Operation Sindoor: ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भले ही हालात बाहर से शांत दिखाई दिए हों, लेकिन हकीकत यह थी कि भारत हर संभावित स्थिति के लिए पूरी तरह तैयार खड़ा था. भारतीय सेना के प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने साफ शब्दों में कहा है कि उन 88 घंटों के दौरान अगर पाकिस्तान की ओर से कोई भी गलत कदम उठाया जाता, तो भारतीय सेना ज़मीनी कार्रवाई शुरू करने में एक पल की भी देरी नहीं करती. यह बयान भारत की सैन्य रणनीति और बदलते सुरक्षा दृष्टिकोण को साफ तौर पर दर्शाता है.
मंगलवार को आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में आर्मी चीफ ने बताया कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान सेना की तैयारी सिर्फ जवाबी कार्रवाई तक सीमित नहीं थी, बल्कि पारंपरिक युद्ध के दायरे को आगे बढ़ाने की पूरी क्षमता विकसित की जा चुकी थी. उन्होंने कहा कि पहले यह माना जाता था कि पारंपरिक सैन्य टकराव की गुंजाइश लगातार कम हो रही है और किसी भी संघर्ष के जल्दी ही सब-कन्वेंशनल या यहां तक कि न्यूक्लियर स्तर तक पहुंचने की आशंका रहती है. लेकिन ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत की रणनीति और जवाबी कार्रवाई ने ज़मीनी सच्चाई को पूरी तरह बदल दिया.
जम्मू-कश्मीर में जवाब ने दिखाया भारत का बदला हुआ रुख
जनरल द्विवेदी ने खासतौर पर जम्मू-कश्मीर में हुई फायरिंग का जिक्र करते हुए कहा कि जिस तरह से भारतीय सेना ने पाकिस्तान की हरकतों का जवाब दिया, उससे यह स्पष्ट हो गया कि भारत ने पारंपरिक ऑपरेशन की सीमा को और मजबूत किया है. उन्होंने बताया कि ऑपरेशन के दौरान भारतीय सेना ने लगभग 100 पाकिस्तानी सैनिकों को मार गिराया, जो इस बात का संकेत है कि भारत अब किसी भी उकसावे को हल्के में लेने के मूड में नहीं है.
पहलगाम हमले के बाद 22 मिनट में बदली रणनीति
आर्मी चीफ ने बताया कि पहलगाम हमले के बाद भारतीय सेना ने महज 22 मिनट के भीतर अपनी रणनीति को पूरी तरह रिसेट कर दिया था. यह तेजी और निर्णय क्षमता इस बात का प्रमाण है कि भारतीय सेना अब पहले से कहीं ज्यादा सतर्क, संगठित और तकनीकी रूप से सक्षम हो चुकी है. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ऑपरेशन सिंदूर अभी समाप्त नहीं हुआ है और पाकिस्तान की ओर से किसी भी प्रकार की हरकत का जवाब उसी सख्ती से दिया जाएगा.
पाकिस्तान की कैजुअलिटी पर बड़ा खुलासा
पाकिस्तान को हुए नुकसान पर बात करते हुए जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने एक दिलचस्प तथ्य साझा किया. उन्होंने बताया कि अगस्त के मध्य में पाकिस्तान ने गलती से करीब 150 लोगों की एक सूची जारी कर दी थी, जिसे बाद में वापस ले लिया गया. भारतीय सेना के विश्लेषण के अनुसार, इनमें से लगभग 100 लोग लाइन ऑफ कंट्रोल या इंटरनेशनल बॉर्डर के जम्मू-कश्मीर सेक्टर में फायरिंग के दौरान मारे गए थे. यह आंकड़ा ऑपरेशन सिंदूर की प्रभावशीलता को दर्शाता है.
ड्रोन वारफेयर ने बदली सेना की ताकत
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान ड्रोन तकनीक की भूमिका पर भी आर्मी चीफ ने विस्तार से बात की. उन्होंने कहा कि ड्रोन पहले भी सेना की रणनीति का हिस्सा थे, लेकिन इस ऑपरेशन के बाद इस क्षेत्र में तेजी से बदलाव और विस्तार किया गया. ड्रोन का उपयोग रेगिस्तानी इलाकों से लेकर ऊंचे पहाड़ी क्षेत्रों तक सफलतापूर्वक वैलिडेट किया जा चुका है. ऑपरेशन के चलते इन्हें तेजी से कमीशन करना जरूरी हो गया था.
नई बटालियन और विशेष ड्रोन यूनिट का गठन
जनरल द्विवेदी ने बताया कि ड्रोन का प्रभावी इस्तेमाल करने के लिए केवल तकनीक ही नहीं, बल्कि कुशल ऑपरेटर और बेहतर इंटीग्रेशन भी जरूरी है. इसी सोच के तहत इन्फेंट्री बटालियन के भीतर ‘अश्विनी प्लाटून’ का गठन किया गया, जिसमें शामिल होने के लिए सैनिकों को एक विशेष स्तर की योग्यता हासिल करनी होती है. इसके साथ ही भैरव लाइट कमांडो बटालियन की स्थापना की गई है और अब तक 13 भैरव बटालियन तैयार की जा चुकी हैं.
ऑपरेशन सिंदूर बना नई सैन्य सोच का प्रतीक
कुल मिलाकर ऑपरेशन सिंदूर केवल एक सैन्य कार्रवाई नहीं, बल्कि भारत की बदली हुई रणनीतिक सोच का प्रतीक बनकर उभरा है. यह ऑपरेशन दिखाता है कि भारत अब न केवल जवाब देने में सक्षम है, बल्कि जरूरत पड़ने पर हर स्तर की कार्रवाई के लिए पूरी तरह तैयार भी है. आर्मी चीफ के बयान ने यह साफ कर दिया है कि भविष्य में किसी भी दुस्साहस का जवाब पहले से कहीं ज्यादा सख्ती और निर्णायक तरीके से दिया जाएगा.
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