वॉशिंगटन डीसी में नेशनल गार्ड के दो जवानों पर हुए हमले ने अमेरिका में सुरक्षा और शरण नीतियों पर नई बहस छेड़ दी है. अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, हमले का आरोपी अफगान प्रवासी रहमनुल्लाह लकानवाल की कट्टरपंथी सोच अफगानिस्तान में नहीं बल्कि अमेरिका आने के बाद विकसित हुई. यह जानकारी अमेरिकी होमलैंड सिक्योरिटी सेक्रेटरी क्रिस्टी नोएम ने रविवार को दो बड़े इंटरव्यू में साझा की.
हमले की घटना और आरोपी की पृष्ठभूमि
29 वर्षीय लकानवाल पर आरोप है कि उसने व्हाइट हाउस से कुछ ही ब्लॉक दूर नेशनल गार्ड के दो सैनिकों पर घात लगाकर फायरिंग की. इस हमले में 20 वर्षीय सारा बेकस्ट्रॉम की मौत हो गई और 24 वर्षीय एंड्र्यू वोल्फ गंभीर रूप से घायल हुए.
प्रारंभिक जांच में यह संकेत मिले हैं कि लकानवाल वॉशिंगटन स्टेट में रहते हुए कट्टरपंथी नेटवर्क के संपर्क में आया. अधिकारियों का कहना है कि उसकी सोच अमेरिका आने के बाद बदल गई और अब वह स्थानीय समुदाय और परिवार के प्रभाव में कट्टर विचारधारा के साथ जुड़ा.
लकानवाल 2021 में अमेरिका आया, उस समय जब अफगानिस्तान पर तालिबान का कब्जा हो गया और बाइडेन प्रशासन ने अमेरिकी सहयोगियों और उनके परिवार को बड़े पैमाने पर निकाला. अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, लकानवाल को अप्रैल 2021 में शरण (Asylum) मिली, जिसे ट्रंप प्रशासन ने मंजूर किया था.
हमले के बाद ट्रंप प्रशासन का रुख
हमले के बाद ट्रंप प्रशासन ने शरण और असाइलम नीतियों पर सख्त रुख अपनाया है. ट्रंप ने संकेत दिए कि अमेरिका दीर्घकालिक असाइलम प्रवेश रोक सकता है, ताकि देश के अंदर सुरक्षा जोखिम कम किया जा सके. उन्होंने कहा, “कोई समयसीमा नहीं है, लेकिन रोक लंबी हो सकती है. हमारे पास पहले ही काफी समस्याएं हैं और हम और लोगों को अंदर नहीं लाना चाहते.”
लकानवाल का CIA समर्थित इकाई से संबंध
अमेरिकी दस्तावेजों के अनुसार, लकानवाल अफगानिस्तान में CIA समर्थित इकाई का हिस्सा था. इसका मतलब है कि युद्ध के दौरान वह अमेरिका के सहयोगियों में शामिल था और इसी वजह से उसे अमेरिका आने की अनुमति दी गई. हालांकि अब अमेरिकी प्रशासन यह मान रहा है कि उसकी कट्टरता अमेरिका आने के बाद विकसित हुई और स्थानीय समुदाय और परिवार के प्रभाव ने इसे और बढ़ावा दिया.
होमलैंड सिक्योरिटी (DHS) की चेतावनी
क्रिस्टी नोएम ने स्पष्ट किया कि जो कोई भी हमले से जुड़ी जानकारी छिपाएगा या प्रशासन के साथ सहयोग नहीं करेगा, उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी. उन्होंने कहा, “अगर किसी के पास जानकारी है और वह सामने नहीं लाता तो हम उसे भी छोड़ने वाले नहीं हैं.”
अमेरिका ने उठाए गए कदम
हमले के बाद अमेरिकी प्रशासन ने सुरक्षा और शरण प्रक्रियाओं पर कई बड़े कदम उठाए हैं:
सुरक्षा और राजनीतिक असर
इस घटना ने अमेरिका में न केवल सुरक्षा चिंताओं को बढ़ाया है, बल्कि आंतरिक और विदेशी शरण नीतियों पर बहस भी तेज कर दी है. विशेषज्ञों का कहना है कि लकानवाल जैसे मामलों ने अमेरिका में सुरक्षा प्रोटोकॉल, असाइलम सिस्टम और प्रवास नीतियों में गहराई से समीक्षा की जरूरत को रेखांकित किया है.
अमेरिकी राजनीति में भी यह मामला महत्वपूर्ण बहस का विषय बन गया है, क्योंकि अब यह सवाल उठ रहा है कि क्या देश के अंदर ही बड़ी सुरक्षा चुनौतियां पैदा हो रही हैं और अमेरिका किस हद तक प्रवासियों की निगरानी और असाइलम प्रक्रिया में बदलाव कर सकता है.
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