तहत यूक्रेन के बंदरगाहों से अनाज और खाद्य सामग्री सुरक्षित गलियारे के जरिए दुनिया तक पहुंचाई जाती थी. इसमें रूस, यूक्रेन, तुर्की और संयुक्त राष्ट्र शामिल थे.जुलाई 2023 में रूस इस समझौते से पीछे हट गया. मास्को का कहना था कि पश्चिमी प्रतिबंधों के कारण उसे वादे के मुताबिक राहत नहीं मिली और यूक्रेन ने व्यापारिक बंदरगाहों का सैन्य इस्तेमाल किया. डील खत्म होने के बाद से काला सागर में हमले तेज हो गए और व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा खतरे में पड़ गई. इसका असर वैश्विक अनाज बाजार पर भी पड़ सकता है.
रूस-यूक्रेन युद्ध में तुर्की की भूमिका
युद्ध की शुरुआत से ही तुर्की ने संतुलित रुख अपनाया. उसने यूक्रेन की क्षेत्रीय अखंडता का समर्थन किया, लेकिन रूस पर पश्चिमी देशों जैसे सख्त प्रतिबंध नहीं लगाए. तुर्की ने यूक्रेन को बैराकतार TB-2 ड्रोन दिए, जिनका शुरुआती दौर में रूस के खिलाफ इस्तेमाल हुआ. वहीं दूसरी ओर, तुर्की ने रूस के साथ ऊर्जा, व्यापार और पर्यटन संबंध भी बनाए रखे.
तुर्की की सबसे अहम भूमिका मध्यस्थ के रूप में रही है. 2022 में इस्तांबुल में रूस-यूक्रेन शांति वार्ता की मेजबानी से लेकर ब्लैक सी ग्रेन डील तक, अंकारा ने कई अहम कूटनीतिक जिम्मेदारियां निभाईं. इसके अलावा, मोंट्रॉ कन्वेंशन के तहत तुर्की ने युद्धपोतों के लिए बोस्फोरस और डार्डानेल्स जलडमरूमध्य को बंद कर दिया, जिससे काला सागर में सैन्य गतिविधियों पर असर पड़ा. अब काला सागर में तुर्की जहाजों को नुकसान पहुंचने के बाद सवाल यह है कि क्या तुर्की अपनी मध्यस्थ भूमिका को बनाए रख पाएगा, या यह संघर्ष उसे भी सीधे तौर पर खींच लाएगा.
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