रूस-यूक्रेन के बीच क्यों नहीं सुलझ रही युद्ध की आग? शांति का क्या रास्ता...जेलेंस्की ने किया खुलासा

संयुक्त राष्ट्र महासभा के 79वें अधिवेशन में जब यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर ज़ेलेंस्की मंच पर पहुंचे, तो उनके भाषण में गुस्सा, निराशा और चेतावनी तीनों का गहरा मिश्रण साफ झलक रहा था. उन्होंने सीधे शब्दों में कहा कि रूस युद्धविराम चाहता ही नहीं, और यह संघर्ष यूक्रेन की सीमाओं से कहीं आगे तक फैल सकता है.

Russia and Ukraine War zelenskyy gave speech in un nation why ceasefire not happening
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संयुक्त राष्ट्र महासभा के 79वें अधिवेशन में जब यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर ज़ेलेंस्की मंच पर पहुंचे, तो उनके भाषण में गुस्सा, निराशा और चेतावनी तीनों का गहरा मिश्रण साफ झलक रहा था. उन्होंने सीधे शब्दों में कहा कि रूस युद्धविराम चाहता ही नहीं, और यह संघर्ष यूक्रेन की सीमाओं से कहीं आगे तक फैल सकता है.

ज़ेलेंस्की ने वैश्विक नेताओं से एक मार्मिक सवाल पूछा हम अपने बच्चों को उनके घर कब वापस ला पाएंगे? उन्होंने कहा कि रूस की सेना न केवल यूक्रेनी जमीन पर हमला कर रही है, बल्कि बच्चों का अपहरण, सिविल ढांचे का विध्वंस, और यूरोप में अस्थिरता फैलाना उसका सुनियोजित एजेंडा बन चुका है.

रूस की आक्रामकता यूरोप तक फैल रही, पोलैंड और एस्टोनिया पर भी खतरा

यूक्रेन के राष्ट्रपति ने बताया कि हाल ही में 19 रूसी ड्रोन पोलैंड की सीमा के भीतर दाखिल हुए, जिनमें से केवल चार को ही मार गिराया जा सका. उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि एस्टोनिया जैसी नाटो सदस्य देश को भी अब सुरक्षा परिषद की आपात बैठक बुलानी पड़ी. यह बताता है कि रूस की आक्रामकता अब नाटो की सुरक्षा कवच को भी चुनौती दे रही है.

हमने जॉर्जिया खोया, बेलारूस झुक चुका, अब मोल्दोवा को बचाइए

ज़ेलेंस्की ने यूरोपीय नेताओं को साफ शब्दों में आगाह किया कि अगर समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो मोल्दोवा भी रूस की पकड़ में जा सकता है. उन्होंने कहा जॉर्जिया की आज़ादी पहले ही छिन चुकी है, बेलारूस पहले से रूस के प्रभाव में है. अब अगर मोल्दोवा भी चला गया, तो यह यूरोप की ऐतिहासिक विफलता होगी.

21वीं सदी में भी शांति हथियार तय करते हैं, कानून नहीं

राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की का भाषण उस समय और भी ज्यादा भावुक और कटु हो गया, जब उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं की निष्क्रियता पर सवाल उठाया. उनका कहना था कि आज की दुनिया में न सहयोग, न कानून, बल्कि हथियार तय करते हैं कि कौन बचेगा और कौन नहीं. उन्होंने तीखी टिप्पणी की फिलिस्तीन, सूडान, सोमालिया इन सब देशों में जो हुआ, किसी भी अंतर्राष्ट्रीय संस्था ने कुछ नहीं किया. और आज, हमारे साथ भी वही हो रहा है.

परमाणु संयंत्रों के पास भी हमले क्या ये पागलपन नहीं है?

ज़ेलेंस्की ने यह भी आरोप लगाया कि रूस ने जानबूझकर यूक्रेन के परमाणु संयंत्रों के पास गोलाबारी की है, जिससे सिर्फ यूक्रेन ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया परमाणु आपदा के खतरे के सामने खड़ी हो गई है. उन्होंने कहा दुनिया की संस्थाएं इतनी कमजोर हो चुकी हैं कि यह पागलपन बिना रुके जारी है.

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