Swift Telescope: नासा के स्विफ्ट टेलीस्कोप को अंतरिक्ष में ज्यादा ऊंची कक्षा में ले जाकर बचाने की कोशिश आखिरकार बंद कर दी गई है. इसे बचाने के लिए नासा और कैटलिस्ट स्पेस टेक्नोलॉजीज ने करीब एक महीने पहले एक मिशन शुरू किया था, लेकिन इसमें सफलता नहीं मिली. अब माना जा रहा है कि टेलीस्कोप इस साल के अंत तक पृथ्वी की ओर गिर सकता है.
हालांकि, इसके पृथ्वी तक पूरी तरह पहुंचने की संभावना नहीं है. वायुमंडल में प्रवेश के दौरान तेज घर्षण की वजह से टेलीस्कोप का ज्यादातर हिस्सा जल जाएगा और सिर्फ कुछ मलबा ही जमीन तक पहुंच सकता है.
बचाने का मिशन क्यों हुआ बंद?
नासा ने स्विफ्ट टेलीस्कोप को सुरक्षित कक्षा में पहुंचाने के लिए कैटलिस्ट को करीब 3 करोड़ डॉलर का ठेका दिया था. इसके लिए कंपनी ने एक निजी अंतरिक्ष यान की मदद से टेलीस्कोप की कक्षा बढ़ाने की योजना बनाई थी.
लेकिन अंतरिक्ष यान को नियंत्रित करने में दिक्कतें आने लगीं. इसके बाद कैटलिस्ट ने टेलीस्कोप को ऊंची कक्षा में ले जाने की कोशिश रोकने का फैसला किया.
नासा के मुताबिक, यह मिशन शुरू से ही काफी चुनौतीपूर्ण था. सूर्य की बढ़ी हुई गतिविधि के कारण टेलीस्कोप की कक्षा उम्मीद से ज्यादा तेजी से नीचे आ रही थी, जिससे इसे बचाने के लिए समय भी कम हो गया.
20 साल से अंतरिक्ष में कर रहा था काम
स्विफ्ट टेलीस्कोप को साल 2004 में अंतरिक्ष में भेजा गया था. इसका मुख्य काम गामा-रे बर्स्ट और तारों के विस्फोट जैसी बेहद शक्तिशाली खगोलीय घटनाओं का अध्ययन करना था.
दो दशक से ज्यादा समय तक इस टेलीस्कोप ने वैज्ञानिकों को ब्रह्मांड की कई महत्वपूर्ण घटनाओं को समझने में मदद की. इसके वैज्ञानिक उपकरण इस साल की शुरुआत में बंद कर दिए गए थे.
अब कितनी ऊंचाई पर है टेलीस्कोप?
स्विफ्ट टेलीस्कोप पिछले हफ्ते तक पृथ्वी से करीब 347 किलोमीटर की ऊंचाई पर चक्कर लगा रहा था. सूर्य की गतिविधि बढ़ने से पृथ्वी के ऊपरी वायुमंडल में बदलाव हुआ, जिससे टेलीस्कोप पर घर्षण बढ़ा और उसकी कक्षा तेजी से नीचे आने लगी.
अब इसे ऊंची कक्षा में ले जाने की कोशिश भी बंद हो चुकी है. ऐसे में आने वाले महीनों में इसकी ऊंचाई और कम होती जाएगी.
पृथ्वी पर कितना मलबा गिरेगा?
टेलीस्कोप के पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करने पर इसका ज्यादातर हिस्सा तेज गर्मी और घर्षण के कारण जल जाएगा. वैज्ञानिकों का मानना है कि इसका केवल कुछ हिस्सा ही मलबे के रूप में नीचे पहुंच सकता है.
स्विफ्ट मिशन के खत्म होने के बावजूद इससे मिले 20 साल से ज्यादा के वैज्ञानिक आंकड़े आगे भी शोधकर्ताओं के लिए उपयोगी रहेंगे.
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