Russia Oil Supply To India: हाल ही में होर्मुज स्ट्रेट पर ईरान का पूरा नियंत्रण स्थापित होने की खबरें आई हैं. यह स्ट्रेट विश्व के तेल और गैस शिपमेंट के लिए एक महत्वपूर्ण मार्ग है, जिससे दुनिया की तेल सप्लाई प्रभावित हो सकती है. ईरान की इस कार्रवाई के कारण इंटरनेशनल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी देखी जा सकती है, जिसका असर भारत और चीन जैसे बड़े आयातक देशों की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है.
इस संकट की स्थिति में रूस ने भारत और चीन के समर्थन का प्रस्ताव रखा है. इंटरफैक्स न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, रूस के डिप्टी प्राइम मिनिस्टर अलेक्जेंडर नोवाक ने बुधवार को कहा कि रूस इन देशों को तेल सप्लाई बढ़ाने के लिए तैयार है. उनका मानना है कि इससे होर्मुज स्ट्रेट में बढ़ते तनाव के बीच एक संभावित बफर मिल सकता है और अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार स्थिर रहने में मदद मिलेगी.
भारत में रूसी तेल की स्थिति
रूस फरवरी 2026 में भारत का सबसे बड़ा क्रूड तेल सप्लायर बना हुआ है. केप्लर डेटा के अनुसार, फरवरी में रूस से भारत के लिए तेल की आपूर्ति लगभग 1 मिलियन बैरल प्रति दिन (mbd) रही, जबकि जनवरी में यह 1.1 mbd थी. इसी दौरान सऊदी अरब ने अपने शिपमेंट को लगभग 30% बढ़ाकर 1 mbd से अधिक कर दिया.
ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के अधिकारियों का दावा है कि होर्मुज स्ट्रेट अब पूरी तरह से उनके नियंत्रण में है. गार्ड्स नेवी के अधिकारी मोहम्मद अकबरज़ादेह ने कहा कि इस मार्ग से गुजरने वाले जहाजों को मिसाइल या ड्रोन जैसे खतरों का सामना करना पड़ सकता है.
भारत का तेल निर्भरता
भारत का लगभग 2.5 से 2.7 मिलियन बैरल प्रति दिन का क्रूड तेल होर्मुज स्ट्रेट से होकर आता है. इसमें मुख्य रूप से इराक, सऊदी अरब, UAE और कुवैत से तेल शामिल है. इस इलाके में सैन्य गतिविधियों और हमलों के कारण तेल परिवहन प्रभावित हो रहा है. भारतीय रिफाइनर इस स्थिति में नए सोर्स तलाशने के प्रयास कर रहे हैं ताकि तेल की आपूर्ति में किसी तरह का व्यवधान न आए.
अमेरिकी प्रतिक्रिया और वैश्विक असर
इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि US नेवी तैयार है ताकि स्ट्रेट के कॉरिडोर से गुजरने वाले तेल टैंकरों को एस्कॉर्ट किया जा सके. इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि बढ़ते तनाव के बीच नेविगेशन की स्वतंत्रता बनी रहे और अंतरराष्ट्रीय तेल सप्लाई प्रभावित न हो.
भारत, रूस और चीन की रणनीतिक भूमिका इस समय बहुत महत्वपूर्ण है. रूस की सप्लाई बढ़ाने की पेशकश और अमेरिकी नेविगेशन गारंटी के बावजूद होर्मुज स्ट्रेट पर ईरान के नियंत्रण के कारण तेल बाजार में अस्थिरता बनी हुई है. विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है, तो वैश्विक तेल कीमतों में तेजी और भारत जैसे देशों की इंपोर्ट कॉस्ट में बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है.
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