प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 79वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लाल किले से देश को संबोधित करते हुए कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर बात की. उनके भाषण में पाकिस्तान, ऑपरेशन सिंदूर और सिंधु जल संधि जैसे विषय प्रमुख रहे. मोदी ने स्पष्ट शब्दों में संदेश दिया कि भारत अब किसी भी प्रकार की धमकी या ब्लैकमेलिंग सहन नहीं करेगा.
पीएम मोदी ने अपने भाषण में ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र करते हुए कहा कि भारतीय सैनिकों ने दुश्मनों को उनकी कल्पना से परे जवाब दिया. उन्होंने बताया कि पहलगाम में सीमा पार से आतंकियों ने निर्दयता दिखाई थी और ऑपरेशन सिंदूर उसी का सटीक जवाब था. मोदी के इस बयान को पाकिस्तान में चिंता और चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है.
सिंधु जल संधि और किसानों का अधिकार
प्रधानमंत्री ने सिंधु जल संधि का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत के किसानों का जल पर पूरा अधिकार है और कोई भी पक्ष इसे रोकने की कोशिश नहीं कर सकता. मोदी का यह संदेश सीधे तौर पर यह दर्शाता है कि भारत अपने हितों और राष्ट्रीय संप्रभुता के मामलों में किसी प्रकार की समझौता करने के लिए तैयार नहीं है.
पाकिस्तान की प्रतिक्रिया
पाकिस्तान के राजनीतिक विश्लेषक कमर चीमा और पत्रकार आरजू काजमी ने मोदी के भाषण पर प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि मोदी का कठोर रुख अपेक्षित था, क्योंकि पाकिस्तान की ओर से लगातार धमकियां दी जाती रही हैं. आरजू काजमी के अनुसार, पाकिस्तान की ओर से बातचीत का ऑफर केवल तभी सार्थक होगा जब वह आतंकियों के मामलों पर गंभीर कदम उठाए. उन्होंने बताया कि भारत लगातार हाफिज सईद, मसूद अजहर और दाऊद इब्राहिम जैसे आतंकियों की गतिविधियों के प्रति पाकिस्तान से कार्रवाई की मांग करता रहा है.
पाकिस्तान को स्पष्ट संदेश
प्रधानमंत्री मोदी ने साफ कहा कि भारत अब परमाणु धमकियों और किसी भी तरह की ब्लैकमेलिंग को बर्दाश्त नहीं करेगा. उनका संदेश यह भी है कि सीमा सुरक्षा, जल संसाधन और आतंकवाद के मामलों में भारत पूरी तरह सख्त रुख अपनाएगा. इस भाषण के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि भारत अपने राष्ट्रीय हितों के प्रति किसी भी प्रकार का समझौता नहीं करेगा.
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