RSS Meeting: अमेरिका की ओर से लागू किए गए इस टैरिफ को केवल एक व्यापारिक निर्णय के रूप में नहीं देखा जा रहा, बल्कि इसे भारत की आर्थिक संप्रभुता पर चोट मानते हुए रणनीतिक प्रतिक्रिया तैयार की जा रही है. इस दो दिवसीय बैठक में अमेरिका की नई टैरिफ नीति के लघु और दीर्घकालिक प्रभावों पर विचार किया जाएगा, और यह तय किया जाएगा कि इससे भारत की स्थानीय अर्थव्यवस्था और उत्पादन प्रणाली को कैसे सुरक्षित रखा जा सकता है.
इस उच्चस्तरीय विचार-मंथन में लघु उद्योग भारती, सहकार भारती, भारतीय मजदूर संघ, स्वदेशी जागरण मंच और किसान संघ जैसे संघ से जुड़े संगठनों के प्रतिनिधि भी हिस्सा लेंगे. इन संगठनों की भागीदारी से यह स्पष्ट है कि संघ इस मुद्दे को केवल राजनीतिक दृष्टिकोण से नहीं, बल्कि व्यापक आर्थिक और सामाजिक दृष्टिकोण से देख रहा है.
संभव है बीजेपी नेताओं की भी उपस्थिति
सूत्रों के अनुसार, इस बैठक में केंद्र सरकार के कुछ मंत्री और बीजेपी के वरिष्ठ नेता भी भाग ले सकते हैं. आमतौर पर संघ की आर्थिक बैठकें तकनीकी और संगठनात्मक स्तर पर होती हैं, लेकिन इस बार की बैठक का स्तर और राजनीतिक संवेदनशीलता इसे विशेष बना रही है.
‘ऑर्गनाइज़र’ में अमेरिका पर तीखा प्रहार
संघ के मुखपत्र 'ऑर्गनाइज़र' में कुछ दिन पहले अमेरिका की आलोचना करते हुए कहा गया था कि लोकतंत्र और स्वतंत्रता की दुहाई देने वाला अमेरिका, दरअसल वैश्विक तानाशाही और आर्थिक आतंकवाद को बढ़ावा दे रहा है. लेख में यह भी कहा गया कि टैरिफ और व्यापार युद्ध अब भू-राजनीतिक नियंत्रण के नए औजार बन चुके हैं, जिनका उपयोग भारत जैसे विकासशील राष्ट्रों की संप्रभुता को कमजोर करने के लिए किया जा रहा है.
यह भी पढ़ें- PM मोदी के भाषण से तिलमिलाया पाकिस्तान, खुद ही कहा- ये हमारी करनी का फल