उत्तर प्रदेश में बिजली उपभोक्ताओं के लिए राहत भरी खबर सामने आई है. राज्य में पुराने बिजली मीटरों को हटाकर स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाने की प्रक्रिया पर फिलहाल रोक लगा दी गई है. यह निर्णय उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (UPPCL) के अध्यक्ष डॉ. आशीष गोयल की ओर से लिया गया है, जिन्होंने तत्काल प्रभाव से मीटर बदलने की प्रक्रिया को रोकने का निर्देश जारी किया है.
यह रोक तब तक लागू रहेगी, जब तक राज्य सरकार द्वारा गठित उच्चस्तरीय तकनीकी समिति अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं कर देती.
सभी डिस्कॉम को स्पष्ट निर्देश
डॉ. आशीष गोयल ने प्रदेश के सभी बिजली वितरण निगमों (डिस्कॉम) के प्रबंध निदेशकों को लिखे पत्र में साफ कहा है कि किसी भी उपभोक्ता का पुराना मीटर चाहे जबरन हो या स्वेच्छा से अब नहीं बदला जाएगा, जब तक तकनीकी समिति की अंतिम रिपोर्ट नहीं आ जाती.
हालांकि, इस फैसले के बावजूद नए बिजली कनेक्शन देने की प्रक्रिया जारी रहेगी. नए उपभोक्ताओं को स्मार्ट प्रीपेड मीटर के माध्यम से ही कनेक्शन दिया जाएगा, ताकि सिस्टम में तकनीकी रूप से कोई रुकावट न आए.
क्यों उठाना पड़ा यह कदम?
पिछले कुछ समय से प्रदेश के कई जिलों में स्मार्ट मीटर को लेकर विरोध बढ़ रहा था. उपभोक्ताओं का आरोप था कि बिना पूर्व सूचना या सहमति के उनके चालू मीटर हटाकर नए प्रीपेड स्मार्ट मीटर लगाए जा रहे हैं.
कई लोगों ने यह भी शिकायत की कि स्मार्ट मीटर लगने के बाद बिजली बिल में अचानक वृद्धि हो गई है. इसके अलावा प्रीपेड सिस्टम में बैलेंस खत्म होते ही बिना चेतावनी के बिजली कट जाने से लोगों में नाराजगी बढ़ी.
मुख्यमंत्री स्तर पर समीक्षा
बढ़ते विरोध और शिकायतों को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हाल ही में ऊर्जा विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक कर पूरे मामले की समीक्षा की थी.
इसके बाद 12 अप्रैल को एक उच्चस्तरीय तकनीकी समिति का गठन किया गया, जिसे स्मार्ट मीटर से जुड़ी सभी तकनीकी और उपभोक्ता शिकायतों की जांच का जिम्मा सौंपा गया है.
तकनीकी समिति की भूमिका
यह समिति निम्न बिंदुओं की गहन जांच करेगी:
समिति की रिपोर्ट के आधार पर ही आगे की रणनीति तय की जाएगी कि राज्य में स्मार्ट मीटर अभियान को किस तरह आगे बढ़ाया जाए.
अब तक कितने लगे स्मार्ट मीटर?
ऊर्जा विभाग के आंकड़ों के अनुसार, उत्तर प्रदेश में अब तक करीब 78 लाख स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं. इनमें से लगभग 70.50 लाख प्रीपेड स्मार्ट मीटर हैं.
सरकार का लक्ष्य पूरे राज्य को धीरे-धीरे प्रीपेड मीटर प्रणाली में बदलना है, लेकिन फिलहाल तकनीकी समस्याओं और जनता के विरोध के चलते इस योजना की गति धीमी पड़ गई है.
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