बिहार की राजनीति में परिवारवाद: RJD के 71 में 30 विधायक वंशवादी, देखें JDU, BJP और कांग्रेस का हाल

बिहार की राजनीति में परिवारवाद यानी राजनेताओं के राजनीतिक कद का उनके परिवार से जुड़ा होना एक ऐसी वास्तविकता है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता.

RJD is at the forefront of familyism in Bihar politics
प्रतिकात्मक तस्वीर/ ANI

Bihar Politics: बिहार की राजनीति में परिवारवाद यानी राजनेताओं के राजनीतिक कद का उनके परिवार से जुड़ा होना एक ऐसी वास्तविकता है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. हाल ही में ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ द्वारा जारी की गई एक रिपोर्ट ने बिहार विधानसभा के वर्तमान 243 सदस्यों के बीच फैले इस परिवारवाद के जाल को स्पष्ट रूप से सामने रखा है. रिपोर्ट के मुताबिक, विधानसभा के कुल सदस्यों में करीब 29 प्रतिशत (यानी 70 से अधिक) विधायक ऐसे हैं, जिनका राजनीतिक कद सीधे तौर पर उनके परिवार की विरासत से जुड़ा हुआ है. यह आंकड़ा बिहार की राजनीति में पारिवारिक राज की गहराई को दर्शाता है.

RJD में परिवारवाद का दबदबा

परिवारवाद के मामले में राष्ट्रीय जनता दल (RJD) बिहार की राजनीति में सबसे आगे है. RJD के 71 सदस्यों में से 30 ऐसे विधायक हैं, जो सीधे अपने परिवार की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं. इसका मतलब यह हुआ कि राजद की लगभग 42 प्रतिशत सदस्यता वंशवाद पर आधारित है.

इस सूची में पार्टी के शीर्ष नेता लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी के पुत्र तेजस्वी यादव और तेज प्रताप यादव जैसे प्रमुख चेहरे शामिल हैं, जो पार्टी के वर्तमान नेतृत्व में मुख्य भूमिका निभा रहे हैं. इनके अलावा, कई अन्य विधायक भी ऐसे हैं जिनके परिवार के सदस्य पहले राज्य या केंद्र सरकार में मंत्री पद पर रह चुके हैं. उदाहरण के तौर पर, पूर्व केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी की बहू दीपा मांझी, पूर्व मुख्यमंत्री जगन्नाथ मिश्रा और हरिहर सिंह के पुत्रों को भी इस श्रेणी में रखा गया है.

JDU, BJP और कांग्रेस का परिवारवाद

राष्ट्रीय जनता दल की तरह ही जनता दल यूनाइटेड (JDU) में भी परिवारवाद की गहरी जड़ें हैं. JDU के कुल 44 सदस्यों में से 16 (लगभग 36 प्रतिशत) ऐसे हैं, जो परिवारवादी राजनीति को आगे बढ़ा रहे हैं. वहीं, भाजपा की स्थिति भी कुछ अलग नहीं है. भाजपा में वंशवादी विधायकों की संख्या RJD और JDU के संयुक्त आंकड़े से महज तीन सीटें कम है. हालांकि, भाजपा के वंशवादी विधायकों का सटीक आंकड़ा रिपोर्ट में स्पष्ट नहीं किया गया है.

कांग्रेस पार्टी में परिवारवाद की स्थिति अपेक्षाकृत कम है, लेकिन यहां भी कुल 19 सदस्यों में से लगभग 4 विधायक परिवार की राजनीतिक विरासत पर आधारित हैं, जो कि कुल सदस्यता का लगभग 21 प्रतिशत है.

वर्तमान सरकार के मंत्रियों में भी परिवारवाद

बिहार सरकार में भी परिवारवाद की झलक साफ देखी जा सकती है. वर्तमान JDU-भाजपा गठबंधन सरकार के सात मंत्री वंशवादी पृष्ठभूमि से आते हैं. JDU के विजय कुमार चौधरी, महेश्वर हजारी, शीला कुमारी और सुनील कुमार, तथा भाजपा के नितिन नवीन ऐसे मंत्री हैं जिनका राजनीतिक कद उनके परिवार की विरासत से जुड़ा हुआ है.

तीसरी पीढ़ी के वंशवादी नेता भी सक्रिय

बिहार की राजनीति में परिवारवाद सिर्फ दूसरी पीढ़ी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह तीसरी पीढ़ी तक भी फैल चुका है. उदाहरण के तौर पर, JDU के मंत्री सुमित कुमार सिंह ऐसे नेता हैं जिनके पिता और दादा दोनों ही राजनीति में सक्रिय रहे हैं. इसी प्रकार, पूर्व मुख्यमंत्री शकुनी चौधरी के पुत्र सम्राट चौधरी और पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी के पुत्र संतोष सुमन मांझी भी राजनीति में तीसरी पीढ़ी के वंशवादी नेता माने जाते हैं.

राजद के युसूफ सलाहुद्दीन, जिनके दादा सांसद रह चुके हैं, और JDU के मंत्री अशोक चौधरी, जिनके पिता भी मंत्री पद पर रह चुके हैं, परिवारवाद के इस जाल में शामिल हैं. यह उदाहरण बिहार की राजनीति में विरासत आधारित नेतृत्व की व्यापकता को दर्शाते हैं.

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